रामपुर के मौलाना जमील हयात बोले — यूपी में कांग्रेस अकेले सरकार बनाने में असमर्थ, इमरान मसूद के बयान से भी असहमति
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन को लेकर जारी खींचतान के बीच रामपुर के著名 धर्मगुरु मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने 23 सितंबर को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास अपने दम पर सरकार बनाने की क्षमता नहीं है। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीतिक बहस को नई धार दे दी है।
कांग्रेस की स्थिति पर मौलाना का सीधा प्रहार
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा, 'कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कभी सरकार नहीं बना सकती। कांग्रेस में इतना दम नहीं है कि वह अपने बलबूते पर सरकार बना सके। जुबान से कहने के लिए कोई कुछ भी कह सकता है, लेकिन ऐसे हालात नहीं हैं कि कांग्रेस अकेले जीत जाए।' यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बँटवारे को लेकर तनातनी बनी हुई है।
इमरान मसूद के बयान पर कड़ी असहमति
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि 'समाजवादी पार्टी कुछ नहीं कर पाएगी' — मौलाना जमील हयात ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मुसलमानों की ताकत और राजनीतिक एकता को कमज़ोर कर रहे हैं। उन्होंने जोड़ा, 'हमें सभी के साथ मिलकर अपना काम करना पड़ेगा। कई बार इमरान मसूद के बहुत सख्त बयान आते हैं, हम लोग उससे इत्तेफाक नहीं रखते।'
गौरतलब है कि इमरान मसूद सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद हैं और उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में एक प्रमुख धर्मगुरु द्वारा उनकी आलोचना राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
मुस्लिम मुख्यमंत्री की माँग पर मौलाना की आपत्ति
मौलाना जमील हयात ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की उस माँग की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने 'जितनी आबादी, उतना हक' के नारे के तहत सपा से किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने की अपील की थी।
मौलाना हयात ने कहा, 'मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूँ। भारत के अंदर मुसलमान जिस स्थिति में हैं, उन्हें शांति और सुकून के साथ उनका जितना हक है, वह मिलना चाहिए। ऐसे बयानों से फसाद की बातें पैदा होती हैं और ऐसी बयानबाज़ी नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने रजवी के बयान को 'फिरका-परस्ती वाला बयान' करार दिया।
हिंदू नेताओं पर सकारात्मक टिप्पणी
मौलाना जमील हयात ने एक उल्लेखनीय बात यह भी कही कि यदि उनके क्षेत्र के विधायक या सांसद हिंदू हैं, तो वे मुस्लिम समुदाय के लिए बेहतर काम करते हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि हिंदू नेता हमारी बात नहीं सुनते। वह हमारी बहुत सुनते हैं और हमसे प्यार करते हैं।' यह टिप्पणी ऐसे राजनीतिक माहौल में महत्त्वपूर्ण है जहाँ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की आशंकाएँ अक्सर जताई जाती हैं।
आगे क्या
मौलाना जमील हयात के इन बयानों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम धर्मगुरुओं की भूमिका और उनकी प्राथमिकताओं पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। कांग्रेस-सपा गठबंधन की दिशा और मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव आने वाले विधानसभा चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।