6 जुलाई 2026
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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की शिष्टाचार भेंट, 'विजय' दृष्टिकोण पर चर्चा

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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की शिष्टाचार भेंट, 'विजय' दृष्टिकोण पर चर्चा

सारांश

भारत के नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से पहली शिष्टाचार भेंट की — पदभार के बाद संवैधानिक परंपरा का निर्वहन। 'विजय' दृष्टिकोण के तहत एआई, स्वदेशी रक्षा और त्रि-सेना संयुक्तता उनकी प्राथमिकताएँ हैं।

मुख्य बातें

जनरल धीरज सेठ ने 6 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।
यह 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्वोच्च कमांडर से उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी।
जनरल सेठ अपनी पत्नी कोमल सेठ के साथ राष्ट्रपति भवन पहुँचे।
इससे पहले 2 जुलाई को उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की थी।
जनरल सेठ ने पदभार ग्रहण के साथ 'विजय' दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसका मंत्र 'जय से विजय' है।
उनकी प्राथमिकताओं में एआई क्षमता , स्वदेशी रक्षा उद्योग और त्रि-सेना संयुक्तता शामिल हैं।

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 6 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में भारत की राष्ट्रपति एवं तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी राष्ट्रपति से पहली औपचारिक मुलाकात रही। जनरल सेठ अपनी पत्नी कोमल सेठ के साथ इस भेंट में शामिल हुए।

मुलाकात का संदर्भ और महत्व

यह भेंट ऐसे समय हुई है जब जनरल सेठ ने हाल ही में भारतीय सेना की कमान संभाली है। परंपरा के अनुसार, नवनियुक्त सेना प्रमुख अपने पदभार ग्रहण के शीघ्र बाद सर्वोच्च कमांडर से शिष्टाचार भेंट करते हैं — यह भारतीय सशस्त्र बलों और संवैधानिक नेतृत्व के बीच संस्थागत संवाद की स्थापित परंपरा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस भेंट को सैन्य-नागरिक संबंधों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

जनरल धीरज सेठ का सैन्य परिचय

जनरल धीरज सेठ बख्तरबंद कोर के अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने दीर्घ सैन्य जीवन में अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। थलसेना प्रमुख का पद संभालने से पूर्व वे उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और बहु-क्षेत्रीय युद्धक क्षमता विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

'विजय' दृष्टिकोण और प्राथमिकताएँ

पदभार ग्रहण के साथ ही जनरल सेठ ने 'विजय' नामक अपना सैन्य दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था, जिसका मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' है। इस दृष्टिकोण के तहत उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं — सेना में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, एआई-आधारित क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा, तथा तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को और मज़बूत करना। गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण भारत सरकार की व्यापक रक्षा-आत्मनिर्भरता नीति के अनुरूप है।

रक्षा मंत्री से भी हो चुकी है भेंट

इससे पहले 2 जुलाई को जनरल सेठ ने नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की थी। थलसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद रक्षा मंत्री से यह उनकी पहली मुलाकात थी। इन क्रमिक भेंटों से स्पष्ट है कि नए सेना प्रमुख ने पदभार ग्रहण के बाद नागरिक-सैन्य समन्वय की औपचारिक प्रक्रियाएँ तेज़ी से पूरी की हैं।

आगे की राह

जनरल सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना का ध्यान तकनीक-सक्षम और आत्मनिर्भर सशस्त्र बलों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 'विजय' दृष्टिकोण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन और एआई एकीकरण की योजनाएँ किस गति से ज़मीन पर उतरती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'विजय' दृष्टिकोण की असली कसौटी यह होगी कि एआई एकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लक्ष्य बजटीय आवंटन और समयसीमा के साथ कितने ठोस रूप में सामने आते हैं। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की चर्चा वर्षों से होती रही है, परंतु क्रियान्वयन की गति अपेक्षाओं से पीछे रही है। 'जय से विजय' का नारा प्रेरक है — परंतु संयुक्तता और आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर मापने योग्य मील के पत्थर सार्वजनिक होने पर ही इस दृष्टिकोण की विश्वसनीयता आँकी जा सकेगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ कौन हैं और वे किस पद पर हैं?
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख हैं। वे बख्तरबंद कोर के अनुभवी अधिकारी हैं और थलसेना प्रमुख बनने से पहले उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे।
जनरल धीरज सेठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट क्यों की?
यह एक शिष्टाचार भेंट थी, जो नवनियुक्त थलसेना प्रमुख द्वारा सर्वोच्च कमांडर से मिलने की स्थापित संवैधानिक परंपरा के तहत हुई। पदभार ग्रहण के बाद राष्ट्रपति से यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी।
जनरल धीरज सेठ का 'विजय' दृष्टिकोण क्या है?
पदभार ग्रहण के साथ जनरल सेठ ने 'विजय' नामक अपना सैन्य दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसका मंत्र 'जय से विजय' है। इसमें एआई-आधारित क्षमताओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को मज़बूत करना शामिल है।
क्या जनरल सेठ ने रक्षा मंत्री से भी मुलाकात की है?
हाँ, 2 जुलाई 2026 को जनरल सेठ ने नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की थी। थलसेना प्रमुख बनने के बाद रक्षा मंत्री से यह उनकी पहली मुलाकात थी।
भारत के राष्ट्रपति का सेना से क्या संवैधानिक संबंध है?
भारत के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति तीनों सशस्त्र सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। इसी कारण नवनियुक्त सेना प्रमुखों द्वारा राष्ट्रपति से शिष्टाचार भेंट करना एक महत्वपूर्ण संस्थागत परंपरा मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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