23 सितंबर 2026
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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा ऐलान: तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मिलेगा आशियाना

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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा ऐलान: तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मिलेगा आशियाना

सारांश

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर महिलाओं को आवास देने का प्रस्ताव तैयार किया है। चेयरमैन शादाब शम्स ने मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद यह पहल की है। अगले महीने बोर्ड बैठक में कानूनी प्रावधानों की जाँच के साथ प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा।

मुख्य बातें

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 23 सितंबर 2026 को तीन तलाक व हलाला पीड़ित महिलाओं को आवास देने के प्रस्ताव की घोषणा की।
प्रस्ताव अगले महीने होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा; बोर्ड आवास निर्माण या भूमि आवंटन के विकल्पों पर विचार करेगा।
मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के बाद यह पहल शुरू हुई; वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा हटाने की मुहिम के तहत खाली कराई गई जमीन का उपयोग संभव।
लाभार्थियों में तीन तलाक पीड़िताएँ, हलाला से प्रभावित महिलाएँ और बेसहारा महिलाएँ शामिल होंगी।
कानूनी प्रावधानों और शर्तों की जाँच बोर्ड बैठक से पहले की जाएगी।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 23 सितंबर 2026 को देहरादून में घोषणा की कि बोर्ड तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं से प्रभावित बेघर व बेसहारा महिलाओं को आवास उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर विचार करेगा। यह प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा, जिसके अगले महीने आयोजित होने की उम्मीद है।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि

शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि वक्फ संपत्तियाँ मूलतः गरीबों, यतीमों, विधवाओं, बेसहारा बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के हक के लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में तीन तलाक से प्रभावित महिलाओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहाँ पति के घर से निकाले जाने के बाद इन महिलाओं को मायके में भी जगह नहीं मिल पाती। पिता की मृत्यु या परिवार में सीमित संसाधनों के कारण कुछ महिलाएँ अपने बच्चों के साथ बेघर होने की स्थिति में पहुँच जाती हैं।

मुख्य घटनाक्रम

शम्स के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद वक्फ बोर्ड इन महिलाओं के लिए काम करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत बोर्ड दो विकल्पों — आवास निर्माण अथवा उपलब्ध वक्फ भूमि का आवंटन — पर विचार कर सकता है। किस कानूनी प्रक्रिया और किन शर्तों के तहत यह सहायता दी जा सकती है, इसकी भी जाँच की जाएगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार वक्फ माफिया और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अवैध कब्जे से वक्फ संपत्तियाँ खाली कराने के लिए लगातार अभियान चला रही है। यह पहल उसी प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है — जहाँ खाली कराई गई संपत्तियों का उपयोग वास्तविक हकदारों तक पहुँचाने की कोशिश की जाएगी।

प्रभावित महिलाओं पर असर

यह प्रस्ताव मुख्यतः तीन वर्गों की महिलाओं को लक्षित करता है — तीन तलाक की पीड़िताएँ, हलाला जैसी कुप्रथा से प्रभावित महिलाएँ, और वे बेसहारा महिलाएँ जिन्हें न पति का सहारा मिला है और न परिवार का। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ वक्फ संपत्तियों का उपयोग इस प्रकार की सामाजिक सुरक्षा के लिए किया जाएगा।

कानूनी और प्रशासनिक पहलू

शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड वक्फ कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों की जाँच करेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संपत्तियों का इस्तेमाल पूरी तरह वैध तरीके से हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली बोर्ड बैठक के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन परिस्थितियों में और किस तरीके से वक्फ बोर्ड इन महिलाओं की सहायता कर सकता है।

आगे क्या

अगले महीने प्रस्तावित बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना है। बैठक में कानूनी प्रावधानों की जाँच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। यह पहल उत्तराखंड में वक्फ प्रशासन को जवाबदेह और समाज-उपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि अभी यह महज एक प्रस्ताव है, कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं। वक्फ संपत्तियों पर दशकों से चले आ रहे अवैध कब्जे और कानूनी उलझनों को देखते हुए यह सवाल बना रहेगा कि खाली कराई गई संपत्तियाँ वास्तव में किन महिलाओं तक और कितनी जल्दी पहुँचेंगी। इस पहल का सामाजिक संदेश सही है, पर पारदर्शी पात्रता मानदंड और स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के बिना यह लाभार्थी चयन में विवाद का कारण भी बन सकती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को आवास कैसे देगा?
बोर्ड वक्फ संपत्तियों पर आवास बनाकर देने या उपलब्ध भूमि का आवंटन करने के दो विकल्पों पर विचार करेगा। अगले महीने होने वाली बोर्ड बैठक में कानूनी प्रावधानों की जाँच के बाद अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा।
यह प्रस्ताव कब तक लागू होगा?
शादाब शम्स के अनुसार अगले महीने वक्फ बोर्ड की बैठक बुलाने की उम्मीद है। इसी बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस प्रस्ताव से कौन-सी महिलाएँ लाभान्वित होंगी?
मुख्य रूप से तीन वर्गों को लक्षित किया गया है — तीन तलाक की पीड़िताएँ, हलाला जैसी कुप्रथा से प्रभावित महिलाएँ, और वे बेसहारा महिलाएँ जिनके पास न पति का सहारा है और न छत। अंतिम पात्रता मानदंड बोर्ड बैठक में तय होंगे।
उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों की स्थिति क्या है?
शादाब शम्स के अनुसार राज्य में वक्फ जमीनों पर वक्फ माफिया और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अवैध कब्जा रहा है। उत्तराखंड सरकार इन संपत्तियों को खाली कराने के लिए लगातार अभियान चला रही है।
क्या यह प्रस्ताव वक्फ कानून के तहत संभव है?
बोर्ड ने कहा है कि वक्फ कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों की विधिवत जाँच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संपत्तियों का उपयोग पूरी तरह वैध और पारदर्शी तरीके से हो।
राष्ट्र प्रेस
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