25 अगस्त 2026
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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा किया, पुंछ-राजौरी में आतंकवाद-रोधी तैयारियों की समीक्षा

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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा किया, पुंछ-राजौरी में आतंकवाद-रोधी तैयारियों की समीक्षा

सारांश

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का एलओसी दौरा महज़ औपचारिकता नहीं था — यह ऐसे समय में सीधा संदेश था जब पुंछ-राजौरी बेल्ट में घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। निगरानी तकनीक, सैन्य तैयारी और नागरिक विकास — तीनों मोर्चों पर एक साथ समीक्षा इस दौरे को विशेष बनाती है।

मुख्य बातें

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में एलओसी का दौरा किया।
व्हाइट नाइट कोर की तैनातियों, आतंकवाद-रोधी ग्रिड और घुसपैठ-रोधी तंत्र की व्यापक समीक्षा की गई।
सीमावर्ती क्षेत्रों में उन्नत निगरानी तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
सेना प्रमुख ने भारत के प्रथम गाँवों में चल रही जन-केंद्रित पहलों — शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास — की भी समीक्षा की।
जनरल सेठ ने अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से संवाद कर उनके मनोबल और परिचालन उत्कृष्टता की सराहना की।

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे अग्रिम सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की व्यापक समीक्षा की।

मुख्य घटनाक्रम

जनरल सेठ ने व्हाइट नाइट कोर की विभिन्न तैनातियों और परिचालन व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उन्हें एलओसी पर मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य, पाकिस्तान की ओर से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, घुसपैठ-रोधी तंत्र और आतंकवाद-रोधी ग्रिड की प्रभावशीलता के बारे में विस्तृत जानकारी दी। सैनिकों की तैनाती, निगरानी व्यवस्था, खुफिया समन्वय और बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप अपनाई जा रही रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।

तकनीक और निगरानी क्षमता

जनरल सेठ ने आधुनिक निगरानी प्रणालियों, तकनीक-आधारित सुरक्षा उपायों और सैन्य इकाइयों द्वारा विकसित क्षेत्रीय नवाचारों का मूल्यांकन किया। उन्हें बताया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने, घुसपैठ की कोशिशों का समय रहते पता लगाने और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विभिन्न इकाइयों की एकीकृत परिचालन तत्परता का आकलन कर सैनिकों की उच्च स्तर की तैयारी पर संतोष व्यक्त किया।

आधारभूत संरचना और नागरिक विकास

सेना प्रमुख ने क्षेत्र में चल रहे आधारभूत संरचना विकास कार्यों की भी समीक्षा की। उन्हें सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, संचार नेटवर्क, सैन्य सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के निर्माण एवं उन्नयन की प्रगति से अवगत कराया गया। गौरतलब है कि यह मजबूत आधारभूत ढाँचा न केवल सैन्य अभियानों की दक्षता बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जनरल सेठ ने भारत के प्रथम गाँवों के रूप में विकसित किए जा रहे सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही जन-केंद्रित पहलों की भी जानकारी ली। सेना द्वारा स्थानीय समुदायों के सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने इन पहलों को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय विकास के बीच मजबूत सेतु बताते हुए सराहना की।

जवानों से संवाद और आह्वान

सेना प्रमुख ने अग्रिम चौकियों पर तैनात अधिकारियों और जवानों से सीधी बातचीत की। उन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसमीय परिस्थितियों में डटे जवानों के समर्पण, साहस और पेशेवर दक्षता की प्रशंसा की। जनरल सेठ ने सभी रैंकों को परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने, मिशन पर केंद्रित रहने और बदलती चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को लगातार सक्षम बनाने का आह्वान किया।

दौरे का महत्व

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब एलओसी पर सुरक्षा चुनौतियों, घुसपैठ की कोशिशों और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सेना प्रमुख की यह यात्रा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने तथा सैनिकों का मनोबल ऊँचा रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में एलओसी पर सुरक्षा तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये प्रणालियाँ वास्तविक घुसपैठ की कोशिशों को रोकने में कितनी कारगर साबित होती हैं। नागरिक विकास को सुरक्षा के साथ जोड़ने की पहल दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ज़रूरी है, लेकिन इसके परिणाम तत्काल नहीं दिखते — और इसी अंतराल में आतंकी नेटवर्क अपनी जड़ें जमाते हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ ने एलओसी का दौरा क्यों किया?
जनरल धीरज सेठ ने 9 जुलाई 2026 को पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में एलओसी का दौरा कर सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की समीक्षा की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब इस क्षेत्र में घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
व्हाइट नाइट कोर क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
व्हाइट नाइट कोर भारतीय सेना का एक प्रमुख सैन्य गठन है जो जम्मू-कश्मीर में एलओसी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। जनरल सेठ ने इस कोर की विभिन्न तैनातियों और परिचालन व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
एलओसी पर किस तरह की नई तकनीक का उपयोग हो रहा है?
सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नत निगरानी प्रणालियों और तकनीक-आधारित सुरक्षा उपायों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है। इनका उद्देश्य घुसपैठ की कोशिशों का समय रहते पता लगाना और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
सेना सीमावर्ती नागरिकों के लिए क्या कर रही है?
सेना 'भारत के प्रथम गाँवों' के रूप में विकसित किए जा रहे सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए काम कर रही है। जनरल सेठ ने इन पहलों को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय विकास के बीच मजबूत सेतु बताते हुए सराहना की।
पुंछ-राजौरी क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पुंछ-राजौरी बेल्ट में घुसपैठ की कोशिशों और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सेना प्रमुख के दौरे को इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और सैनिकों का मनोबल ऊँचा रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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