मोदी आर्काइव ने किया बड़ा खुलासा, बाबासाहेब की भूमिका पर दिया जोर
सारांश
Key Takeaways
- अंबेडकर और मोदी के विचारों का गहरा संबंध।
- संविधान दिवस की घोषणा और बाबासाहेब को सम्मान।
- सरकार की योजनाओं में अंत्योदय की सोच।
- पंचतीर्थ का विकास और आधुनिकीकरण।
- डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण के लिए भीम ऐप का महत्व।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बीआर अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर 'मोदी आर्काइव' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों के बीच गहरे संबंध का उल्लेख किया। इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे पीएम मोदी ने वर्षों से बाबा साहेब की विरासत को समर्पित भाव से आगे बढ़ाया है।
पोस्ट में पीएम मोदी के उस प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था, "अगर बाबा साहेब नहीं होते, तो नरेंद्र मोदी भी यहां नहीं होते।" पीएम मोदी ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उनका साधारण पृष्ठभूमि से उठकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना, बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक भारत और संविधान की देन है। वे अक्सर अपने 'गरीब और पिछड़े' वर्ग से होने की बात करते हैं और इसे संविधान की सफलता का प्रमाण मानते हैं। उनके अनुसार, अंबेडकर की महानतम विरासत एक ऐसा भारत है, जहां जन्म किसी की सफलता का अवरोध नहीं बनता और हर नागरिक को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सकता है।
पोस्ट में 'पंचतीर्थ' का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। ये पांच पवित्र स्थल अंबेडकर जी के जीवन से जुड़े हुए हैं, जो महू की जन्मभूमि से लेकर 26 अलीपुर रोड (दिल्ली) और लंदन तक फैले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सभी स्थलों के बुनियादी ढांचे के विकास और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया है। इन स्थलों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि हर पीढ़ी यहां आकर उस महान व्यक्तित्व के जीवन और योगदान को समझ सके, जिसने करोड़ों लोगों को सम्मान और अधिकार दिलाए।
इस पोस्ट में वर्ष 2015 का भी उल्लेख किया गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में घोषित किया। यह कदम संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने और अंबेडकर को भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार के रूप में सम्मान देने के लिए उठाया गया था। यह दिन हर भारतीय को याद दिलाता है कि देश को संचालित करने वाला संविधान एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा था, जिसे कभी सार्वजनिक कुएं से पानी पीने के अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा था।
पोस्ट में यह भी बताया गया कि पीएम मोदी की शासन शैली में 'अंत्योदय' की सोच स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, जिसका अर्थ है समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना। यह विचार सीधे तौर पर बाबा साहेब के मानव गरिमा और समानता के सिद्धांत से जुड़ा हुआ है। यहां विकास को दान नहीं, बल्कि अधिकार के रूप में देखा गया है।
सरकार की योजनाओं को भी इसी सोच से जोड़ा गया है। स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी पहलों के माध्यम से उन लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिन्हें पहले सिस्टम में नजरअंदाज किया जाता था। वहीं, 'भीम ऐप' (जिसका नाम भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा गया) ने गांव-गांव तक डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण का कार्य किया। ये योजनाएं केवल घोषित नहीं हुईं, बल्कि जमीनी स्तर (दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और समाज के अंतिम व्यक्ति) तक पहुंचाई गईं।
पोस्ट में कहा गया कि समय के साथ भारत ने 'अंबेडकर का विजन, मोदी का प्रावधान' को स्पष्ट रूप से समझा है। अर्थात्, अंबेडकर के विचारों और सिद्धांतों को आज की नीतियों के माध्यम से जमीन पर उतारा जा रहा है। यह उन आर्थिक और सामाजिक विचारों का आधुनिक रूप है, जिन्हें बाबा साहेब ने दशकों पहले प्रस्तुत किया था।