29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एआईएडीएमके जिला सचिवों की बैठक 1 नवंबर को, हार और बगावत के बीच पलानीस्वामी का अगला कदम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एआईएडीएमके जिला सचिवों की बैठक 1 नवंबर को, हार और बगावत के बीच पलानीस्वामी का अगला कदम

सारांश

चुनावी मोर्चे पर लगातार पिटती एआईएडीएमके के लिए 1 नवंबर की जिला सचिवों की बैठक महज औपचारिकता नहीं — यह पलानीस्वामी के लिए पार्टी को बिखरने से बचाने का आखिरी मौका भी हो सकती है। 25 बागी विधायक, हटाए गए वरिष्ठ नेता और दिसंबर की अनिवार्य जनरल काउंसिल — सब कुछ इसी बैठक पर टिका है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के.
पलानीस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को जिला सचिवों की बैठक बुलाई है।
2026 विधानसभा चुनावों में पार्टी केवल 47 सीटें जीत पाई और सत्ता गँवाई।
मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनावों में एआईएडीएमके तीसरे स्थान पर रही, जबकि ये सीटें अप्रैल 2026 में पार्टी ने ही जीती थीं।
पार्टी के 25 विधायकों ने मई 2026 में नेतृत्व के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार का समर्थन किया था।
पूर्व मंत्री षणमुगम , वेलुमणि और थंगामणि को उपचुनाव प्रचारकों की सूची से बाहर रखा गया।
दिसंबर 2026 तक पार्टी की जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को सभी जिला सचिवों की एक अहम बैठक बुलाई है। चेन्नई में होने वाली यह बैठक ऐसे नाज़ुक मोड़ पर आई है, जब पार्टी एक साथ चुनावी विफलताओं, वरिष्ठ नेताओं के खुले असंतोष और संगठनात्मक अनिश्चितता से जूझ रही है। अभी तक बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

यह बैठक अक्टूबर 2026 में हुए मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में एआईएडीएमके के तीसरे स्थान पर रहने के बाद पार्टी जिला सचिवों की पहली औपचारिक बैठक होगी। उल्लेखनीय यह है कि अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने इन्हीं दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी — यानी महज कुछ महीनों में इन सीटों का गँवाना संगठनात्मक कमज़ोरी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

2026 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके केवल 47 सीटें जीत पाई और सत्ता में वापसी करने में नाकाम रही। अब दोनों उपचुनावी सीटें भी हाथ से निकल जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा हुआ है।

आंतरिक विद्रोह की पृष्ठभूमि

पार्टी का यह संकट वास्तव में विधानसभा चुनावों के ठीक बाद शुरू हुआ, जब एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने नेतृत्व की लाइन से अलग जाते हुए मई 2026 में हुए विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार का समर्थन किया था। इस विद्रोह के बाद पलानीस्वामी ने असंतुष्ट नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया और उनकी जगह वफादार नेताओं को जिला इकाइयों की कमान सौंप दी।

हालाँकि बाद में कुछ वरिष्ठ नेताओं को अन्य ज़िम्मेदारियाँ दी गईं। उदाहरण के तौर पर पूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि को उप-महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें कोयंबटूर उपनगरीय दक्षिण जिला इकाई का नियंत्रण वापस नहीं मिला। जिला-स्तरीय प्रभाव को लेकर यह विवाद अब तक अनसुलझा है।

वरिष्ठ नेताओं की माँग

पूर्व मंत्री सी. वी. षणमुगम, एस. पी. वेलुमणि और पी. थंगामणि समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की निर्णय लेने वाली इकाइयों — जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति — की बैठक बुलाने की माँग की है, ताकि लगातार मिल रही हार पर खुली चर्चा हो सके। उपचुनाव प्रचार के दौरान इन तीनों नेताओं का नाम पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर रहा, जिसने नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच की खाई को और उजागर कर दिया।

गौरतलब है कि नियमों के तहत दिसंबर 2026 तक पार्टी की जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य है, ऐसे में 1 नवंबर की यह जिला सचिवों की बैठक उन बड़े संगठनात्मक निर्णयों की पृष्ठभूमि तैयार करने का काम कर सकती है।

आगे क्या होगा

सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रविवार की बैठक में लगातार मिल रही हारों की गहन समीक्षा होती है और क्या जनरल काउंसिल की तैयारियों का कोई रोडमैप सामने आता है। संगठनात्मक ज़िम्मेदारियों के पुनर्वितरण या असंतुष्ट नेताओं से सुलह को लेकर लिया गया कोई भी निर्णय, एआईएडीएमके की आंतरिक और चुनावी चुनौतियों से निपटने की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उपचुनाव में तीसरा स्थान और 25 बागी विधायक। असली सवाल यह नहीं कि बैठक में क्या एजेंडा होगा, बल्कि यह है कि क्या पलानीस्वामी षणमुगम और वेलुमणि जैसे असंतुष्ट नेताओं को सार्थक ज़िम्मेदारी देने को तैयार हैं, या वे फिर से प्रतीकात्मक पदों से काम चलाएंगे। जिस पार्टी के 25 विधायकों ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व की अवज्ञा की हो, उसमें जिला-स्तरीय पुनर्गठन बिना सच्ची सुलह के कारगर नहीं होगा। दिसंबर की जनरल काउंसिल तक का समय कम है और दरारें गहरी हैं।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके की 1 नवंबर की बैठक क्यों बुलाई गई है?
एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को जिला सचिवों की बैठक बुलाई है, जो मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनावों में पार्टी के तीसरे स्थान पर रहने के बाद पहली बड़ी संगठनात्मक बैठक है। इस बैठक में चुनावी हार की समीक्षा और दिसंबर में अनिवार्य जनरल काउंसिल की तैयारी पर चर्चा की संभावना है।
एआईएडीएमके के भीतर बगावत की शुरुआत कब और कैसे हुई?
यह संकट मई 2026 में शुरू हुआ, जब पार्टी के 25 विधायकों ने नेतृत्व के निर्देश की अनदेखी करते हुए विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार का समर्थन किया। इसके बाद पलानीस्वामी ने असंतुष्ट नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया, जिससे आंतरिक तनाव और गहरा हो गया।
एआईएडीएमके ने 2026 के विधानसभा और उपचुनावों में कैसा प्रदर्शन किया?
अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके केवल 47 सीटें जीत पाई और सत्ता में वापसी नहीं कर सकी। इसके बाद अक्टूबर 2026 में मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनावों में पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जबकि ये दोनों सीटें पार्टी ने अप्रैल में ही जीती थीं।
वेलुमणि और षणमुगम जैसे वरिष्ठ नेता क्या माँग कर रहे हैं?
पूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि, सी. वी. षणमुगम और पी. थंगामणि समेत वरिष्ठ नेता पार्टी की जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक बुलाने की माँग कर रहे हैं, ताकि लगातार हारों पर खुली चर्चा हो सके। उपचुनाव प्रचार में इन नेताओं को स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर रखे जाने से उनका असंतोष और बढ़ा है।
एआईएडीएमके की जनरल काउंसिल की बैठक कब तक होनी है?
पार्टी के नियमों के तहत दिसंबर 2026 तक जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य है। 1 नवंबर की जिला सचिवों की बैठक इसी बड़ी बैठक की पृष्ठभूमि तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले