रामपुर के मौलाना जमील हयात बोले — 'कांग्रेस अकेले यूपी में सरकार नहीं बना सकती', इमरान मसूद पर भी तीखी टिप्पणी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन को लेकर जारी खींचतान के बीच रामपुर के著名 धर्मगुरु मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने 23 सितंबर 2026 को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस में अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की क्षमता नहीं है।
कांग्रेस पर मौलाना का सीधा हमला
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा, 'कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कभी सरकार नहीं बना सकती। कांग्रेस में इतना दम नहीं है कि वह अपने बलबूते पर सरकार बना सके। जुबान से कहने के लिए कोई कुछ भी कह सकता है, लेकिन ऐसे हालात नहीं हैं कि कांग्रेस अकेले जीत जाए।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और सपा के बीच सीट-बँटवारे और नेतृत्व को लेकर तनाव की खबरें सामने आ रही हैं।
इमरान मसूद के बयान पर पलटवार
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से 'समाजवादी पार्टी कुछ नहीं कर पाएगी' जैसी टिप्पणी पर मौलाना जमील हयात ने कड़ी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान मुसलमानों की सामूहिक राजनीतिक ताकत को कमज़ोर करते हैं। उनके शब्दों में, 'हमें सभी के साथ मिलकर अपना काम करना पड़ेगा। कई बार इमरान मसूद के बहुत सख्त बयान आते हैं, हम लोग उससे इत्तेफाक नहीं रखते।'
मौलाना रजवी की माँग पर आपत्ति
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की उस माँग की भी मौलाना जमील हयात ने आलोचना की, जिसमें 'जितनी आबादी, उतना हक' के नारे के तहत समाजवादी पार्टी से एक मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, 'मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूँ। ऐसे बयानों से फसाद की बातें पैदा होती हैं और ऐसी बयानबाज़ी नहीं करनी चाहिए।'
हिंदू नेताओं पर विश्वास की बात
मौलाना जमील हयात ने एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदू विधायक और सांसद भी मुस्लिम समुदाय की बात सुनते हैं और उनके लिए काम करते हैं। उनके अनुसार, 'हम कह सकते हैं कि अगर हमारे विधायक और सांसद हिंदू हैं तो वह हमसे भी अधिक काम करते हैं। ऐसा नहीं है कि हिंदू नेता हमारी बात नहीं सुनते।' उन्होंने मौलाना रजवी के बयान को 'फिरका-परस्ती वाला बयान' करार दिया।
आगे की राजनीतिक संभावनाएँ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की रणनीति को लेकर बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। मौलाना जमील हयात जैसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं के बयान यूपी के मुस्लिम मतदाताओं की राय को प्रभावित कर सकते हैं, और इस संदर्भ में उनकी टिप्पणियाँ राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही हैं।