रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल पर वडेट्टीवार का विरोध, महाराष्ट्र विधानसभा में संयुक्त समिति को भेजने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में 'श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट मैनेजमेंट, रामटेक बिल' के कई प्रावधानों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस विधेयक को व्यापक समीक्षा के लिए एक संयुक्त समिति के पास भेजा जाए, ताकि सभी पक्षों के सुझावों पर उचित विचार हो सके।
मुख्य आपत्तियाँ और तर्क
वडेट्टीवार ने धार्मिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रामटेक मंदिर जैसी हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए। उन्होंने मंदिर के ट्रस्ट बोर्ड में विधायकों, मंत्रियों या मेयरों की नियुक्ति का स्पष्ट विरोध किया और कहा कि बोर्ड में ऐसे लोग होने चाहिए जो आस्था, सेवा-भाव और बेदाग छवि से जुड़े हों।
उन्होंने सवाल उठाया, 'विधायक और मंत्री अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों के कामों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख कौन करेगा? जिम्मेदारी कौन लेगा?'
सत्र के अंतिम दिन बिल लाने पर सवाल
वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तीन सप्ताह लंबे विधानसभा सत्र के आखिरी दिन इस विधेयक को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि न्यायालय द्वारा नियुक्त मौजूदा समिति बिना किसी कुप्रबंधन या गड़बड़ी के सुचारू रूप से कार्य कर रही है। उनके अनुसार, 'अभी नया ट्रस्ट बोर्ड बनाने की क्या जरूरत है? मंदिर के प्रबंधन में राजनीति लाने से भक्तों की आस्था डगमगाती है।'
वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्टियों की योग्यता
ट्रस्ट सदस्यों को वित्तीय भत्ता देने के प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए वडेट्टीवार ने पूछा, 'भक्तों द्वारा दिए गए दान से सदस्यों को भत्ता क्यों मिलना चाहिए? भगवान राम के मंदिर में सेवा का काम शुद्ध भक्ति और सेवा की भावना से प्रेरित होना चाहिए।' उन्होंने ट्रस्टियों के लिए सख्त योग्यता मापदंड की माँग करते हुए कहा कि किसी भी आपराधिक मामले, भ्रष्टाचार के आरोप या अनैतिक आचरण के रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को बोर्ड में शामिल होने से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में हाल ही में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसी घटनाएँ भक्तों की भावनाओं को आहत करती हैं। उन्होंने पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
ऐतिहासिक संदर्भ और वाजपेयी का हवाला
अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए वडेट्टीवार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा, 'अगर रखवाली करने वाला कुत्ता चोरों पर नहीं भौंकता तो इसका मतलब है कि वह चोरों को जानता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आलोचक उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित कर रहे हैं, जबकि वे एक महत्वपूर्ण विधायी विषय पर अपना पक्ष रखने का संवैधानिक दायित्व निभा रहे हैं।
आगे क्या होगा
वडेट्टीवार ने सदन से अनुरोध किया कि रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल को संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि सभी संबंधित पक्षों — श्रद्धालु, विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि — के सुझावों पर विधिवत विचार हो सके। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था की नींव राजनीति नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जनता का विश्वास होनी चाहिए। यह देखना बाकी है कि महाराष्ट्र सरकार विपक्ष की इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।