20 जुलाई 2026
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थल सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने स्वार्म ड्रोन और आईएसआर तकनीक का किया अवलोकन, दुश्मन पर रखी जाएगी पैनी नज़र

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थल सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने स्वार्म ड्रोन और आईएसआर तकनीक का किया अवलोकन, दुश्मन पर रखी जाएगी पैनी नज़र

सारांश

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज दौरा भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस दौरान स्वार्म ड्रोन और आईएसआर तकनीक पर चर्चा की गई, जिससे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना संभव होगा।

मुख्य बातें

भारतीय सेना का ध्यान स्वदेशी तकनीकों पर है।
स्वार्म ड्रोन तकनीक दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में सहायक है।
आईएसआर तकनीक से वास्तविक समय में सूचनाएं मिलती हैं।
आधुनिक युद्ध के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है।
जनरल द्विवेदी ने स्वदेशी नवाचारों की सराहना की।

नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी तकनीकों के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए थल सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज का दौरा किया। इस अवसर पर उन्हें संगठन द्वारा विकसित की जा रही मानवरहित और ऊँची ऊँचाई पर कार्य करने वाली अत्याधुनिक प्रणालियों की जानकारी दी गई।

दौरे के दौरान अधिकारियों ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी को स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन और अन्य तकनीकी समाधानों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। विशेष रूप से स्वार्म ड्रोन तकनीक और आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) क्षमताओं में हुई प्रगति पर चर्चा की गई। इन तकनीकों की मदद से सेना को दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी लगातार निगरानी रखने और मजबूत संचार बनाए रखने में सहायता मिलती है।

न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित स्वार्म ड्रोन तकनीक एक साथ कई ड्रोन के समन्वित संचालन की क्षमता प्रदान करती है, जिससे दुश्मन की गतिविधियों पर तेजी से नजर रखी जा सकती है। वहीं इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस क्षमताएं सेना को वास्तविक समय में महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराती हैं, जो रणनीतिक निर्णय लेने में बेहद उपयोगी साबित होती हैं।

इस अवसर पर जनरल द्विवेदी ने स्वदेशी नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना को अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन को प्रभावी बनाने और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसी प्रणालियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह दौरा भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

यह दौरा भारतीय सेना के उस व्यापक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें स्वदेशी अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। सेना का लक्ष्य है कि वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त बनाए रखते हुए अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं को और मजबूत करे। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय सेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वार्म ड्रोन तकनीक क्या है?
स्वार्म ड्रोन तकनीक एक साथ कई ड्रोन के समन्वित संचालन की क्षमता प्रदान करती है, जिससे निगरानी और अपने दुश्मनों पर नजर रखना आसान होता है।
आईएसआर तकनीक का महत्व क्या है?
आईएसआर तकनीक, जो इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस का संक्षिप्त रूप है, सेना को वास्तविक समय में महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराती है।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी तकनीकों के विकास की दिशा में प्रगति को समझना था।
भारतीय सेना के लिए स्वदेशी तकनीकें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
स्वदेशी तकनीकें भारतीय सेना को आत्मनिर्भर बनाती हैं और उन्हें विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने में मदद करती हैं।
जनरल द्विवेदी ने इस दौरे में क्या कहा?
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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