थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की शिष्टाचार भेंट, 'विजय' दृष्टिकोण पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 6 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में भारत की राष्ट्रपति एवं तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी राष्ट्रपति से पहली औपचारिक मुलाकात रही। जनरल सेठ अपनी पत्नी कोमल सेठ के साथ इस भेंट में शामिल हुए।
मुलाकात का संदर्भ और महत्व
यह भेंट ऐसे समय हुई है जब जनरल सेठ ने हाल ही में भारतीय सेना की कमान संभाली है। परंपरा के अनुसार, नवनियुक्त सेना प्रमुख अपने पदभार ग्रहण के शीघ्र बाद सर्वोच्च कमांडर से शिष्टाचार भेंट करते हैं — यह भारतीय सशस्त्र बलों और संवैधानिक नेतृत्व के बीच संस्थागत संवाद की स्थापित परंपरा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस भेंट को सैन्य-नागरिक संबंधों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
जनरल धीरज सेठ का सैन्य परिचय
जनरल धीरज सेठ बख्तरबंद कोर के अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने दीर्घ सैन्य जीवन में अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। थलसेना प्रमुख का पद संभालने से पूर्व वे उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और बहु-क्षेत्रीय युद्धक क्षमता विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
'विजय' दृष्टिकोण और प्राथमिकताएँ
पदभार ग्रहण के साथ ही जनरल सेठ ने 'विजय' नामक अपना सैन्य दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था, जिसका मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' है। इस दृष्टिकोण के तहत उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं — सेना में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, एआई-आधारित क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा, तथा तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को और मज़बूत करना। गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण भारत सरकार की व्यापक रक्षा-आत्मनिर्भरता नीति के अनुरूप है।
रक्षा मंत्री से भी हो चुकी है भेंट
इससे पहले 2 जुलाई को जनरल सेठ ने नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की थी। थलसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद रक्षा मंत्री से यह उनकी पहली मुलाकात थी। इन क्रमिक भेंटों से स्पष्ट है कि नए सेना प्रमुख ने पदभार ग्रहण के बाद नागरिक-सैन्य समन्वय की औपचारिक प्रक्रियाएँ तेज़ी से पूरी की हैं।
आगे की राह
जनरल सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना का ध्यान तकनीक-सक्षम और आत्मनिर्भर सशस्त्र बलों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 'विजय' दृष्टिकोण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन और एआई एकीकरण की योजनाएँ किस गति से ज़मीन पर उतरती हैं।