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महिला आरक्षण विधेयक: विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देंगी महिलाएं — CM माणिक साहा

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महिला आरक्षण विधेयक: विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देंगी महिलाएं — CM माणिक साहा

सारांश

त्रिपुरा CM माणिक साहा ने महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के विरोध को अन्याय बताया। अगरतला में BJP की 'जनक्रोश महिला पदयात्रा' में बोलते हुए कहा — देश की महिलाएं विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देंगी। 30 अप्रैल को विधानसभा में प्रस्ताव पेश होगा।

मुख्य बातें

CM माणिक साहा ने 25 अप्रैल को अगरतला में जनक्रोश महिला पदयात्रा में महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पहले से कानून है, लेकिन जनगणना और परिसीमन की शर्त के कारण इसका क्रियान्वयन अटका है।
अप्रैल 2026 में संशोधन के लिए विधेयक को संसद में पुनः प्रस्तुत किया गया, जिसका कांग्रेस, TMC और CPI-M ने विरोध किया।
30 अप्रैल को त्रिपुरा विधानसभा में महिला आरक्षण के समर्थन में प्रस्ताव पेश होगा।
कार्यक्रम में BJP प्रदेश अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्य , महिला मोर्चा अध्यक्ष मिमी मजूमदार सहित वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
2011 की जनगणना के आधार पर संशोधन में बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

अगरतला, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाले विपक्षी दलों ने देश की महिलाओं के साथ घोर अन्याय किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत की करोड़ों महिलाएं इस रुख का करारा जवाब भविष्य में अवश्य देंगी।

जनक्रोश महिला पदयात्रा में CM का संबोधन

अगरतला में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित 'जनक्रोश महिला पदयात्रा' में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री माणिक साहा ने ये बातें कहीं। यह पदयात्रा 17 अप्रैल को उस विरोध के रूप में निकाली गई थी, जब संसद में महिला आरक्षण विधेयक से संबंधित संशोधन पारित नहीं हो सके।

मीडिया से बातचीत में CM साहा ने कहा कि वे विपक्ष के इस रवैये की कड़ी निंदा करते हैं और सभी नागरिकों को 30 अप्रैल को राज्य विधानसभा में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संशोधन की जरूरत

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पहले ही संसद में पारित होकर कानून का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि किसी भी कानून के लागू होने के बाद समय-समय पर संशोधन की आवश्यकता होती है, और इस विधेयक के मामले में भी कुछ क्षेत्रों में बदलाव जरूरी पाए गए।

इसी उद्देश्य से अप्रैल 2026 में इस विधेयक को संशोधन हेतु संसद में पुनः प्रस्तुत किया गया। साहा ने स्पष्ट किया कि मुख्य बाधा यह है कि जनगणना पूरी होने तक इसे लागू नहीं किया जा सकता, जबकि जनगणना प्रक्रिया अभी चल रही है। इसका अर्थ है कि बिना संशोधन के कई और वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द आरक्षण का लाभ मिल सके।

PM मोदी की प्रतिबद्धता और विपक्ष का विरोध

CM माणिक साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि इसे व्यापक संसदीय चर्चाओं के बाद पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि PM मोदी महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

हालांकि, साहा ने बताया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य विपक्षी क्षेत्रीय दलों ने इस संशोधन प्रक्रिया का विरोध किया है। उनके अनुसार, यह विरोध महिलाओं के हितों के खिलाफ है और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है।

महिलाएं सड़कों पर, आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

CM साहा ने कहा कि विपक्ष के इस रुख के खिलाफ महिलाएं पहले ही सड़कों पर उतर आई हैं और मार्च आयोजित कर चुकी हैं। आने वाले दिनों में यह आवाज और बुलंद होगी।

इस कार्यक्रम में BJP प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्य, महिला मोर्चा अध्यक्ष मिमी मजूमदार, राज्य विधानसभा की मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय, विधायक अंतरा देब सरकार सहित पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

राजनीतिक विश्लेषण: क्यों अहम है यह मुद्दा

गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में भारी बहुमत से पारित किया गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन की शर्त — जनगणना और परिसीमन — इसे अनिश्चित काल के लिए टाल सकती है। यह विरोधाभास उजागर करता है कि कानून बनाना और उसे जमीन पर लागू करना दो अलग-अलग बातें हैं।

आलोचकों का कहना है कि विपक्ष का विरोध वैचारिक कम और चुनावी गणित अधिक है। 30 अप्रैल को त्रिपुरा विधानसभा में पेश होने वाला प्रस्ताव इस मुद्दे को राज्य स्तर पर नई राजनीतिक धार देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके संशोधन पर वही दल आड़े आ रहे हैं। CM साहा का बयान BJP की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जनगणना-परिसीमन की शर्त से जुड़ा सवाल वाकई असली है — और यह सवाल विपक्ष से ज्यादा सरकार की जवाबदेही तय करता है कि 2023 में कानून बनाते वक्त यह पेच क्यों नहीं सुलझाया गया।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष ने क्या रुख अपनाया है?
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, CPI-M और अन्य विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक के संशोधन का विरोध किया है। CM माणिक साहा ने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और यह कब पारित हुआ?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देता है। इसके लागू होने के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई है।
त्रिपुरा विधानसभा में 30 अप्रैल को क्या होगा?
30 अप्रैल को त्रिपुरा विधानसभा में महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा। CM माणिक साहा ने सभी से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है।
जनक्रोश महिला पदयात्रा क्यों आयोजित की गई?
यह पदयात्रा 17 अप्रैल को BJP द्वारा आयोजित की गई थी, जब संसद में महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े संशोधन पारित नहीं हो सके। इसका उद्देश्य विपक्ष के विरोध के खिलाफ महिलाओं को एकजुट करना था।
महिला आरक्षण विधेयक लागू होने में देरी क्यों है?
विधेयक में प्रावधान है कि इसे जनगणना और उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकता है। चूंकि जनगणना अभी चल रही है, इसलिए क्रियान्वयन में कई वर्षों की देरी संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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