थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में 19 मई को नई दिल्ली में 'स्मार्ट पावर' सेमिनार
सारांश
मुख्य बातें
थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 19 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय रक्षा सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जहाँ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक रणनीति और तकनीकी नवाचार को एकीकृत करने पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) द्वारा आयोजित यह सेमिनार 'सुरक्षा से समृद्धि: सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर' विषय पर केंद्रित रहेगा।
सेमिनार का विषय और उद्देश्य
इस सेमिनार का मूल प्रश्न यह है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत किस प्रकार सैन्य, कूटनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को एकसाथ जोड़कर अपनी रणनीतिक शक्ति को सुदृढ़ कर सकता है। 'स्मार्ट पावर' की अवधारणा इस चर्चा के केंद्र में होगी, जिसके अंतर्गत केवल सैन्य बल नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, तकनीकी आत्मनिर्भरता, प्रभावी कूटनीति और राष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमता को समेकित करने पर जोर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि CLAWS भारतीय सेना का एक स्वायत्त रणनीतिक थिंक टैंक है, जो जमीनी युद्ध, रणनीतिक मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वैचारिक पहलुओं पर शोध करता है।
प्रमुख प्रतिभागी और चर्चा के विषय
इस उच्चस्तरीय आयोजन में नीति निर्माता, राजनयिक, रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और रणनीतिक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता, नई तकनीकों का सैन्य उपयोग, आर्थिक सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका शामिल हैं।
सुरक्षा और समृद्धि का अंतर्संबंध
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में सुरक्षा और समृद्धि एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुके हैं। वैश्विक संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, साइबर खतरे, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों के बीच किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी सुरक्षा संरचना पर निर्भर करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को लगातार मुखर कर रहा है।
अपेक्षित परिणाम
इस आयोजन से नीति निर्माण और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुझाव आने वाले वर्षों में भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूती देने में सहायक हो सकते हैं। सेमिनार के निष्कर्ष भविष्य की रक्षा और विदेश नीति के लिए एक वैचारिक आधार तैयार कर सकते हैं।