11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सपा-कांग्रेस गठबंधन टूटा तो भाजपा को फायदा: एसटी हसन की यूपी चुनाव पर बड़ी चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सपा-कांग्रेस गठबंधन टूटा तो भाजपा को फायदा: एसटी हसन की यूपी चुनाव पर बड़ी चेतावनी

सारांश

सपा नेता एसटी हसन की दो टूक — सपा-कांग्रेस गठबंधन तोड़ने की कोशिश यानी भाजपा की मदद। इमरान मसूद के बयान को नकारा, मुस्लिम सीएम की माँग को समुदाय के लिए नुकसानदेह बताया। यूपी चुनाव से पहले विपक्षी एकता की यह अपील विपक्षी खेमे में बढ़ती दरारों के बीच आई है।

मुख्य बातें

एसटी हसन ने 22 जून को मुरादाबाद में कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन यूपी चुनाव में अनिवार्य है।
उन्होंने चेतावनी दी कि दोनों दलों के बीच दूरियाँ बढ़ाने वाले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा पहुँचा रहे हैं।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद के बयान — कि अखिलेश यादव मुसलमानों के मुद्दे नहीं उठाते — को हसन ने सिरे से खारिज किया।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की मुस्लिम मुख्यमंत्री की माँग को हसन ने समुदाय के लिए नुकसानदेह और भाजपा को लाभ पहुँचाने वाला बताया।
हसन ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में सर्वाधिक मुस्लिम विधायक हैं और पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के न्याय की लड़ाई लड़ रही है।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने 22 जून को मुरादाबाद में स्पष्ट कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन न केवल जरूरी है, बल्कि इसे कमजोर करने की कोशिश करने वाला हर व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचा रहा है। उन्होंने विपक्षी एकता को देश और उत्तर प्रदेश बचाने की अनिवार्य शर्त बताया।

गठबंधन पर हसन का रुख

हसन ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में भाजपा को सीधी चुनौती देने की क्षमता केवल समाजवादी पार्टी (सपा) के पास है और कांग्रेस को इस गठबंधन से फायदा ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीटों के बँटवारे और चुनावी रणनीति का अंतिम निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व करेगा, लेकिन इसमें दोनों दलों के वोट प्रतिशत, संगठनात्मक ताकत और पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन को आधार बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने आगाह किया कि जो नेता ऐसे बयान देते हैं जिनसे सपा और कांग्रेस के बीच दूरियाँ बढ़ती हैं, वे इतिहास और मौजूदा परिस्थितियों का सही आकलन नहीं कर रहे। उनके अनुसार विपक्ष का एकमात्र लक्ष्य भाजपा को हराना और देश को बचाना होना चाहिए।

इमरान मसूद के बयान पर असहमति

कांग्रेस नेता इमरान मसूद द्वारा यह कहे जाने पर कि अखिलेश यादव मुसलमानों के मुद्दों पर बात नहीं करते, डॉ. हसन ने खुलकर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इमरान मसूद एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन इस तरह की बातें उन्हें शोभा नहीं देतीं।

हसन के अनुसार अखिलेश यादव ने हमेशा जुल्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है — चाहे मॉब लिंचिंग का मामला हो, कथित फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा हो या अल्पसंख्यकों से जुड़े अन्य विषय। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव किसी एक वर्ग का तुष्टिकरण नहीं चाहते, बल्कि सभी के लिए न्याय की बात करते हैं।

मुस्लिम मुख्यमंत्री की माँग पर चेतावनी

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी द्वारा मुस्लिम मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की माँग पर हसन ने कहा कि इस तरह की बातें मुस्लिम समुदाय का नुकसान करती हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग, कथित एनकाउंटर और अन्य चुनौतियों के बीच समुदाय को बाँटने वाली माँगें उठाना अनजाने में भाजपा को फायदा पहुँचाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और विपक्षी खेमे में सीट-बँटवारे को लेकर बयानबाजी बढ़ रही है।

पीडीए और सपा की पहचान पर

लखनऊ समेत कई जिलों में लगे अखिलेश यादव से जुड़े पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए हसन ने कहा कि कभी सपा को 'नमाजवादी पार्टी' और अब 'यादवों की पार्टी' कहा जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि समाजवादी पार्टी सबकी पार्टी है। उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की अवधारणा को न्याय की लड़ाई का प्रतीक बताया।

मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल

हसन ने कहा कि खुद को सेक्युलर बताने वाले दलों से भी यह पूछा जाना चाहिए कि वे मुसलमानों को कितने टिकट देते हैं। उन्होंने दावा किया कि सपा में सबसे अधिक मुस्लिम विधायक हैं और पार्टी लगातार अल्पसंख्यकों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देती रही है। गौरतलब है कि यह दावा सपा का पक्ष है; स्वतंत्र आँकड़ों से इसकी पुष्टि अलग से की जानी चाहिए।

अंत में हसन ने दोहराया कि जो भी व्यक्ति सपा या कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करेगा, वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को मजबूत करने का काम करेगा — और यही इस पूरी बहस की केंद्रीय चेतावनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शर्तें सपा की ताकत के इर्द-गिर्द तय होती हैं। दिलचस्प यह है कि जब हसन इमरान मसूद को चुप कराने की कोशिश करते हैं, तो वे खुद एक ऐसे बयान देते हैं जो कांग्रेस पर दबाव बनाता है। मुस्लिम सीएम की माँग को 'भाजपा की मदद' बताना रणनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह उस असली सवाल को टाल देता है कि विपक्ष अल्पसंख्यक समुदाय की राजनीतिक आकांक्षाओं को किस हद तक प्राथमिकता देता है। यूपी में 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन की रूपरेखा अभी तय नहीं है — और इस तरह के सार्वजनिक बयान बातचीत को सुगम बनाने से ज्यादा जटिल बना सकते हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसटी हसन ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर क्या कहा?
हसन ने कहा कि यूपी चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन जरूरी है और इसे कमजोर करने की कोशिश करने वाला व्यक्ति भाजपा को फायदा पहुँचाता है। उनके अनुसार सीटों का बँटवारा दोनों दलों के वोट प्रतिशत और संगठनात्मक ताकत के आधार पर होना चाहिए।
इमरान मसूद के बयान पर एसटी हसन ने क्या प्रतिक्रिया दी?
हसन ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद के उस बयान से असहमति जताई जिसमें कहा गया था कि अखिलेश यादव मुसलमानों के मुद्दे नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने मॉब लिंचिंग, कथित फर्जी एनकाउंटर और अल्पसंख्यक मुद्दों पर हमेशा आवाज उठाई है।
मुस्लिम मुख्यमंत्री की माँग पर हसन का क्या रुख है?
हसन ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की माँग को मुस्लिम समुदाय के लिए नुकसानदेह बताया। उनका कहना था कि ऐसे बयान समुदाय को बाँटते हैं और अनजाने में भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुँचाते हैं।
पीडीए की अवधारणा और सपा की पहचान पर हसन ने क्या कहा?
हसन ने कहा कि समाजवादी पार्टी सबकी पार्टी है — न 'नमाजवादी' और न केवल 'यादवों की'। उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को न्याय की लड़ाई का प्रतीक बताया और कहा कि अखिलेश यादव देश और संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।
यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन न हुआ तो क्या होगा?
हसन के अनुसार यदि दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा की जीत की संभावना बहुत बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन की स्थिति में भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है, इसलिए विपक्षी एकता अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले