इकरा हसन के बयान पर इमरान मसूद का पलटवार: 'न करें गठबंधन, हम भीख नहीं माँग रहे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर तनाव खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 26 सितंबर 2026 को सपा सांसद इकरा हसन के उस बयान पर तीखा जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'बिना गठबंधन कांग्रेस कुछ नहीं पाएगी।' मसूद ने स्पष्ट लहजे में कहा कि कांग्रेस किसी के सामने हाथ फैलाने की स्थिति में नहीं है।
इमरान मसूद का सीधा जवाब
इमरान मसूद ने कहा, 'न करें गठबंधन, कौन कह रहा है? हम क्या किसी से भीख माँग रहे हैं? जिसको जो करना है, वह करे।' उन्होंने एक रूपक का सहारा लेते हुए कहा, 'जब बारात चढ़ती है, तो बहुत सारे ढोल बजाने वाले भी होते हैं, नाचने-गाने वाले भी होते हैं — इन नाचने-गाने वालों को नाचने-गाने दीजिए। हम अपने काम पर लगे हुए हैं।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन की आंतरिक एकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और दोनों पार्टियों के नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
शिवपाल यादव के बयान पर प्रतिक्रिया
सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने इससे पहले कहा था कि कांग्रेस को वोट नहीं मिलना है। इस पर मसूद ने पलटवार करते हुए कहा, 'यह उनकी सोच हो सकती है। शिवपाल यादव जो बात कह रहे हैं, वह खुद अपनी पार्टी के अंदर ही अप्रासंगिक हो गए हैं। जब तक वह अपने नेता से यह बात नहीं कहेंगे, इसका कोई मायने नहीं है।'
गौरतलब है कि शिवपाल यादव के सपा के साथ संबंध पहले से ही उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, और उनके बयानों को अक्सर पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं माना जाता।
सपा की पलटवार: गठबंधन 'आहत' हो रहा है
समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के बयान इंडिया गठबंधन को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के कुछ नेता जो ऐसे बयान देते हैं, जिससे इंडिया गठबंधन आहत होता है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ देने वाले बयान कांग्रेस की ओर से आते रहे हैं।'
राजभर ने यह भी कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन का अंतिम निर्णय राहुल गांधी और अखिलेश यादव लेंगे। उन्होंने कहा, 'जो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बेतुके बयान आ रहे हैं, यह केवल दबाव बनाने के लिए आते हैं। कांग्रेस यूपी-बिहार में कितना पानी में है, यह जगजाहिर है।'
आम जनता और गठबंधन की राजनीति पर असर
यह आंतरिक कलह ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकता की सबसे अधिक ज़रूरत बताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक विवाद से इंडिया गठबंधन की छवि को नुकसान होता है और भाजपा को परोक्ष राजनीतिक लाभ मिलता है।
गठबंधन का अंतिम स्वरूप क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है — लेकिन दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच जारी बयानबाज़ी यह संकेत देती है कि सीट-बँटवारे की बातचीत अभी भी अधर में लटकी हुई है।
आगे क्या होगा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व — अखिलेश यादव और राहुल गांधी — के बीच संभावित बातचीत पर सभी की नज़रें टिकी हैं। फिलहाल दोनों दलों के मध्यम स्तर के नेताओं का यह 'बयान-युद्ध' गठबंधन की संभावनाओं पर संदेह के बादल और गहरे कर रहा है।