31 अगस्त 2026
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सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पुणे में दक्षिणी कमान की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की, पूर्व सैनिकों को 'योद्धा सेवा सम्मान'

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सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पुणे में दक्षिणी कमान की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की, पूर्व सैनिकों को 'योद्धा सेवा सम्मान'

सारांश

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का पुणे दौरा महज़ औपचारिक निरीक्षण नहीं था — यह युद्ध की बदलती प्रकृति के बीच दक्षिणी कमान की तत्परता को परखने और पूर्व सैनिकों की सेवा को राष्ट्रीय मान्यता देने का अवसर था। 'योद्धा सेवा सम्मान' इस बात का संकेत है कि सेना वर्दी उतारने के बाद भी अपने योद्धाओं को नहीं भूलती।

मुख्य बातें

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 31 अगस्त 2026 को पुणे स्थित दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा किया।
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने परिचालन वातावरण, प्रशिक्षण पहलों और मिशन तत्परता पर विस्तृत ब्रीफिंग दी।
सेना प्रमुख ने स्वदेशी क्षमता विकास , टीटीपी में सुधार और प्रौद्योगिकी आत्मसात पर विशेष बल दिया।
पूर्व सैनिकों को कल्याण, युवा सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा में योगदान के लिए 'योद्धा सेवा सम्मान' प्रदान किया गया।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना और उसके पूर्व सैनिकों के बीच का बंधन आजीवन बना रहता है।

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 31 अगस्त 2026 को पुणे स्थित दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा किया और कमान की परिचालन तत्परता तथा जारी क्षमता संवर्धन पहलों की व्यापक समीक्षा की। इस दौरे में उन्होंने विशिष्ट पूर्व सैनिकों को 'योद्धा सेवा सम्मान' से भी नवाजा।

समीक्षा बैठक: परिचालन स्थिति का आकलन

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने सेना प्रमुख को मौजूदा परिचालन वातावरण, कमान की तैयारी की स्थिति, प्रशिक्षण पहलों और युद्ध प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अपनाए जा रहे उपायों की विस्तृत जानकारी दी। मिशन तत्परता को और सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विशेष चर्चा हुई।

कमांडरों और सैनिकों से संवाद

कमांडरों और सैनिकों के साथ सीधी बातचीत में जनरल धीरज सेठ ने निरंतर परिचालन तत्परता, अनुकूलनशीलता और प्रौद्योगिकी आत्मसात करने पर बल दिया। उन्होंने युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप युद्ध कौशल, युक्तियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं (टीटीपी) में निरंतर सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया।

सेना प्रमुख ने एक चुस्त, तकनीकी रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार सेना के निर्माण हेतु यथार्थवादी प्रशिक्षण, अधिक संयुक्तता और स्वदेशी क्षमता विकास के महत्व को भी उजागर किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सेना आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है।

सैनिकों की सराहना और संदेश

सभी रैंकों के व्यावसायिकता और समर्पण की प्रशंसा करते हुए जनरल सेठ ने सैनिकों से मिशन पर केंद्रित रहने और परिचालन तत्परता के उच्चतम मानकों को अनवरत बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कमान की परिचालन क्षमता को निरंतर मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया।

पूर्व सैनिकों को 'योद्धा सेवा सम्मान'

दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने पूर्व सैनिकों के कल्याण, युवा सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशिष्ट पूर्व सैनिकों को 'योद्धा सेवा सम्मान' प्रदान किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की अटूट सेवा भावना को स्वीकार करते हुए कहा कि भारतीय सेना और उसके पूर्व सैनिकों के बीच का बंधन आजीवन अटूट रहता है।

गौरतलब है कि यह सम्मान उन पूर्व सैनिकों को दिया गया जो सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। आगे भी ऐसे सम्मान समारोहों के ज़रिए सेना का इरादा पूर्व सैनिकों की भूमिका को राष्ट्रीय जीवन में रेखांकित करने का है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए संस्थागत ढाँचा कितना मज़बूत है — क्योंकि सम्मान समारोहों से परे, पेंशन विसंगतियाँ और पुनर्वास की चुनौतियाँ अभी भी बड़ा मुद्दा हैं। टीटीपी सुधार और संयुक्तता पर जोर सही दिशा में है, परंतु इसकी प्रभावशीलता की असली परीक्षा अभ्यासों और ज़मीनी तैयारी में होगी, न केवल समीक्षा बैठकों में।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने दक्षिणी कमान का दौरा क्यों किया?
जनरल धीरज सेठ ने 31 अगस्त 2026 को पुणे स्थित दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा कमान की परिचालन तत्परता और क्षमता संवर्धन पहलों की समीक्षा के लिए किया। इस दौरे का उद्देश्य मिशन तत्परता के मानकों का आकलन करना और सैनिकों को दिशा-निर्देश देना था।
'योद्धा सेवा सम्मान' क्या है और यह किसे दिया गया?
'योद्धा सेवा सम्मान' उन विशिष्ट पूर्व सैनिकों को दिया गया जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व सैनिक कल्याण, युवा सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया। यह सम्मान सेना प्रमुख ने स्वयं प्रदान किया।
दक्षिणी कमान की समीक्षा में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
समीक्षा में मौजूदा परिचालन वातावरण, प्रशिक्षण पहलें, युद्ध प्रभावशीलता, स्वदेशी क्षमता विकास और प्रौद्योगिकी आत्मसात पर विस्तृत चर्चा हुई। लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने सेना प्रमुख को विस्तृत ब्रीफिंग दी।
सेना प्रमुख ने सैनिकों को क्या संदेश दिया?
जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों से मिशन पर केंद्रित रहने, परिचालन तत्परता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और युद्ध कौशल में निरंतर सुधार करने का आग्रह किया। उन्होंने यथार्थवादी प्रशिक्षण और संयुक्तता को भविष्य की सेना की नींव बताया।
दक्षिणी कमान का मुख्यालय कहाँ है और इसके प्रमुख कौन हैं?
दक्षिणी कमान का मुख्यालय पुणे में स्थित है। इसके जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर हैं, जिन्होंने सेना प्रमुख को कमान की स्थिति की जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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