जम्मू-कश्मीर में शांति-विकास को 'डिरेल' करने की कोशिश — नेशनल कॉन्फ्रेंस के धरने पर एनडीए का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी के बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 10 जुलाई को कड़ी प्रतिक्रिया दी। नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी मुश्किल से जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और पर्यटन को पटरी पर लौटाया है, और यह प्रदर्शन उसे जानबूझकर बाधित करने की कोशिश है।
भाजपा का तीखा हमला — 'गुपकार गैंग का पुराना एजेंडा'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि यह प्रदर्शन 'सिर्फ ध्यान भटकाने और अपनी अक्षमता, नाकामियों और अनुभवहीनता को छिपाने की कोशिश है।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'गुपकार गैंग एक पुराने एजेंडे को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही है।' चुघ ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को चुनौती देते हुए कहा कि वे 'अपना घोषणापत्र निकालकर खुद देखें — एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है।'
चुघ ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जनवरी 1990 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर को 'दहकते शोलों पर फेंक दिया गया था' और 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने पर मजबूर हुए थे। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को दशकों तक अलगाववादी राजनीति की आग में झोंकने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने का प्रयास कर रही है।'
जदयू की प्रतिक्रिया — 'विकास ही असली आधार'
जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने और संसद की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर विकास के नए रास्तों के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा, 'विकास ही असली आधार है और वहां के लोगों को इसका एहसास हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सैनिक सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं और 'पूरा देश मजबूती से उनके साथ खड़ा है।'
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग 'लोकतांत्रिक है और हर राजनीतिक दल को ऐसी मांगें उठाने का अधिकार है।' उन्होंने साथ ही कहा कि 'केंद्र सरकार परिस्थितियों के हिसाब से समय-समय पर फैसले लेती है, इसलिए सभी दलों के नेताओं को धैर्य रखना चाहिए।'
भाजपा प्रवक्ता — 'सही समय आने पर राज्य का दर्जा मिलेगा'
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन नेताओं का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन 'अभी जम्मू-कश्मीर में हालात ऐसे नहीं हैं कि राज्य का दर्जा दिया जा सके।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि 'सरकार प्रतिबद्ध है और जब सही समय आएगा, तो राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।'
बिहार मंत्री का बयान — 'युवाओं के हाथ में अब किताब-पेंसिल'
बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं ने 'दो विधान, दो निशान, दो प्रधान' की परंपरा और अलगाववादी माहौल बनाए रखा। उन्होंने कहा, 'आज जम्मू-कश्मीर का माहौल बहुत अच्छा है — युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं, किताब और पेंसिल हैं।' जायसवाल ने यह भी कहा कि 'जिस दिन कश्मीर का माहौल इस देश की विचारधारा के साथ पूर्ण रूप से समावेशित हो जाएगा, उस दिन पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।'
पृष्ठभूमि — फारूक अब्दुल्ला का पत्र और धरने की तैयारी
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं को पत्र लिखकर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर समर्थन माँगा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यह धरना आयोजित किया जाना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे को लागू करने का दबाव बढ़ रहा है — एक वादा जो अनुच्छेद 370 हटाने के समय किया गया था।