10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल पर वडेट्टीवार का विरोध, महाराष्ट्र विधानसभा में संयुक्त समिति को भेजने की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल पर वडेट्टीवार का विरोध, महाराष्ट्र विधानसभा में संयुक्त समिति को भेजने की मांग

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा में रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने तीखा विरोध जताया — बोर्ड में राजनेताओं की नियुक्ति, भत्तों के प्रावधान और सत्र के अंतिम दिन बिल लाने की जल्दबाजी पर सवाल उठाए। उन्होंने संयुक्त समिति समीक्षा की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने बिल को संयुक्त समिति के पास भेजने की माँग की, ताकि सभी पक्षों के सुझावों पर विचार हो सके।
बोर्ड में विधायकों, मंत्रियों और मेयरों की नियुक्ति का विरोध; बेदाग छवि वाले सेवाभावी लोगों की नियुक्ति की वकालत।
ट्रस्ट सदस्यों को भक्तों के दान से वित्तीय भत्ता देने के प्रावधान पर गंभीर आपत्ति।
न्यायालय द्वारा नियुक्त मौजूदा समिति को सुचारू बताते हुए नए बोर्ड की आवश्यकता पर सवाल उठाए।
तीन सप्ताह लंबे सत्र के अंतिम दिन बिल आगे बढ़ाने की सरकार की जल्दबाजी पर भी आपत्ति।

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में 'श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट मैनेजमेंट, रामटेक बिल' के कई प्रावधानों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस विधेयक को व्यापक समीक्षा के लिए एक संयुक्त समिति के पास भेजा जाए, ताकि सभी पक्षों के सुझावों पर उचित विचार हो सके।

मुख्य आपत्तियाँ और तर्क

वडेट्टीवार ने धार्मिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रामटेक मंदिर जैसी हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए। उन्होंने मंदिर के ट्रस्ट बोर्ड में विधायकों, मंत्रियों या मेयरों की नियुक्ति का स्पष्ट विरोध किया और कहा कि बोर्ड में ऐसे लोग होने चाहिए जो आस्था, सेवा-भाव और बेदाग छवि से जुड़े हों।

उन्होंने सवाल उठाया, 'विधायक और मंत्री अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों के कामों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख कौन करेगा? जिम्मेदारी कौन लेगा?'

सत्र के अंतिम दिन बिल लाने पर सवाल

वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तीन सप्ताह लंबे विधानसभा सत्र के आखिरी दिन इस विधेयक को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि न्यायालय द्वारा नियुक्त मौजूदा समिति बिना किसी कुप्रबंधन या गड़बड़ी के सुचारू रूप से कार्य कर रही है। उनके अनुसार, 'अभी नया ट्रस्ट बोर्ड बनाने की क्या जरूरत है? मंदिर के प्रबंधन में राजनीति लाने से भक्तों की आस्था डगमगाती है।'

वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्टियों की योग्यता

ट्रस्ट सदस्यों को वित्तीय भत्ता देने के प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए वडेट्टीवार ने पूछा, 'भक्तों द्वारा दिए गए दान से सदस्यों को भत्ता क्यों मिलना चाहिए? भगवान राम के मंदिर में सेवा का काम शुद्ध भक्ति और सेवा की भावना से प्रेरित होना चाहिए।' उन्होंने ट्रस्टियों के लिए सख्त योग्यता मापदंड की माँग करते हुए कहा कि किसी भी आपराधिक मामले, भ्रष्टाचार के आरोप या अनैतिक आचरण के रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को बोर्ड में शामिल होने से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में हाल ही में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसी घटनाएँ भक्तों की भावनाओं को आहत करती हैं। उन्होंने पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

ऐतिहासिक संदर्भ और वाजपेयी का हवाला

अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए वडेट्टीवार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा, 'अगर रखवाली करने वाला कुत्ता चोरों पर नहीं भौंकता तो इसका मतलब है कि वह चोरों को जानता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आलोचक उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित कर रहे हैं, जबकि वे एक महत्वपूर्ण विधायी विषय पर अपना पक्ष रखने का संवैधानिक दायित्व निभा रहे हैं।

आगे क्या होगा

वडेट्टीवार ने सदन से अनुरोध किया कि रामटेक मंदिर ट्रस्ट बिल को संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि सभी संबंधित पक्षों — श्रद्धालु, विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि — के सुझावों पर विधिवत विचार हो सके। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था की नींव राजनीति नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जनता का विश्वास होनी चाहिए। यह देखना बाकी है कि महाराष्ट्र सरकार विपक्ष की इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकार के लिए असुविधाजनक प्रश्न खड़ा करता है — आखिर नई व्यवस्था की जरूरत किसे और क्यों है? अयोध्या मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं का संदर्भ देकर उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर प्रशासन में जवाबदेही का अभाव राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील विषय बन चुका है। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार संयुक्त समिति की माँग को स्वीकार कर पारदर्शिता का संकेत देती है, या विधेयक को उसी रूप में पारित कर राजनीतिक नियंत्रण की प्राथमिकता उजागर करती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामटेक मंदिर ट्रस्ट मैनेजमेंट बिल क्या है?
'श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट मैनेजमेंट, रामटेक बिल' महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तुत एक विधेयक है जो रामटेक मंदिर के प्रशासन के लिए एक नया ट्रस्ट बोर्ड स्थापित करने का प्रावधान करता है। इस बिल में बोर्ड में जनप्रतिनिधियों की नियुक्ति और सदस्यों को वित्तीय भत्ते देने के प्रावधान शामिल हैं, जिन पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
विजय वडेट्टीवार ने इस बिल का विरोध क्यों किया?
कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने बिल में बोर्ड में विधायकों, मंत्रियों और मेयरों की नियुक्ति, भक्तों के दान से सदस्यों को भत्ता देने के प्रावधान और सत्र के अंतिम दिन जल्दबाजी में बिल लाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि न्यायालय-नियुक्त मौजूदा समिति सुचारू रूप से काम कर रही है, इसलिए नए बोर्ड की आवश्यकता नहीं है।
संयुक्त समिति को बिल भेजने की माँग का क्या अर्थ है?
संयुक्त समिति विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों से मिलकर बनती है, जो किसी विधेयक की गहन समीक्षा करती है और सभी पक्षों के सुझाव लेती है। वडेट्टीवार की माँग है कि रामटेक बिल को बिना जल्दबाजी के इस प्रक्रिया से गुजारा जाए ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की विरासत की रक्षा हो सके।
रामटेक मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
रामटेक मंदिर महाराष्ट्र में हजारों साल पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह भगवान राम से जुड़ा एक प्रमुख तीर्थस्थल है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसीलिए इसके प्रशासन में किसी भी बदलाव को लेकर संवेदनशीलता बरती जाती है।
महाराष्ट्र सरकार इस बिल पर क्या रुख रखती है?
महाराष्ट्र सरकार ने तीन सप्ताह लंबे विधानसभा सत्र के दौरान यह बिल आगे बढ़ाया। हालाँकि, सरकार की ओर से विपक्ष की संयुक्त समिति को भेजने की माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 26 मिनट पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 6 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 7 महीने पहले