नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम - सुनेत्रा पवार

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम - सुनेत्रा पवार

सारांश

सुनेत्रा पवार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को मजबूती देगा। जानें इस कानून की विशेषताएं और इसका महत्व।

Key Takeaways

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण सुनिश्चित करता है।
  • यह कानून भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • इससे ग्रामीण और शहरी महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
  • महिला नेतृत्व की समृद्ध परंपरा को मान्यता मिलती है।
  • यह कानून मौजूदा सरकारी पहलों को नई गति देगा।

मुंबई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने बुधवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम' करार दिया।

उन्होंने कहा कि यह कानून पूरे देश में महिलाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण के लिए एक नया अध्याय लिखता है।

सुनेत्रा पवार ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को बधाई दी और यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पूर्ण समर्थन में खड़ी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक विधेयक 2047 तक 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में 'जीवन शक्ति' का कार्य करेगा। सुनेत्रा पवार ने इस नए कानून और भारतीय इतिहास में महिला नेतृत्व की समृद्ध परंपरा के बीच समानताएं भी बताईं।

उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें राजमाता जीजाऊ (जिन्होंने स्वराज का मंत्र दिया); महारानी ताराबाई (जिन्होंने राज्य की रक्षा की); अहिल्यादेवी होल्कर (जिन्होंने न्याय और कल्याण का आदर्श स्थापित किया); सावित्रीबाई फुले (जिन्होंने महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति शुरू की); रानी लक्ष्मीबाई (जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बहादुरी दिखाई); और इंदिरा गांधी (जिन्होंने आधुनिक युग में महिला नेतृत्व का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया) शामिल हैं।

सुनेत्रा पवार ने कहा, "यह विधेयक केवल राजनीतिक आरक्षण का मामला नहीं है। यह 'स्त्री-शक्ति' (नारी शक्ति) की उस गौरवशाली परंपरा का साकार रूप है, जो भारतीय संस्कृति में सदियों से विद्यमान है।"

उन्होंने बताया कि यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को सुनिश्चित करता है। इससे ग्रामीण और शहरी, हर वर्ग की महिलाओं को मुख्यधारा के निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।

सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह कानून 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी मौजूदा सरकारी पहलों और महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण को नई गति देगा।

इससे पहले, उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने 16 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधनों का समर्थन करते हुए कहा था कि यह कदम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रभावी कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेगा, और भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक स्वर्णिम अध्याय साबित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में, उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यह पहल केवल एक विधायी सुधार नहीं है, बल्कि शासन और राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है।

Point of View

बल्कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देता है।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण को सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है।
क्या यह कानून सभी महिलाओं के लिए समान अवसर प्रदान करेगा?
हाँ, यह कानून सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्रदान करता है।
इस कानून का क्या महत्व है?
यह कानून महिलाओं के सशक्तिकरण, सम्मान और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या यह कानून भविष्य में बदलाव लाएगा?
हाँ, यह कानून भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में सहायक होगा।
क्या इस अधिनियम का समर्थन अन्य राजनीतिक दलों ने किया है?
हाँ, विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस अधिनियम का समर्थन किया है, जिससे इसकी स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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