उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण पर घमासान, कांग्रेस विधायक ने 2027 चुनाव से पहले 33%25 कोटा लागू करने की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस विधायक मोहम्मद निजामुद्दीन ने 70 सीटों के आधार पर, बिना नए परिसीमन के 33%25 महिला आरक्षण लागू करने की माँग की।
- कांग्रेस विधायक यशपाल आर्य ने कहा कि 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में लागू किया जाए।
- BJP विधायक सविता कपूर ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आरक्षण सभी महिलाओं के हित में है।
- कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने बताया कि इकबालपुर मिल पर किसानों का ₹110-120 करोड़ बकाया 2018-19 सीज़न से लंबित है।
- कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने आरोप लगाया कि सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा बहनों की लंबित माँगों पर ध्यान नहीं दे रही।
उत्तराखंड विधानसभा में 28 अप्रैल को महिला आरक्षण और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ा, जब कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने सरकार से माँग की कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, जबकि BJP ने विपक्ष के रवैये पर पलटवार किया।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस की मांग
कांग्रेस विधायक मोहम्मद निजामुद्दीन ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि राज्य में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना नए परिसीमन के, मौजूदा 70 सीटों के आधार पर ही यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। उनका तर्क था कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए।
कांग्रेस विधायक यशपाल आर्य ने कहा,