विश्व पर्यावरण दिवस: CM सुक्खू का आह्वान — पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाएं
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण को एक व्यापक जन आंदोलन का रूप देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों की याद दिलाने का सबसे सशक्त अवसर है और इसे केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहने देना चाहिए।
हिमाचल की प्राकृतिक विरासत और सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को प्रकृति ने घने वन, स्वच्छ नदियाँ, हिमाच्छादित पर्वत और समृद्ध जैव विविधता के रूप में अनमोल उपहार दिए हैं। उनके अनुसार इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिकाधिक पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि 'एक पौधा लगाना केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखना है।' सुक्खू ने विश्वास जताया कि प्रदेशवासियों के सक्रिय सहयोग से हिमाचल प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री का एक्स पर संदेश
मुख्यमंत्री सुक्खू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हिमाचल की पहचान विशाल पर्वतों, निर्मल जलधाराओं और शुद्ध वायु में बसती है। प्रकृति ने हमें यह अनुपम धरोहर सौंपी है। इसे सहेजना हमारा केवल दायित्व ही नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा संकल्प भी है। आइए, मिलकर इस विरासत की पवित्रता और समृद्धि को अक्षुण्ण बनाए रखें।'
राज्यपाल कवींद्र गुप्ता की मिनी मैराथन में भागीदारी
इसी अवसर पर शिमला के रिज मैदान पर आयोजित मिनी मैराथन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने भाग लिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए समाज की भागीदारी अनिवार्य है — जब तक समाज स्वयं आगे नहीं आता, सरकारी प्रयास अपेक्षित सफलता नहीं पा सकते।
राज्यपाल ने प्लास्टिक प्रदूषण और कूड़े-कचरे की समस्या पर कहा कि इसका समाधान सामूहिक प्रयास से ही संभव है और बदलाव की शुरुआत प्रत्येक नागरिक को स्वयं से करनी होगी। उन्होंने आयोजकों से भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।
जनगणना स्व-गणना की अपील
राज्यपाल गुप्ता ने जनगणना के संदर्भ में नागरिकों को सूचित किया कि केंद्र सरकार ने 1 जून से 15 जून तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वयं सत्यापन कर पंजीकरण करवाने की अपील की और कहा कि जनगणना के आँकड़े भविष्य की विकास योजनाओं की रीढ़ बनेंगे।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभावों — बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर पिघलने — से जूझ रहा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हरित ऊर्जा और वन संरक्षण को अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं में रखा है। मुख्यमंत्री सुक्खू की यह अपील नागरिक-स्तर पर पर्यावरण चेतना को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।