10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

त्रिपुरा सारिंदा को जीआई टैग: आदिवासी संगीत विरासत को मिली राष्ट्रीय पहचान, राज्य के पास अब 4 जीआई उत्पाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
त्रिपुरा सारिंदा को जीआई टैग: आदिवासी संगीत विरासत को मिली राष्ट्रीय पहचान, राज्य के पास अब 4 जीआई उत्पाद

सारांश

त्रिपुरा सारिंदा को जीआई टैग मिलना महज एक प्रमाण-पत्र नहीं — यह पीढ़ियों की सांस्कृतिक स्मृति को कानूनी कवच देना है। राज्य के चौथे जीआई उत्पाद के रूप में यह मान्यता आदिवासी कारीगरों की आजीविका और त्रिपुरा की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान दोनों को नई दिशा दे सकती है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा सारिंदा को 16 जून 2026 को जीआई टैग प्रदान किया गया, जो राज्य का चौथा जीआई-प्रमाणित उत्पाद है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इसे आदिवासी लोक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
इससे पहले क्वीन अनानास , रिषा/पचरा (रिग्नाई) और माताबाड़ी पेड़ा को जीआई प्रमाणन मिल चुका है।
माताबाड़ी पेड़ा 524 वर्ष पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से जुड़ी परंपरा है, जो हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
₹236 करोड़ के 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल' के तहत अनानास उत्पादन और बाजार विस्तार की पहल पहले ही शुरू हो चुकी है।

त्रिपुरा के पारंपरिक तार वाद्ययंत्र त्रिपुरा सारिंदा को 16 जून 2026 को प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया गया, जिससे राज्य की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस उपलब्धि को राज्य की लोक परंपराओं को जीवित रखने की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। इस मान्यता के साथ, त्रिपुरा के पास अब कुल चार जीआई-टैग प्राप्त उत्पाद हो गए हैं।

त्रिपुरा सारिंदा क्या है और क्यों है खास

त्रिपुरा सारिंदा राज्य का एक अनूठा स्थानीय तार वाद्ययंत्र है, जो पीढ़ियों से आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। यह वाद्ययंत्र न केवल संगीत परंपरा का प्रतीक है, बल्कि उन कारीगरों और संगीतकारों की रचनात्मकता और समर्पण का भी प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने इसे सदियों से सँजोए रखा है। जीआई टैग मिलने से अब इस वाद्ययंत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सूचना एवं संस्कृति विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, 'त्रिपुरा सारिंदा' को जीआई मान्यता मिलना राज्य की अनमोल लोक परंपराओं को सुरक्षित रखने, बेहतर बनाने और लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे त्रिपुरा की अलग सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत को और अधिक मजबूती मिलेगी। साहा ने इस उपलब्धि का श्रेय उन कारीगरों और संगीतकारों को दिया जिनके हुनर और समर्पण ने इस वाद्ययंत्र को जीवित रखा।

त्रिपुरा के अन्य जीआई-टैग उत्पाद

मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले राज्य के तीन उत्पादों को जीआई प्रमाणन प्राप्त हो चुका है — क्वीन अनानास, आदिवासी समुदायों का पारंपरिक परिधान रिषा/पचरा (रिग्नाई), और माताबाड़ी पेड़ामाताबाड़ी पेड़ा दूध से बनी एक पारंपरिक मिठाई है, जो दक्षिण त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में स्थित 524 वर्ष पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है — यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

क्वीन अनानास और मिशन पाइनएप्पल

त्रिपुरा अपने अनानास की 'क्वीन' और 'क्यू' किस्मों के लिए प्रसिद्ध है, जो राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों और आर्द्र जलवायु में न्यूनतम रासायनिक उपयोग से उगाई जाती हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतनलाल नाथ के अनुसार, ये अनानास अपने सुनहरे-पीले रंग, अनूठे स्वाद और सुगंध के लिए पहचाने जाते हैं। इसी कड़ी में, नॉर्थ ईस्टर्न रीजन विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री साहा और मंत्री नाथ के साथ मिलकर ₹236 करोड़ के 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल, त्रिपुरा' की शुरुआत की थी।

आगे की राह

त्रिपुरा सारिंदा को मिली जीआई पहचान से उम्मीद है कि इस वाद्ययंत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत को मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज हो रहे हैं। गौरतलब है कि जीआई टैग न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका और उत्पादों की बाजार पहुँच को भी सुदृढ़ करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती इस मान्यता को कागज से ज़मीन तक ले जाने की है। पिछले जीआई उत्पादों — विशेषकर क्वीन अनानास — के अनुभव बताते हैं कि प्रमाण-पत्र मिलने के बाद भी कारीगरों और किसानों को बाजार तक पहुँच के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सारिंदा बनाने वाले कारीगरों की संख्या और उनकी आर्थिक स्थिति पर सरकार ने अभी तक कोई ठोस आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। जब तक जीआई टैग को कारीगर-केंद्रित आजीविका योजनाओं से नहीं जोड़ा जाता, यह मान्यता सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक तो बनेगी, लेकिन आर्थिक परिवर्तन की वाहक नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा सारिंदा क्या है और इसे जीआई टैग क्यों मिला?
त्रिपुरा सारिंदा राज्य का एक पारंपरिक तार वाद्ययंत्र है जो आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा है। इसे जीआई टैग इसलिए मिला क्योंकि यह वाद्ययंत्र विशिष्ट रूप से त्रिपुरा की भौगोलिक और सांस्कृतिक परंपरा से उत्पन्न है और इसकी विशिष्टता को कानूनी संरक्षण देना आवश्यक था।
त्रिपुरा के कितने उत्पादों को अब तक जीआई टैग मिल चुका है?
त्रिपुरा सारिंदा को जीआई टैग मिलने के बाद राज्य के कुल चार उत्पाद जीआई-प्रमाणित हो गए हैं — क्वीन अनानास, रिषा/पचरा (रिग्नाई), माताबाड़ी पेड़ा और अब त्रिपुरा सारिंदा। ये सभी उत्पाद राज्य की विविध सांस्कृतिक और कृषि विरासत को दर्शाते हैं।
माताबाड़ी पेड़ा का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से क्या संबंध है?
माताबाड़ी पेड़ा दूध से बनी एक पारंपरिक मिठाई है जो दक्षिण त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर स्थित 524 वर्ष पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है। यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है, जो इस मिठाई को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
मिशन क्वीन पाइनएप्पल क्या है और इसका बजट कितना है?
मिशन क्वीन पाइनएप्पल, त्रिपुरा एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य राज्य के क्वीन अनानास का उत्पादन बढ़ाना और उसके बाजार का विस्तार करना है। इस मिशन की शुरुआत ₹236 करोड़ के बजट के साथ नॉर्थ ईस्टर्न रीजन विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री माणिक साहा और कृषि मंत्री रतनलाल नाथ के साथ मिलकर की थी।
जीआई टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग मिलने से त्रिपुरा सारिंदा बनाने वाले कारीगरों और संगीतकारों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है। यह टैग वाद्ययंत्र की भौगोलिक विशिष्टता को कानूनी सुरक्षा देता है, जिससे नकल या गलत ब्रांडिंग से बचाव होता है और बाजार में उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले