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दिवाली 2026: अमृतसर के पटाखा बाजारों में उमड़ी भीड़, ग्रीन पटाखे और टॉय ट्रेन बनी नई पसंद

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दिवाली 2026: अमृतसर के पटाखा बाजारों में उमड़ी भीड़, ग्रीन पटाखे और टॉय ट्रेन बनी नई पसंद

सारांश

अमृतसर के पटाखा बाजारों में दिवाली का उत्साह दिख रहा है — लेकिन इस बार बदला हुआ। परंपरागत धमाकेदार पटाखों की जगह ग्रीन पटाखे और टॉय ट्रेन जैसी नई किस्में छाई हैं। माता-पिता बच्चों के साथ खरीदारी में खुद शामिल हो रहे हैं, और सुरक्षा व पर्यावरण की सोच त्योहार का नया रंग बन रही है।

मुख्य बातें

अमृतसर के पटाखा बाजारों में दिवाली 2026 से पहले त्योहारी भीड़ उमड़ी, ग्रीन पटाखों की माँग प्रमुख रही।
व्यापारी जितेंद्र सिंह के अनुसार बाजार में 'टॉय ट्रेन' पटाखा बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय नई किस्म बनकर उभरी है।
ग्राहक चश्मीर सिंह ने बताया कि पटाखों का उपयोग पहले की तुलना में लगभग आधा रह गया है।
स्कूलों में बच्चों को ग्रीन पटाखे चलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे जागरूकता में इज़ाफा हो रहा है।
परिवार अब बच्चों के साथ खुद बाजार में आकर सुरक्षित पटाखे चुन रहे हैं — सुरक्षा को लेकर नजरिया बदला है।

दिवाली के नजदीक आते ही अमृतसर के पटाखा बाजारों में त्योहारी उत्साह चरम पर पहुँच गया है। पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच इस बार खरीदार प्रमाणित ग्रीन पटाखों और नई किस्मों की ओर स्पष्ट रुझान दिखा रहे हैं। परिवार बच्चों के साथ बाजारों में उतर रहे हैं और पारंपरिक धमाकेदार पटाखों की जगह कम प्रदूषण वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बाजार में ग्राहक चश्मीर सिंह ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार लोगों में जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कहा, 'लोग डरते हैं कि ज्यादा तेज पटाखों से कहीं नुकसान न हो जाए, कहीं आग न लग जाए या कोई हादसा न हो जाए। दिवाली के समय ऐसा अक्सर होता है, कभी हाथ में पटाखा फट जाता है, कभी कोई गलत चीज ले ली तो ब्लास्ट हो जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुमान से पटाखों का उपयोग पहले की तुलना में लगभग आधा रह गया है, जिसमें ग्रीन पटाखों का बढ़ता चलन और बच्चों में मोबाइल की दिलचस्पी दोनों की भूमिका है।

व्यापारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि बाजार में इस बार ग्रीन पटाखे हावी हैं और माता-पिता खुद बच्चों के साथ आकर खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए एक नई और खास किस्म आई है — 'टॉय ट्रेन' — जो पटाखे का मज़ा देती है और देखने में खिलौने जैसी लगती है, जो बच्चों के बीच खासी लोकप्रिय हो रही है।

ग्रीन दिवाली की ओर बदलाव

व्यापारी जितेंद्र सिंह ने ग्रीन दिवाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्कूलों में भी बच्चों को ग्रीन पटाखे चलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'ग्रीन दिवाली मनाने से प्रदूषण कम होगा और आने वाला भविष्य बेहतर रहेगा। बच्चों को भी यह बात समझ में आ गई है कि ग्रीन पटाखे चलाना हमारी सेहत के लिए बेहतर है।'

एक अन्य ग्राहक अरविंद सिंह ने कहा कि पहले अनार, चकरी और कई तरह के पारंपरिक पटाखे होते थे, लेकिन अब समय के साथ उनमें भी बदलाव आया है। इस बार पटाखे ग्रीन और कम प्रदूषण वाले हैं, जो बाजार की बदलती माँग को दर्शाता है।

आम जनता पर असर

बाजारों में परिवारों की बढ़ती मौजूदगी यह संकेत देती है कि दिवाली का उत्साह बरकरार है, लेकिन उसका स्वरूप बदल रहा है। माता-पिता अब बच्चों को अकेले पटाखे चलाने देने के बजाय खुद पास खड़े रहते हैं और सुरक्षित विकल्प चुनते हैं। चश्मीर सिंह के अनुसार बाजार अगर 15-20 दिन पहले लग जाता तो रौनक और अधिक होती, यानी देरी से लगे बाजार के बावजूद उत्साह कम नहीं है।

नई किस्में और बाजार की रौनक

इस साल बाजार में टॉय ट्रेन के अलावा कई नई वैरायटी के पटाखे आए हैं जो कम धुआँ और कम आवाज़ के साथ रंगीन रोशनी देते हैं। व्यापारियों के अनुसार बच्चों और अभिभावकों दोनों की प्रतिक्रिया सकारात्मक है। अरविंद सिंह ने कहा कि बच्चे नए कपड़े पहनेंगे, मिठाइयाँ खाएँगे और घर जगमगाएँगे — दिवाली का यह पारंपरिक उल्लास इस बार ग्रीन रंग में रंगा नजर आ रहा है।

क्या होगा आगे

व्यापारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आएगी, बाजार में भीड़ और बढ़ेगी। ग्रीन पटाखों का यह रुझान यदि आगे भी जारी रहा तो यह शहरी वायु गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से त्योहारों के दौरान प्रदूषण स्तर पर चिंता जताते रहे हैं, और बाजार में बदलाव का यह संकेत उस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्कूलों और सरकारी नीतियों ने मिलकर बनाया है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और CPCB की गाइडलाइंस के बावजूद बाजार में अप्रमाणित पटाखों की उपलब्धता अभी भी एक चुनौती है — व्यापारियों के 'ग्रीन' दावों की स्वतंत्र सत्यापन व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह सवाल अनुत्तरित रहता है। जब तक प्रवर्तन तंत्र लेबलिंग की जाँच नहीं करता, 'ग्रीन दिवाली' एक आकांक्षा से अधिक नहीं बन पाएगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीन पटाखे क्या होते हैं और ये आम पटाखों से कैसे अलग हैं?
ग्रीन पटाखे वे प्रमाणित पटाखे होते हैं जो परंपरागत पटाखों की तुलना में कम धुआँ, कम आवाज़ और कम हानिकारक रसायन उत्पन्न करते हैं। इन्हें CSIR (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद) द्वारा विकसित फॉर्मूले पर बनाया जाता है और इनसे वायु प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है।
अमृतसर में इस दिवाली पटाखा बाजार में क्या खास है?
इस बार अमृतसर के पटाखा बाजारों में ग्रीन पटाखों की भरमार है और 'टॉय ट्रेन' जैसी नई किस्में बच्चों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। व्यापारियों के अनुसार माता-पिता खुद बच्चों के साथ बाजार में आकर सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।
टॉय ट्रेन पटाखा क्या है?
टॉय ट्रेन एक नई किस्म का पटाखा है जो देखने में खिलौने जैसा लगता है और बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है। यह पटाखे का मनोरंजन और खिलौने की दृश्यता — दोनों को एक साथ देता है, इसलिए यह इस दिवाली सीजन में बच्चों की पसंदीदा किस्म बनकर उभरी है।
क्या पटाखों का उपयोग पहले की तुलना में कम हुआ है?
बाजार में मौजूद ग्राहकों के अनुसार पटाखों का उपयोग पहले की तुलना में लगभग आधा रह गया है। इसके पीछे ग्रीन पटाखों का बढ़ता चलन, सुरक्षा को लेकर जागरूकता और बच्चों में मोबाइल के प्रति बढ़ती रुचि जैसे कारण बताए जा रहे हैं।
ग्रीन दिवाली मनाने से पर्यावरण को क्या फायदा होता है?
ग्रीन पटाखे कम हानिकारक रसायन और कम कण प्रदूषण उत्पन्न करते हैं, जिससे दिवाली के दौरान वायु गुणवत्ता पर दबाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार त्योहारों के दौरान वायु प्रदूषण में होने वाली तेज बढ़ोतरी श्वास संबंधी समस्याओं को बढ़ाती है, इसलिए ग्रीन विकल्पों की ओर बदलाव सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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