विश्व पर्यावरण दिवस: जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने की सामूहिक संरक्षण की अपील
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने एकस्वर में कहा कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ धरती सौंपना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
उपराज्यपाल का संदेश
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना संदेश साझा करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें धरती माता के संरक्षण और प्रकृति के नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए फिर से संकल्प लेने का अवसर देता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा और प्राकृतिक संतुलन को अक्षुण्ण रखना मानवता के दीर्घकालिक कल्याण के लिए अनिवार्य है। उनके अनुसार, केवल सामूहिक प्रयासों से ही भावी पीढ़ियों के लिए एक बेहतर ग्रह सुनिश्चित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एक्स पर जारी मुख्यमंत्री कार्यालय के संदेश के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है और नागरिकों से इस सामूहिक अभियान में सहभागी बनने की अपील की। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण बचाने के प्रयासों को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया।
विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व
प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र का एक वैश्विक अभियान है, जो पहली बार 1973 में आयोजित हुआ था। यह दिवस समुद्री प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, सतत विकास और वन्यजीव अपराध जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जन-जागरूकता फैलाने का प्रमुख मंच बन चुका है। गौरतलब है कि इस अभियान में 143 से अधिक देश भाग लेते हैं, जिनमें सरकारें, गैर-सरकारी संगठन, व्यावसायिक संस्थाएँ और आम नागरिक शामिल हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन का दबाव बढ़ता जा रहा है। हिमनदों के पिघलने और मौसम की अनिश्चितता ने इस क्षेत्र की जैव-विविधता और जल संसाधनों को गंभीर चुनौती दी है। दोनों नेताओं की यह अपील स्थानीय स्तर पर पर्यावरण-चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
क्या होगा आगे
जम्मू-कश्मीर प्रशासन और राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वे पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी नीतियों और जमीनी कार्यक्रमों को और गति देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना दीर्घकालिक समाधान की कुंजी है।