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राजस्थान कांग्रेस की मांग: विश्वसनीय ओबीसी सर्वेक्षण हो और तत्काल स्थानीय निकाय चुनाव घोषित किए जाएं

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राजस्थान कांग्रेस की मांग: विश्वसनीय ओबीसी सर्वेक्षण हो और तत्काल स्थानीय निकाय चुनाव घोषित किए जाएं

सारांश

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर ओबीसी सर्वेक्षण में देरी और स्थानीय निकाय चुनाव टालने का आरोप लगाया। आयोग गठन में 10 महीने, रिपोर्ट में एक साल से अधिक की देरी और राजधारा ऐप की विश्वसनीयता पर सवाल — यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में नया तूफान ला सकता है।

मुख्य बातें

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 10 जुलाई को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ओबीसी सर्वेक्षण और स्थानीय निकाय चुनाव की तत्काल माँग की।
आरोप: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के सत्ता में आने के 10 महीने बाद ओबीसी आयोग का गठन हुआ और एक वर्ष से अधिक बाद भी रिपोर्ट नहीं आई।
परिसीमन प्रक्रिया में 13 महीने लगने से चुनाव में अतिरिक्त देरी का आरोप।
संविधान के 73वें और 74वें संशोधन (अनुच्छेद 243ई व 243यू ) का हवाला देते हुए समयबद्ध चुनाव की संवैधानिक बाध्यता बताई।
राजधारा ऐप में 'गवर्नमेंट' लॉगिन निष्क्रिय होने से सर्वेक्षण की प्रामाणिकता पर सवाल।
ओबीसी आयोग को कार्यालय, कंप्यूटर और कर्मचारी न देने का भी आरोप।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (आरपीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार, 10 जुलाई को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधते हुए माँग की कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का विश्वसनीय और सत्यापित सर्वेक्षण कराया जाए तथा पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव तत्काल घोषित किए जाएं। राज्य कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने स्पष्ट किया कि ओबीसी समुदाय के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

मुख्य आरोप और माँगें

डोटासरा ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने ओबीसी सर्वेक्षण को समयबद्ध ढंग से पूरा न करके चुनावी प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाए रखा है। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव अधिसूचित करने से पहले सरकार को प्रामाणिक आँकड़ों के आधार पर ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। उनके अनुसार, ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और कई शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, फिर भी चुनाव नहीं हुए।

ओबीसी आयोग के गठन में देरी का आरोप

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के लगभग 10 महीने बाद ओबीसी आयोग का गठन किया गया। आयोग को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपनी थी, परंतु एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त, परिसीमन प्रक्रिया में भी लगभग 13 महीने लगे, जिससे चुनाव में और देरी हुई।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

डोटासरा ने संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुच्छेद 243ई और 243यू के तहत पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव उनके पाँच वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति के तुरंत बाद अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति इन संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी है।

राजधारा ऐप पर सवाल

ओबीसी सर्वेक्षण के लिए हाल ही में लॉन्च किए गए राजधारा ऐप्लिकेशन की विश्वसनीयता पर भी डोटासरा ने गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि ऐप में 'गवर्नमेंट' लॉगिन विकल्प निष्क्रिय कर दिया गया है और केवल 'नागरिक' विकल्प ही सक्रिय है। उनके अनुसार, अधिकृत सरकारी कर्मियों द्वारा सत्यापन के बिना नागरिकों को स्वयं डेटा दर्ज करने की अनुमति देने से सर्वेक्षण की प्रामाणिकता खतरे में पड़ सकती है।

बुनियादी ढाँचे की कमी का आरोप

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी आयोग को कार्यालय स्थान, कंप्यूटर और पर्याप्त कर्मचारियों सहित ज़रूरी बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराने में विफल रही है, जिससे आयोग के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरे राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा करता है — जहाँ सत्तारूढ़ दल चुनावी समय अपने अनुकूल साधने की कोशिश करता दिखता है। संविधान के 73वें और 74वें संशोधन स्पष्ट हैं, फिर भी कार्यकाल समाप्त निकायों में प्रशासक नियुक्त कर काम चलाना लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की भावना के विरुद्ध है। राजधारा ऐप पर उठे सवाल अगर सही हैं, तो सर्वेक्षण की पूरी वैधता न्यायिक चुनौती के दायरे में आ सकती है। असली सवाल यह है कि क्या भजनलाल सरकार न्यायालय के हस्तक्षेप से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएगी, या यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचेगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में ओबीसी सर्वेक्षण की माँग क्यों की जा रही है?
कांग्रेस का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए सटीक और सत्यापित आँकड़े ज़रूरी हैं, जो अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। बिना विश्वसनीय सर्वेक्षण के आरक्षण का निर्धारण न्यायिक रूप से चुनौती का सामना कर सकता है।
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव कब से लंबित हैं?
ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और कई शहरी स्थानीय निकायों का पाँच वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक चुनाव घोषित नहीं हुए। कांग्रेस के अनुसार, ओबीसी आयोग गठन में 10 महीने और परिसीमन में 13 महीने की देरी इसकी मुख्य वजह है।
राजधारा ऐप पर क्या विवाद है?
कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा का दावा है कि ओबीसी सर्वेक्षण के लिए बने राजधारा ऐप में 'गवर्नमेंट' लॉगिन विकल्प निष्क्रिय है, जिससे सरकारी कर्मी सत्यापन नहीं कर सकते। इससे नागरिकों द्वारा स्वयं दर्ज किए गए डेटा की प्रामाणिकता संदिग्ध हो सकती है।
संविधान के अनुसार स्थानीय निकाय चुनाव कब होने चाहिए?
संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के तहत अनुच्छेद 243ई और 243यू अनिवार्य करते हैं कि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव उनके पाँच वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति के तुरंत बाद आयोजित किए जाएं।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी क्यों हुई?
कांग्रेस के अनुसार, आयोग को तीन महीने में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। इसके लिए कांग्रेस ने सरकार द्वारा आयोग को पर्याप्त कार्यालय स्थान, कंप्यूटर और कर्मचारी न देने को ज़िम्मेदार ठहराया है।
राष्ट्र प्रेस
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