एआईएडीएमके में बड़ी कार्रवाई: पलानीस्वामी ने शनमुगम के 100 से अधिक समर्थकों को पदों से हटाया
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने विल्लुपुरम जिले में पूर्व मंत्री सी.वी. शनमुगम से जुड़े 100 से अधिक पार्टी पदाधिकारियों को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया है। लगातार चुनावी पराजयों के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी आंतरिक संघर्ष इस कार्रवाई के साथ और अधिक तीखा हो गया है।
किन पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई
यह संगठनात्मक कार्रवाई मयिलम यूनियन के पदाधिकारियों के खिलाफ की गई है, जो शनमुगम के मयिलम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। हटाए गए लोगों में यूनियन स्तर के पदाधिकारी और शाखा सचिव शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि पलानीस्वामी नेतृत्व ने शनमुगम के राजनीतिक गढ़ में उनके समर्थकों की जड़ें खोदने का व्यापक अभियान छेड़ा है।
गौरतलब है कि यह ताज़ा कार्रवाई जुलाई में हुई छंटनी के बाद की दूसरी बड़ी पहल है। उस समय शनमुगम को जिला सचिव पद से हटाए जाने के बाद भी उनके कई समर्थकों को पार्टी पदों से वंचित किया गया था। उनकी जगह पशुपति को विल्लुपुरम जिले का नया पार्टी सचिव नियुक्त किया गया था।
पार्टी में गहरी हुई दरार का इतिहास
एआईएडीएमके के भीतर असंतोष की जड़ें अप्रैल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार से जुड़ी हैं। शनमुगम और पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व में विधायकों के एक गुट ने पलानीस्वामी के नेतृत्व को खुलकर चुनौती दी। तब से विल्लुपुरम जिले में दो विरोधी गुट समानांतर रूप से काम कर रहे हैं — एक शनमुगम के प्रति निष्ठावान, और दूसरा नव नियुक्त जिला सचिव के नेतृत्व में।
यह ऐसे समय में आया है जब मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में एआईएडीएमके को पुनः पराजय का सामना करना पड़ा और पार्टी दोनों ही सीटों पर तीसरे स्थान पर रही। इन हारों ने नेतृत्व से असंतुष्ट गुट को और अधिक मुखर बना दिया।
जनरल काउंसिल बैठक की माँग
शनमुगम, वेलुमणि और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से तत्काल 'जनरल काउंसिल' की बैठक बुलाने की माँग की है। उनका कहना है कि इस बैठक में पार्टी की लगातार चुनावी हार के कारणों और नेतृत्व की दिशा पर खुली चर्चा होनी चाहिए। पलानीस्वामी नेतृत्व ने अभी तक इस माँग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पलानीस्वामी की रणनीति
मयिलम यूनियन में कई संगठनात्मक स्तरों पर एक साथ छंटनी कर पलानीस्वामी ने जिला इकाई पर अपनी पकड़ और मज़बूत करने की कोशिश की है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ गुटीय विवाद को सुलझाने की बजाय उसे और गहरा कर रही हैं, क्योंकि दोनों खेमे अभी भी अलग-अलग काम कर रहे हैं।
आगे की राह
चुनावी गिरावट को रोकने के लिए संगठनात्मक पुनर्गठन और आंतरिक मतभेदों का समाधान एआईएडीएमके के सामने दोहरी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जनरल काउंसिल बैठक की माँग और नेतृत्व विवाद समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो पार्टी की संगठनात्मक एकता और आगामी चुनावी तैयारियाँ दोनों प्रभावित हो सकती हैं।