मध्य प्रदेश के 12 जिलों में सूखे की आहट, मोहन कैबिनेट ने किसानों की मदद का लिया संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के 12 जिलों में इस मौसम 80 प्रतिशत से कम वर्षा दर्ज होने के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। 27 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित मोहन सरकार की मंत्रि-परिषद बैठक में इस गंभीर मसले पर विस्तृत चर्चा हुई और यह निर्णय लिया गया कि जहाँ बुवाई की स्थिति यथावत बनी रहेगी, वे जिले औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किए जाएँगे और किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
सूखे की स्थिति और सरकार का रुख
राज्य सरकार के अनुसार इन 12 जिलों में यदि बुवाई की मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो वे सूखे के दायरे में आ जाएँगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों की प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति उसकी प्राथमिकता है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है, जिसके तहत कृषि क्षेत्र को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
कैबिनेट के प्रमुख वित्तीय अनुमोदन
मंत्रि-परिषद ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रतिकरात्मक वृक्षारोपण कार्यों को गति देने हेतु कैम्पा (CAMPA) कोष से ₹2,050 करोड़ 3 लाख के उपयोग को मंज़ूरी दी। स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को ₹1,743 करोड़ 58 लाख तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं के लिए ₹651 करोड़ 25 लाख की स्वीकृति दी गई।
गौरतलब है कि यह बजटीय अनुमोदन ऐसे समय में आया है जब राज्य एक साथ कृषि संकट और प्रशासनिक विस्तार की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
नवगठित जिलों में प्रशासनिक ढाँचा मज़बूत
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत नवगठित जिलों — निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर — में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना और नवीन पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के सुचारू संचालन तथा नागरिक आपूर्ति निगम से जुड़े उपार्जन प्रस्तावों को भी मंज़ूरी प्रदान की गई।
तीन जिलों की सिंचाई परियोजनाओं को हरी झंडी
मंत्रि-परिषद ने छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर की सिंचाई परियोजनाओं के वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए कुल ₹3,378 करोड़ 69 लाख की स्वीकृति दी।
छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के लिए ₹2,611 करोड़ 13 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना का लक्ष्य छिंदवाड़ा जिले में 1,90,500 हेक्टेयर भूमि पर ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के ज़रिये किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाना है।
सागर में पंचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स के अंतर्गत पगरा बांध और पंचमनगर बैराज का निर्माण पहले ही पूर्ण हो चुका है। पगरा बांध से पाइप प्रणाली के माध्यम से सागर और दमोह जिले की 25,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जानी है। इस परियोजना की निरंतरता के लिए ₹39 करोड़ 41 लाख की स्वीकृति दी गई है।
आगे की राह
सरकार की यह कार्रवाई संकेत देती है कि सूखाग्रस्त जिलों की औपचारिक अधिसूचना और किसान राहत पैकेज की घोषणा निकट भविष्य में की जा सकती है। सिंचाई परियोजनाओं के दीर्घकालिक वित्तपोषण से यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य कृषि जल-सुरक्षा को दूरगामी संकटों से निपटने का स्थायी समाधान मान रहा है।