3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी का आह्वान: अस्थिर विश्व में भारत को चाहिए 'स्मार्ट पावर' की रणनीति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी का आह्वान: अस्थिर विश्व में भारत को चाहिए 'स्मार्ट पावर' की रणनीति

सारांश

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का संदेश सीधा था — दुनिया वैसी नहीं रही जैसी 21वीं सदी की शुरुआत में थी। होर्मुज से सेमीकंडक्टर तक, हर साधन अब हथियार बन सकता है। भारत को 'स्मार्ट पावर' की ज़रूरत है — रणनीतिक बुद्धिमत्ता के साथ, सही समय पर सही साधन का उपयोग।

मुख्य बातें

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली में 'सुरक्षा से समृद्धि' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को सक्रिय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बताया; सेमीकंडक्टर को रणनीतिक हथियार करार दिया।
सुरक्षा और समृद्धि की सीमा अब व्यावहारिक रूप से समाप्त — समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण अपनाने पर बल।
पारंपरिक कूटनीतिक-सैन्य-आर्थिक ढाँचे को प्रौद्योगिकी और नए तत्वों से पूरक करने की ज़रूरत बताई।
कहा — 'दुनिया को वैसे समझो जैसी वह है, न जैसी हम देखना चाहते हैं।'

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को सैन्य, कूटनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साधनों को एकीकृत कर अपनी 'स्मार्ट पावर' का विस्तार करना होगा। 'सुरक्षा से समृद्धि: सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर' विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अशांति और तेज़ी से बदलते वैश्विक परिवेश को देखते हुए भारत की रणनीतिक दिशा पर विस्तृत चर्चा का नेतृत्व किया।

संगोष्ठी का संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह संगोष्ठी ऐसे समय में आयोजित हुई जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ दबाव में हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य सक्रिय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है। जनरल द्विवेदी ने रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर और उनकी चुनिंदा उपलब्धता अब रणनीतिक लाभ के उपकरण बन गए हैं। गौरतलब है कि 21वीं सदी की शुरुआत में यह माना जाता था कि व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी की ताक़तें राष्ट्रों को संघर्ष के लिए बहुत अधिक परस्पर निर्भर बना देंगी — परंतु आज वही ताक़तें दबाव के साधन बन चुकी हैं।

सुरक्षा और समृद्धि की मिटती सीमा

जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और समृद्धि के बीच की सीमा अब पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रगति की परिकल्पना राष्ट्रीय हित के अन्य मामलों के कारण धूमिल हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि समकालीन संघर्ष केवल सशस्त्र बलों पर नहीं, बल्कि औद्योगिक उत्पादन, अनुसंधान प्रणालियों और शासन संरचनाओं पर भी निरंतर दबाव डालते हैं।

भारत की 'स्मार्ट पावर' की संरचना

सेना प्रमुख ने विशेषज्ञों के हवाले से 'स्मार्ट पावर' को रणनीतिक बुद्धिमत्ता के रूप में परिभाषित किया — जो यह तय करती है कि किस साधन को, किस तीव्रता से और किस उद्देश्य के लिए तैनात किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत के लिए इसका अर्थ है राष्ट्रीय शक्ति का रणनीतिक बुद्धिमत्ता के साथ उपयोग करके शांति स्थापित करना, विकास को गति देना और वैश्विक वातावरण को अपने पक्ष में ढालना।

जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि कूटनीतिक, सूचनात्मक, सैन्य और आर्थिक तत्वों के पारंपरिक रणनीतिक ढाँचे को प्रौद्योगिकी और 'समग्र राष्ट्र' दृष्टिकोण जैसे नए तत्वों से पूरक करने की आवश्यकता है।

विश्व को यथार्थ में देखने की ज़रूरत

उन्होंने कहा, 'हमें पहले दुनिया को वैसे ही समझना होगा जैसी वह है, न कि जैसी हम उसे देखना चाहते हैं।' यह टिप्पणी उस व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है जिसमें परस्पर निर्भरता की उम्मीदें अब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में बदल चुकी हैं। आने वाले समय में भारत की रणनीतिक नीति इस यथार्थवादी दृष्टिकोण पर कितनी आधारित होगी, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 'स्मार्ट पावर' से क्या आशय बताया?
'स्मार्ट पावर' को उन्होंने रणनीतिक बुद्धिमत्ता के रूप में परिभाषित किया — जो यह तय करती है कि किस साधन को, किस तीव्रता से और किस उद्देश्य के लिए तैनात किया जाए। भारत के संदर्भ में इसका अर्थ है सैन्य, कूटनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साधनों का एकीकृत उपयोग।
होर्मुज जलडमरूमध्य का भारत की रणनीति से क्या संबंध है?
सेना प्रमुख ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सक्रिय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बताया, जो भारत की ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सीधे प्रासंगिक है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है और इसमें अस्थिरता भारत की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
सेमीकंडक्टर को रणनीतिक हथियार क्यों बताया गया?
जनरल द्विवेदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर और उनकी चुनिंदा उपलब्धता अब रणनीतिक लाभ के उपकरण बन गए हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा में सेमीकंडक्टर आपूर्ति को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भारत जैसे देशों के लिए आत्मनिर्भरता की ज़रूरत को रेखांकित करता है।
'समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की ज़िम्मेदारी नहीं — बल्कि उद्योग, अनुसंधान संस्थान, नागरिक प्रशासन और तकनीकी क्षेत्र सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। जनरल द्विवेदी ने पारंपरिक रणनीतिक ढाँचे को प्रौद्योगिकी और इस दृष्टिकोण से पूरक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह संगोष्ठी किस संदर्भ में आयोजित हुई?
यह संगोष्ठी नई दिल्ली में 19-20 मई 2025 को आयोजित हुई, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ दबाव में हैं और होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। इसका विषय 'सुरक्षा से समृद्धि: सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर' था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले