हमीरपुर में कीर्ति सिंह द्वारा स्थापित ‘प्रेरणा कैंटीन’ ने दी आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा
सारांश
Key Takeaways
- कीर्ति सिंह ने 'प्रेरणा कैंटीन' की स्थापना की।
- यह कैंटीन 332 बच्चों को किफायती भोजन उपलब्ध कराती है।
- कैंटीन से जुड़ी महिलाएं हर महीने 8 हजार रुपए कमाती हैं।
- यह सरकारी योजनाओं की सफलता का एक उदाहरण है।
- स्वच्छ और पौष्टिक भोजन का महत्व।
लखनऊ, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई योजनाएं अब वास्तविकता में बदलाव की कहानी लिख रही हैं। हमीरपुर जनपद की कीर्ति सिंह इस दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।
एक समय में अध्यापिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत कीर्ति के जीवन में 2018 में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। इस विकल्प ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया और समाज में एक नई पहचान दिलाई।
कीर्ति ने अगस्त 2025 में 10 महिलाओं के साथ मिलकर हमीरपुर के दरियापुर में स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में 'प्रेरणा कैंटीन' की स्थापना की। लगभग 11 लाख रुपए के निवेश से शुरू हुआ यह प्रयास आज एक सफल उद्यम बन चुका है, जिसका टर्नओवर लगभग 1.25 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्तमान में इस कैंटीन से 8 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें हर महीने लगभग 8 हजार रुपए की आय हो रही है। यह कैंटीन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि पोषण और स्वच्छता का भी उदाहरण बन गई है।
यहां 332 बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक नाश्ता, दूध और भोजन किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही विद्यालय के शिक्षकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की गई है। कीर्ति का मानना है कि स्वच्छ और पौष्टिक भोजन ही स्वस्थ समाज की नींव है और इसी सोच के साथ वह इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं।
कीर्ति सिंह की सफलता राज्य सरकार की योजनाओं, विशेषकर स्वयं सहायता समूह और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की प्रभावशीलता को दर्शाती है। बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए शुरू हुआ उनका सफर अब उद्यमिता तक पहुंच चुका है।
कीर्ति ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन भी किया है ताकि अपने व्यवसाय का और विस्तार कर सकें। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुंचती हैं और उनमें मेहनत व संकल्प जुड़ जाता है, तब बदलाव की नई इबारत लिखी जाती है। आज कीर्ति न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।