एआईएडीएमके जिला सचिवों की बैठक 1 नवंबर को, हार और बगावत के बीच पलानीस्वामी का अगला कदम
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को सभी जिला सचिवों की एक अहम बैठक बुलाई है। चेन्नई में होने वाली यह बैठक ऐसे नाज़ुक मोड़ पर आई है, जब पार्टी एक साथ चुनावी विफलताओं, वरिष्ठ नेताओं के खुले असंतोष और संगठनात्मक अनिश्चितता से जूझ रही है। अभी तक बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
यह बैठक अक्टूबर 2026 में हुए मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में एआईएडीएमके के तीसरे स्थान पर रहने के बाद पार्टी जिला सचिवों की पहली औपचारिक बैठक होगी। उल्लेखनीय यह है कि अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने इन्हीं दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी — यानी महज कुछ महीनों में इन सीटों का गँवाना संगठनात्मक कमज़ोरी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
2026 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके केवल 47 सीटें जीत पाई और सत्ता में वापसी करने में नाकाम रही। अब दोनों उपचुनावी सीटें भी हाथ से निकल जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा हुआ है।
आंतरिक विद्रोह की पृष्ठभूमि
पार्टी का यह संकट वास्तव में विधानसभा चुनावों के ठीक बाद शुरू हुआ, जब एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने नेतृत्व की लाइन से अलग जाते हुए मई 2026 में हुए विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार का समर्थन किया था। इस विद्रोह के बाद पलानीस्वामी ने असंतुष्ट नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया और उनकी जगह वफादार नेताओं को जिला इकाइयों की कमान सौंप दी।
हालाँकि बाद में कुछ वरिष्ठ नेताओं को अन्य ज़िम्मेदारियाँ दी गईं। उदाहरण के तौर पर पूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि को उप-महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें कोयंबटूर उपनगरीय दक्षिण जिला इकाई का नियंत्रण वापस नहीं मिला। जिला-स्तरीय प्रभाव को लेकर यह विवाद अब तक अनसुलझा है।
वरिष्ठ नेताओं की माँग
पूर्व मंत्री सी. वी. षणमुगम, एस. पी. वेलुमणि और पी. थंगामणि समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की निर्णय लेने वाली इकाइयों — जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति — की बैठक बुलाने की माँग की है, ताकि लगातार मिल रही हार पर खुली चर्चा हो सके। उपचुनाव प्रचार के दौरान इन तीनों नेताओं का नाम पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर रहा, जिसने नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच की खाई को और उजागर कर दिया।
गौरतलब है कि नियमों के तहत दिसंबर 2026 तक पार्टी की जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य है, ऐसे में 1 नवंबर की यह जिला सचिवों की बैठक उन बड़े संगठनात्मक निर्णयों की पृष्ठभूमि तैयार करने का काम कर सकती है।
आगे क्या होगा
सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रविवार की बैठक में लगातार मिल रही हारों की गहन समीक्षा होती है और क्या जनरल काउंसिल की तैयारियों का कोई रोडमैप सामने आता है। संगठनात्मक ज़िम्मेदारियों के पुनर्वितरण या असंतुष्ट नेताओं से सुलह को लेकर लिया गया कोई भी निर्णय, एआईएडीएमके की आंतरिक और चुनावी चुनौतियों से निपटने की दिशा तय करेगा।