राजस्थान कांग्रेस की मांग: विश्वसनीय ओबीसी सर्वेक्षण हो और तत्काल स्थानीय निकाय चुनाव घोषित किए जाएं
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (आरपीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार, 10 जुलाई को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधते हुए माँग की कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का विश्वसनीय और सत्यापित सर्वेक्षण कराया जाए तथा पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव तत्काल घोषित किए जाएं। राज्य कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने स्पष्ट किया कि ओबीसी समुदाय के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
मुख्य आरोप और माँगें
डोटासरा ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने ओबीसी सर्वेक्षण को समयबद्ध ढंग से पूरा न करके चुनावी प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाए रखा है। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव अधिसूचित करने से पहले सरकार को प्रामाणिक आँकड़ों के आधार पर ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। उनके अनुसार, ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और कई शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, फिर भी चुनाव नहीं हुए।
ओबीसी आयोग के गठन में देरी का आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के लगभग 10 महीने बाद ओबीसी आयोग का गठन किया गया। आयोग को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपनी थी, परंतु एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त, परिसीमन प्रक्रिया में भी लगभग 13 महीने लगे, जिससे चुनाव में और देरी हुई।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला
डोटासरा ने संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुच्छेद 243ई और 243यू के तहत पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव उनके पाँच वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति के तुरंत बाद अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति इन संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी है।
राजधारा ऐप पर सवाल
ओबीसी सर्वेक्षण के लिए हाल ही में लॉन्च किए गए राजधारा ऐप्लिकेशन की विश्वसनीयता पर भी डोटासरा ने गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि ऐप में 'गवर्नमेंट' लॉगिन विकल्प निष्क्रिय कर दिया गया है और केवल 'नागरिक' विकल्प ही सक्रिय है। उनके अनुसार, अधिकृत सरकारी कर्मियों द्वारा सत्यापन के बिना नागरिकों को स्वयं डेटा दर्ज करने की अनुमति देने से सर्वेक्षण की प्रामाणिकता खतरे में पड़ सकती है।
बुनियादी ढाँचे की कमी का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी आयोग को कार्यालय स्थान, कंप्यूटर और पर्याप्त कर्मचारियों सहित ज़रूरी बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराने में विफल रही है, जिससे आयोग के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।