हम्पी में 7 जुलाई को उच्चस्तरीय कार्यशाला, कर्नाटक बनाएगा वैश्विक पर्यटन स्थलों का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार 7 जुलाई 2026 को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी में एक उच्चस्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन पर्यटन स्थलों की पहचान कर उन्हें अंतिम रूप देना है जिन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। यह पहल कर्नाटक को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की राज्य सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
मंत्री के.जे. जॉर्ज का बयान
कार्यशाला से एक दिन पहले मीडिया से बात करते हुए पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने कहा कि यह विमर्श कर्नाटक में वर्ल्ड-क्लास पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा, 'हम कंपनियों, निवेशकों और पर्यटन विशेषज्ञों को साथ लेकर कर्नाटक को विश्व स्तर का बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाने का रोडमैप तैयार कर रहे हैं। इस कार्यशाला के फैसले अगले 10 साल में कर्नाटक के पर्यटन को नई ऊंचाई देंगे।'
कार्यशाला के प्रमुख एजेंडे
इस कार्यशाला में बुनियादी ढाँचे का विकास, पर्यटकों का अनुभव, निजी क्षेत्र का निवेश, पर्यावरणीय स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी, कनेक्टिविटी, डेस्टिनेशन ब्रांडिंग, अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग और टिकाऊ पर्यटन मॉडल जैसे अहम पहलुओं पर केंद्रित चर्चा होगी। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा करेंगे और दीर्घकालिक रणनीति के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे।
चुने गए स्थलों को क्या मिलेगा
सरकार के अनुसार, कार्यशाला की सिफारिशों के आधार पर प्राथमिकता वाले पर्यटन स्थलों के पहले समूह को अंतिम रूप दिया जाएगा। इन स्थलों को विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे, उन्नत पर्यटक सुविधाओं, टिकाऊ पर्यटन प्रथाओं, रणनीतिक निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग से लैस किया जाएगा। गौरतलब है कि हम्पी पहले से ही यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, जो इसे वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के लिए एक स्वाभाविक आकर्षण का केंद्र बनाता है।
कर्नाटक पर्यटन की व्यापक तस्वीर
यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत के कई राज्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की होड़ में हैं। कर्नाटक में हम्पी, मैसूरु, कूर्ग और बेलगावी जैसे विविध पर्यटन स्थल हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मानकों की बुनियादी सुविधाओं की कमी इन स्थलों की क्षमता को सीमित करती रही है। यह कार्यशाला उसी अंतर को पाटने की कोशिश है।
आगे की राह
कार्यशाला से निकलने वाली सिफारिशें राज्य सरकार की ग्लोबल स्टैंडर्ड टूरिस्ट डेस्टिनेशन पहल की नींव रखेंगी। निवेशकों और पर्यटन विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी से यह उम्मीद है कि कर्नाटक भारत के शीर्ष वैश्विक पर्यटन गंतव्यों में अपनी स्थिति और मज़बूत करेगा।