केले के चिप्स स्टार्टअप से खुशबू पाटिल ने बुरहानपुर में बनाई ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई राह
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की 24 वर्षीय खुशबू पाटिल ने एक मल्टीनेशनल कंपनी की कॉरपोरेट नौकरी को पीछे छोड़कर अपने गांव में केले के चिप्स का स्टार्टअप खड़ा किया है। 7 जुलाई 2026 को सामने आई इस कहानी में उद्यमिता, सरकारी सब्सिडी और ग्रामीण रोजगार तीनों का मेल है। आज उनकी इकाई में करीब 20 ग्रामीण कार्यरत हैं और भविष्य में केले के अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार किए जाने की योजना है।
कॉरपोरेट से गांव तक का सफर
खुशबू पाटिल ने मार्केटिंग में एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब दो वर्षों तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया। शहरी नौकरी की चकाचौंध के बावजूद उनके मन में अपने गांव और वहाँ के लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही। उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा कि अपने गांव लौटकर कुछ ऐसा किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल सके।'
यह ऐसे समय में आया है जब देश में शहरी युवाओं का एक वर्ग उद्यमिता की ओर रुख कर रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की कोशिश कर रहा है। खुशबू का यह निर्णय उसी प्रवृत्ति का एक ठोस उदाहरण है।
बुरहानपुर की पहचान और स्टार्टअप की नींव
बुरहानपुर केले के उत्पादन के लिए पहले से ही जाना जाता है। खुशबू ने इसी स्थानीय संसाधन को अपने व्यवसाय की बुनियाद बनाया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान ने उन्हें स्वरोजगार की प्रेरणा दी और सरकार की एक योजना के तहत मिली सब्सिडी ने स्टार्टअप की शुरुआत को व्यावहारिक बनाया।
गौरतलब है कि बुरहानपुर जैसे कृषि-प्रधान जिलों में कच्चे माल की उपलब्धता और प्रसंस्करण इकाइयों की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। खुशबू का यह उद्यम उस अंतर को पाटने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
ग्रामीण रोजगार पर असर
स्टार्टअप में कार्यरत किशोर चौधरी ने बताया कि उन्हें केले से जुड़े कार्य का 15 से 20 वर्षों का अनुभव है और इस इकाई ने उन्हें तथा अन्य ग्रामीणों को रोजगार दिया है। वर्तमान में करीब 20 लोग इस यूनिट में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केले से अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम शुरू हो चुका है, जिससे भविष्य में रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।
गांव के लोगों ने भी खुशबू के प्रयास की सराहना की और कहा कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।
परिवार और समुदाय की आवाज़
खुशबू के पिता युवराज पाटिल ने कहा, 'देश में करोड़ों युवा हैं और सभी को सरकारी या निजी नौकरी मिल पाना संभव नहीं है। ऐसे में स्वरोजगार ही भविष्य का मजबूत विकल्प बन सकता है।' उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
खुशबू ने भी युवाओं को संदेश देते हुए कहा, 'युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।'
आगे की राह
खुशबू पाटिल की यह यात्रा अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन केले के मूल्यवर्धित उत्पादों के विस्तार की योजना संकेत देती है कि यह स्टार्टअप आने वाले समय में और अधिक रोजगार सृजन कर सकता है। बुरहानपुर जैसे जिलों में ऐसे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।