त्रिपुरा सारिंदा को जीआई टैग: आदिवासी संगीत विरासत को मिली राष्ट्रीय पहचान, राज्य के पास अब 4 जीआई उत्पाद
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के पारंपरिक तार वाद्ययंत्र त्रिपुरा सारिंदा को 16 जून 2026 को प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया गया, जिससे राज्य की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस उपलब्धि को राज्य की लोक परंपराओं को जीवित रखने की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। इस मान्यता के साथ, त्रिपुरा के पास अब कुल चार जीआई-टैग प्राप्त उत्पाद हो गए हैं।
त्रिपुरा सारिंदा क्या है और क्यों है खास
त्रिपुरा सारिंदा राज्य का एक अनूठा स्थानीय तार वाद्ययंत्र है, जो पीढ़ियों से आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। यह वाद्ययंत्र न केवल संगीत परंपरा का प्रतीक है, बल्कि उन कारीगरों और संगीतकारों की रचनात्मकता और समर्पण का भी प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने इसे सदियों से सँजोए रखा है। जीआई टैग मिलने से अब इस वाद्ययंत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
सूचना एवं संस्कृति विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा, 'त्रिपुरा सारिंदा' को जीआई मान्यता मिलना राज्य की अनमोल लोक परंपराओं को सुरक्षित रखने, बेहतर बनाने और लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे त्रिपुरा की अलग सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत को और अधिक मजबूती मिलेगी। साहा ने इस उपलब्धि का श्रेय उन कारीगरों और संगीतकारों को दिया जिनके हुनर और समर्पण ने इस वाद्ययंत्र को जीवित रखा।
त्रिपुरा के अन्य जीआई-टैग उत्पाद
मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले राज्य के तीन उत्पादों को जीआई प्रमाणन प्राप्त हो चुका है — क्वीन अनानास, आदिवासी समुदायों का पारंपरिक परिधान रिषा/पचरा (रिग्नाई), और माताबाड़ी पेड़ा। माताबाड़ी पेड़ा दूध से बनी एक पारंपरिक मिठाई है, जो दक्षिण त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में स्थित 524 वर्ष पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है — यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
क्वीन अनानास और मिशन पाइनएप्पल
त्रिपुरा अपने अनानास की 'क्वीन' और 'क्यू' किस्मों के लिए प्रसिद्ध है, जो राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों और आर्द्र जलवायु में न्यूनतम रासायनिक उपयोग से उगाई जाती हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतनलाल नाथ के अनुसार, ये अनानास अपने सुनहरे-पीले रंग, अनूठे स्वाद और सुगंध के लिए पहचाने जाते हैं। इसी कड़ी में, नॉर्थ ईस्टर्न रीजन विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री साहा और मंत्री नाथ के साथ मिलकर ₹236 करोड़ के 'मिशन क्वीन पाइनएप्पल, त्रिपुरा' की शुरुआत की थी।
आगे की राह
त्रिपुरा सारिंदा को मिली जीआई पहचान से उम्मीद है कि इस वाद्ययंत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत को मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज हो रहे हैं। गौरतलब है कि जीआई टैग न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका और उत्पादों की बाजार पहुँच को भी सुदृढ़ करता है।