क्या सीएम हेमंत सोरेन ने यूके में झारखंड की विरासत और विकास का रोडमैप पेश किया?

Click to start listening
क्या सीएम हेमंत सोरेन ने यूके में झारखंड की विरासत और विकास का रोडमैप पेश किया?

सारांश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूके में झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और विकास के लिए वैश्विक साझेदारी का रोडमैप प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम भारत और यूके के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। जानें इस यात्रा के दौरान क्या-क्या खास चर्चा हुई।

Key Takeaways

  • झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया गया।
  • मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों पर जोर दिया।
  • यूके के साथ संरक्षण और शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा हुई।
  • “झारखंड-25” वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम की महत्वपूर्ण बैठक हुई।
  • झारखंड में मेगालिथिक परंपराओं की चर्चा।

रांची/लंदन, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के विकास में वैश्विक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करने एवं राज्य की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर है।

इस क्रम में शुक्रवार को लंदन में भारत के उच्चायोग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं, प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से संवाद कर झारखंड की प्राथमिकताओं और क्षमताओं को प्रस्तुत किया।

भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अपनी खनिज संपदा, युवा शक्ति और जीवंत सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से भारत के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राज्य की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक संभावनाओं और मानव संसाधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि झारखंड निवेश, नवाचार और वैश्विक साझेदारी के लिए तत्पर है।

कार्यक्रम के दौरान यूनाइटेड किंगडम के साथ विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक साझेदारी और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से झारखंड के युवाओं को वैश्विक अवसर मिलेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस पहल को यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के अनुरूप बताया गया।

मुख्यमंत्री ने “झारखंड-25” वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम के तहत “हिस्टोरिक इंग्लैंड” नामक संस्था के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह संस्था यूनाइटेड किंगडम में ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और प्रबंधन के लिए जानी जाती है। बैठक में मेगालिथ, मोनोलिथ, प्रागैतिहासिक परिदृश्य और जीवाश्म पार्कों के संरक्षण से संबंधित वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। बैठक में वैज्ञानिक प्रलेखन, संरक्षण योजना, समुदाय की भागीदारी और सांस्कृतिक पर्यटन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

इस दौरान मुख्यमंत्री को एवेबरी और स्टोनहेंज जैसे विश्व प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थलों के भ्रमण का विशेष आमंत्रण भी दिया गया। यह संवाद यूके-भारत व्यापक सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम-2025 के तहत हुआ, जो दोनों देशों के बीच विरासत संरक्षण, अनुसंधान, संग्रहालय और क्षमता निर्माण में सहयोग का संरचित ढांचा प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां मेगालिथिक परंपराएं आज भी समुदायों के दैनिक जीवन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विरासत संरक्षण को अनुसंधान, शिक्षा, स्थानीय आजीविका और समुदाय-आधारित पर्यटन से जोड़ने पर काम कर रही है। बैठक में हजारीबाग के पकरी बरवाडीह स्थित मेगालिथिक साइट्स, मंदर जीवाश्म उद्यान (साहिबगंज) तथा राज्य के विभिन्न जिलों में फैले शैलचित्र और पाषाण स्मारकों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर एक कॉफी टेबल बुक भी साझा की गई, जिसमें झारखंड की प्रागैतिहासिक विरासत को शोध और दृश्य दस्तावेजों के माध्यम से वैश्विक मंच पर रखा गया है। इस कार्यक्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार, कल्पना मुर्मू सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना डाडेल सहित भारतीय और ब्रिटिश संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Point of View

बल्कि भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस प्रकार से सांस्कृतिक विरासत और विकास के लिए संवाद स्थापित किया है, वह भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने में सहायक होगा। यह कदम दर्शाता है कि कैसे राज्य वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति बढ़ा सकता है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूके में क्या चर्चा की?
मुख्यमंत्री ने झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक प्रगति और वैश्विक साझेदारी पर संवाद किया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य झारखंड के विकास में वैश्विक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना था।
Nation Press