24 अगस्त 2026
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केले के चिप्स स्टार्टअप से खुशबू पाटिल ने बुरहानपुर में बनाई ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई राह

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केले के चिप्स स्टार्टअप से खुशबू पाटिल ने बुरहानपुर में बनाई ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई राह

सारांश

MBA और मल्टीनेशनल नौकरी छोड़कर बुरहानपुर की खुशबू पाटिल ने अपने गांव में केले के चिप्स का स्टार्टअप खड़ा किया। सरकारी सब्सिडी की मदद से शुरू हुई इस इकाई में अब 20 ग्रामीण काम कर रहे हैं — यह सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल है।

मुख्य बातें

खुशबू पाटिल (24 वर्ष), बोरसर गांव, बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर केले के चिप्स स्टार्टअप शुरू किया।
मार्केटिंग में एमबीए के बाद करीब दो वर्षों की कॉरपोरेट नौकरी का अनुभव, फिर गांव वापसी।
सरकारी योजना के तहत मिली सब्सिडी ने स्टार्टअप शुरू करने में अहम भूमिका निभाई।
वर्तमान में करीब 20 ग्रामीण इस इकाई में कार्यरत हैं।
भविष्य में केले के अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की 24 वर्षीय खुशबू पाटिल ने एक मल्टीनेशनल कंपनी की कॉरपोरेट नौकरी को पीछे छोड़कर अपने गांव में केले के चिप्स का स्टार्टअप खड़ा किया है। 7 जुलाई 2026 को सामने आई इस कहानी में उद्यमिता, सरकारी सब्सिडी और ग्रामीण रोजगार तीनों का मेल है। आज उनकी इकाई में करीब 20 ग्रामीण कार्यरत हैं और भविष्य में केले के अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार किए जाने की योजना है।

कॉरपोरेट से गांव तक का सफर

खुशबू पाटिल ने मार्केटिंग में एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब दो वर्षों तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया। शहरी नौकरी की चकाचौंध के बावजूद उनके मन में अपने गांव और वहाँ के लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही। उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा कि अपने गांव लौटकर कुछ ऐसा किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल सके।'

यह ऐसे समय में आया है जब देश में शहरी युवाओं का एक वर्ग उद्यमिता की ओर रुख कर रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की कोशिश कर रहा है। खुशबू का यह निर्णय उसी प्रवृत्ति का एक ठोस उदाहरण है।

बुरहानपुर की पहचान और स्टार्टअप की नींव

बुरहानपुर केले के उत्पादन के लिए पहले से ही जाना जाता है। खुशबू ने इसी स्थानीय संसाधन को अपने व्यवसाय की बुनियाद बनाया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान ने उन्हें स्वरोजगार की प्रेरणा दी और सरकार की एक योजना के तहत मिली सब्सिडी ने स्टार्टअप की शुरुआत को व्यावहारिक बनाया।

गौरतलब है कि बुरहानपुर जैसे कृषि-प्रधान जिलों में कच्चे माल की उपलब्धता और प्रसंस्करण इकाइयों की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। खुशबू का यह उद्यम उस अंतर को पाटने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

ग्रामीण रोजगार पर असर

स्टार्टअप में कार्यरत किशोर चौधरी ने बताया कि उन्हें केले से जुड़े कार्य का 15 से 20 वर्षों का अनुभव है और इस इकाई ने उन्हें तथा अन्य ग्रामीणों को रोजगार दिया है। वर्तमान में करीब 20 लोग इस यूनिट में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केले से अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम शुरू हो चुका है, जिससे भविष्य में रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।

गांव के लोगों ने भी खुशबू के प्रयास की सराहना की और कहा कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।

परिवार और समुदाय की आवाज़

खुशबू के पिता युवराज पाटिल ने कहा, 'देश में करोड़ों युवा हैं और सभी को सरकारी या निजी नौकरी मिल पाना संभव नहीं है। ऐसे में स्वरोजगार ही भविष्य का मजबूत विकल्प बन सकता है।' उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

खुशबू ने भी युवाओं को संदेश देते हुए कहा, 'युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।'

आगे की राह

खुशबू पाटिल की यह यात्रा अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन केले के मूल्यवर्धित उत्पादों के विस्तार की योजना संकेत देती है कि यह स्टार्टअप आने वाले समय में और अधिक रोजगार सृजन कर सकता है। बुरहानपुर जैसे जिलों में ऐसे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह अपवाद है या बदलती प्रवृत्ति। सरकारी सब्सिडी की भूमिका स्वीकार की गई है, पर किस योजना के तहत, कितनी राशि — यह स्पष्ट नहीं है, जो जवाबदेही के लिहाज़ से जरूरी है। बुरहानपुर जैसे केला-उत्पादक जिलों में प्रसंस्करण इकाइयों की संभावना वर्षों से रेखांकित होती रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन अब भी सीमित है। 20 रोजगार एक शुरुआत है — असली परीक्षा तब होगी जब यह मॉडल स्केल होगा और सब्सिडी-निर्भरता से आगे टिकाऊ बाज़ार तक पहुँचेगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खुशबू पाटिल कौन हैं और उन्होंने क्या किया?
खुशबू पाटिल मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की 24 वर्षीय उद्यमी हैं, जिन्होंने मार्केटिंग में एमबीए के बाद मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर गांव में केले के चिप्स का स्टार्टअप शुरू किया। उनकी इकाई में वर्तमान में करीब 20 ग्रामीण कार्यरत हैं।
खुशबू पाटिल के स्टार्टअप में कितने लोगों को रोजगार मिला है?
वर्तमान में करीब 20 लोग इस केले के चिप्स की इकाई में काम कर रहे हैं। इकाई में कार्यरत किशोर चौधरी के अनुसार भविष्य में केले के अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे, जिससे रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।
क्या सरकारी योजना ने इस स्टार्टअप में मदद की?
हाँ, खुशबू पाटिल ने बताया कि सरकार की एक योजना के तहत मिली सब्सिडी ने स्टार्टअप शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी स्वरोजगार की प्रेरणा का स्रोत बताया।
बुरहानपुर केले के व्यवसाय के लिए क्यों उपयुक्त है?
बुरहानपुर जिला केले के उत्पादन के लिए पहले से प्रसिद्ध है। खुशबू ने इसी स्थानीय कृषि संसाधन को आधार बनाकर केले के चिप्स का प्रसंस्करण उद्यम शुरू किया, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित रहती है।
युवाओं के लिए खुशबू पाटिल का क्या संदेश है?
खुशबू पाटिल का कहना है कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवा सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं तो वे खुद का व्यवसाय स्थापित कर दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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