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ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र: सरकार की नई पहल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए

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ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र: सरकार की नई पहल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए

सारांश

केंद्र सरकार वैश्विक अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र पर विचार कर रही है। यह उपभोक्ताओं को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देने का एक प्रयास है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र पर विचार कर रही है।
इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाना है।
बफर स्टॉक प्रणाली का उपयोग होगा।
यह व्यवस्था स्थायी सब्सिडी का हिस्सा नहीं है।
यह भारत के कच्चे तेल भंडार से अलग होगी।

नई दिल्ली, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक अस्थिरता के कारण, केंद्र सरकार ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाना है।

एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव वर्तमान में प्रमुख मंत्रालयों के बीच चर्चा का विषय है, जिसका लक्ष्य एक समर्पित बफर प्रणाली स्थापित करना है, जिसे कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के दौरान लागू किया जा सकेगा।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है और भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित ढांचा कृषि उत्पादों के लिए मौजूदा मूल्य स्थिरीकरण प्रणाली पर आधारित हो सकता है।

इस प्रणाली के तहत, कीमतों में अचानक वृद्धि होने पर अस्थिरता को कम करने के लिए बफर स्टॉक बाजार में जारी किए जाते हैं।

ईंधन के लिए भी इसी तरह की प्रणाली पर विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक मूल्य झटकों के प्रभाव को उपभोक्ताओं तक पहुँचने से रोकना है।

इस योजना में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के लिए एक अलग ईंधन बफर फंड स्थापित करने का प्रस्ताव है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह व्यवस्था भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य गंभीर व्यवधानों के दौरान आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि मूल्य उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना।

निधि की संरचना और हस्तक्षेप के मानदंडों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और अन्य विभागों के बीच विचार-विमर्श जारी है।

इन मानदंडों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों या अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता से जुड़े पूर्वनिर्धारित सीमाएं शामिल हो सकती हैं।

रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इसका उद्देश्य स्थायी सब्सिडी व्यवस्था लागू करना नहीं है, बल्कि अत्यधिक अस्थिरता को कम करना और संकट के समय घरेलू खपत की रक्षा करना है।

इस व्यवस्था के तहत कोई भी हस्तक्षेप अस्थायी और सीमित होगा, और मूल्य स्थितियों के स्थिर होने पर बफर को फिर से भर दिया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र क्या है?
यह एक प्रणाली है जो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बनाई जा रही है।
इस तंत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को कीमतों में अचानक वृद्धि से बचाना है।
क्या यह उपाय स्थायी सब्सिडी का हिस्सा है?
नहीं, इसका उद्देश्य स्थायी सब्सिडी लागू करना नहीं है, बल्कि अस्थिरता को कम करना है।
इस प्रणाली के तहत बफर स्टॉक का क्या महत्व है?
बफर स्टॉक कीमतों में अचानक वृद्धि होने पर अस्थिरता को कम करने में मदद करेगा।
क्या यह प्रणाली भारत के कच्चे तेल भंडार से जुड़ी है?
नहीं, यह व्यवस्था भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगी।
राष्ट्र प्रेस
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