10 जुलाई 2026
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जम्मू-कश्मीर में शांति-विकास को 'डिरेल' करने की कोशिश — नेशनल कॉन्फ्रेंस के धरने पर एनडीए का पलटवार

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जम्मू-कश्मीर में शांति-विकास को 'डिरेल' करने की कोशिश — नेशनल कॉन्फ्रेंस के धरने पर एनडीए का पलटवार

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के राज्य-दर्जा बहाली धरने पर एनडीए नेताओं ने तीखा पलटवार किया — भाजपा ने इसे 'गुपकार एजेंडे की वापसी' बताया, तो जदयू ने 'धैर्य' की नसीहत दी। फारूक अब्दुल्ला के 52 नेताओं को लिखे पत्र ने कश्मीर की राजनीति में नई हलचल मचा दी है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है।
फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन माँगा; मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं धरने में शामिल होने वाले हैं।
BJP सांसद तरुण चुघ ने इसे 'ध्यान भटकाने की कोशिश' और 'गुपकार एजेंडे की वापसी' करार दिया; 1990 में 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडितों के पलायन का हवाला दिया।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मांग को 'लोकतांत्रिक' माना, लेकिन केंद्र सरकार से 'परिस्थितियों के अनुसार' फैसले की उम्मीद जताई।
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा — 'सही समय आने पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा', सरकार प्रतिबद्ध है।
बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा — 'युवाओं के हाथ में अब पत्थर नहीं, किताब-पेंसिल है।'

नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी के बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 10 जुलाई को कड़ी प्रतिक्रिया दी। नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी मुश्किल से जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और पर्यटन को पटरी पर लौटाया है, और यह प्रदर्शन उसे जानबूझकर बाधित करने की कोशिश है।

भाजपा का तीखा हमला — 'गुपकार गैंग का पुराना एजेंडा'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि यह प्रदर्शन 'सिर्फ ध्यान भटकाने और अपनी अक्षमता, नाकामियों और अनुभवहीनता को छिपाने की कोशिश है।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'गुपकार गैंग एक पुराने एजेंडे को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही है।' चुघ ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला को चुनौती देते हुए कहा कि वे 'अपना घोषणापत्र निकालकर खुद देखें — एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है।'

चुघ ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जनवरी 1990 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर को 'दहकते शोलों पर फेंक दिया गया था' और 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने पर मजबूर हुए थे। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को दशकों तक अलगाववादी राजनीति की आग में झोंकने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने का प्रयास कर रही है।'

जदयू की प्रतिक्रिया — 'विकास ही असली आधार'

जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने और संसद की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर विकास के नए रास्तों के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा, 'विकास ही असली आधार है और वहां के लोगों को इसका एहसास हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सैनिक सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं और 'पूरा देश मजबूती से उनके साथ खड़ा है।'

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग 'लोकतांत्रिक है और हर राजनीतिक दल को ऐसी मांगें उठाने का अधिकार है।' उन्होंने साथ ही कहा कि 'केंद्र सरकार परिस्थितियों के हिसाब से समय-समय पर फैसले लेती है, इसलिए सभी दलों के नेताओं को धैर्य रखना चाहिए।'

भाजपा प्रवक्ता — 'सही समय आने पर राज्य का दर्जा मिलेगा'

BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन नेताओं का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन 'अभी जम्मू-कश्मीर में हालात ऐसे नहीं हैं कि राज्य का दर्जा दिया जा सके।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि 'सरकार प्रतिबद्ध है और जब सही समय आएगा, तो राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।'

बिहार मंत्री का बयान — 'युवाओं के हाथ में अब किताब-पेंसिल'

बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं ने 'दो विधान, दो निशान, दो प्रधान' की परंपरा और अलगाववादी माहौल बनाए रखा। उन्होंने कहा, 'आज जम्मू-कश्मीर का माहौल बहुत अच्छा है — युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं, किताब और पेंसिल हैं।' जायसवाल ने यह भी कहा कि 'जिस दिन कश्मीर का माहौल इस देश की विचारधारा के साथ पूर्ण रूप से समावेशित हो जाएगा, उस दिन पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।'

पृष्ठभूमि — फारूक अब्दुल्ला का पत्र और धरने की तैयारी

गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं को पत्र लिखकर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर समर्थन माँगा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यह धरना आयोजित किया जाना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे को लागू करने का दबाव बढ़ रहा है — एक वादा जो अनुच्छेद 370 हटाने के समय किया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वह उस केंद्रीय सवाल को टाल जाती है जो असली बहस का केंद्र है — राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा कब और किन शर्तों पर पूरा होगा। 'सही समय' की अनिश्चित समयसीमा और 'परिस्थितियों के अनुसार' जैसे अस्पष्ट जवाब, संसद में दिए गए उस स्पष्ट आश्वासन के साथ मेल नहीं खाते जो अनुच्छेद 370 हटाने के समय दिया गया था। धरने को 'अस्थिरता की कोशिश' बताना एक चुनी हुई सरकार की लोकतांत्रिक माँग को नकारना है — और यह विरोधाभास कश्मीर के लोकतांत्रिक एकीकरण की उस कहानी को कमज़ोर करता है जिसे केंद्र खुद प्रचारित करता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर में किस मांग को लेकर धरना दे रही है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश से पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर 52 नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन माँगा है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं धरने में शामिल होने वाले हैं।
एनडीए नेताओं ने इस धरने पर क्या कहा?
एनडीए नेताओं ने धरने को जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और पर्यटन को बाधित करने की कोशिश बताया। BJP सांसद तरुण चुघ ने इसे 'गुपकार एजेंडे की वापसी' कहा, जबकि जदयू ने मांग को लोकतांत्रिक मानते हुए केंद्र सरकार से धैर्य की अपील की।
क्या केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का वादा किया था?
हाँ, अनुच्छेद 370 हटाने के समय केंद्र सरकार ने संसद में जम्मू-कश्मीर को उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने 10 जुलाई को दोहराया कि सरकार इस वादे के प्रति प्रतिबद्ध है और 'सही समय आने पर' दर्जा बहाल किया जाएगा।
तरुण चुघ ने 1990 का संदर्भ क्यों दिया?
तरुण चुघ ने जनवरी 1990 को नेशनल कॉन्फ्रेंस के शासनकाल से जोड़ते हुए कहा कि उस दौर में 1 लाख 60 हजार कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने पर मजबूर हुए थे। यह संदर्भ नेशनल कॉन्फ्रेंस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए दिया गया।
जदयू का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
जदयू ने संतुलित रुख अपनाया — एक ओर राज्य के दर्जे की मांग को 'लोकतांत्रिक अधिकार' माना, दूसरी ओर केंद्र सरकार के 'परिस्थितियों के अनुसार' फैसले का समर्थन किया। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने विकास और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को प्राथमिकता बताया।
राष्ट्र प्रेस
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