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क्या पुराना तकिया आपकी गर्दन और सिर दर्द का कारण बन सकता है? जानें इसके प्रभाव

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क्या पुराना तकिया आपकी गर्दन और सिर दर्द का कारण बन सकता है? जानें इसके प्रभाव

सारांश

क्या आप जानते हैं कि आपका पुराना तकिया आपकी नींद की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है? आइए जानते हैं कब और क्यों बदलना चाहिए तकिया, ताकि स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।

मुख्य बातें

तकिया का सही चयन शरीर के पोश्चर के लिए आवश्यक है।
पुराने तकिये से एलर्जी और सांस की समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
हर दो से तीन साल में तकिया बदलना चाहिए।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हम अक्सर अच्छी नींद के लिए बिस्तर, गद्दे, या कमरे के वातावरण पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण चीज़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और वह है तकिया। वैज्ञानिक अनुसंधान बताते हैं कि गलत या पुराना तकिया न केवल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि यह शरीर के पोश्चर और सांस से संबंधित समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि तकिया कब और क्यों बदलना चाहिए।

पहले हम बात करते हैं शरीर के पोश्चर की। हमारी रीढ़ की हड्डी को सोते समय एक सीधी रेखा में रहना चाहिए। अगर तकिया बहुत ऊँचा या बहुत पतला हो, तो यह गर्दन को सही समर्थन नहीं देता। इससे रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाता है और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सुबह उठने पर दर्द या अकड़न का अनुभव होता है। इसलिए सही ऊँचाई का तकिया इस्तेमाल करना आवश्यक है ताकि मांसपेशियों को आराम मिले।

दूसरा महत्वपूर्ण कारण है एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएँ। समय के साथ, तकिए के अंदर धूल, पसीना, त्वचा के छोटे कण और सूक्ष्मजीव जमा हो जाते हैं, जिन्हें डस्ट माइट्स कहा जाता है। अनुसंधान के अनुसार, ये छोटे जीव एलर्जी, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। भले ही हम तकिए का कवर बदलते रहें या उसे धोते रहें, लेकिन उसके अंदर जमा गंदगी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाती। यही कारण है कि डॉक्टर और नींद विशेषज्ञ समय-समय पर तकिया बदलने की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञ आमतौर पर हर दो से तीन साल में तकिया बदलने की सलाह देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से उसके मटेरियल पर निर्भर करता है। जो तकिए सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं, वे जल्दी आकार खो देते हैं और उनमें गंदगी भी अधिक जमा होती है, इसलिए उन्हें एक से डेढ़ साल में बदलना बेहतर है।

इसके विपरीत, मेमोरी फोम जैसे मटेरियल लंबे समय तक अपना आकार बनाए रखते हैं और इन्हें तीन से चार साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है। लेटेक्स के तकिए सबसे ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं और सही देखभाल के साथ कई सालों तक चल सकते हैं।

तकिए को उसके साथ दिए गए निर्देशों के अनुसार धोना चाहिए। इससे ऊपर की गंदगी और बैक्टीरिया कम होते हैं। हालाँकि, कुछ मटेरियल जैसे मेमोरी फोम और लेटेक्स को पानी से धोना सही नहीं होता; ऐसे में केवल ऊपर के दाग साफ करने और कवर को नियमित रूप से बदलने की सलाह दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि तकिये का चयन और उसके रखरखाव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सही तकिया न केवल नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है बल्कि शरीर के पोश्चर को भी बनाए रखता है। हर व्यक्ति को नियमित रूप से अपने तकिये की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तकिया कब बदलना चाहिए?
विशेषज्ञ हर दो से तीन साल में तकिया बदलने की सलाह देते हैं, लेकिन यह उसके मटेरियल पर निर्भर करता है।
पुराने तकिये से क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
पुराने तकिये से गर्दन और सिर दर्द, एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
सही तकिये का चयन कैसे करें?
सही तकिये का चयन करते समय उसकी ऊँचाई और मटेरियल का ध्यान रखें।
राष्ट्र प्रेस
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