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मध्य प्रदेश के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, जीतू पटवारी ने मोहन यादव से माँगा राहत पैकेज

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मध्य प्रदेश के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, जीतू पटवारी ने मोहन यादव से माँगा राहत पैकेज

सारांश

मध्य प्रदेश में कम बारिश और कीट प्रकोप ने 48 जिलों को सूखे की कगार पर ला खड़ा किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से अग्रिम राहत पैकेज, निशुल्क कीटनाशक और फसल बीमा के त्वरित भुगतान की माँग की है — और चेताया है कि संकट गहराने से पहले सरकार को हरकत में आना होगा।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के 48 जिलों में इस खरीफ सीजन में औसत से कम वर्षा के कारण सूखे जैसी स्थिति।
धान, सोयाबीन और मक्का की फसलें बारिश की कमी और कीट प्रकोप से प्रभावित; जबलपुर में धान के खेतों में दरारें।
उज्जैन संभाग में सोयाबीन पर इल्ली का हमला, किसानों की फसल संकट में।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 7 अगस्त को CM मोहन यादव से अग्रिम राहत पैकेज, विशेष गिरदावरी, निशुल्क कीटनाशक और फसल बीमा के त्वरित भुगतान की माँग की।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

मध्य प्रदेश के 48 जिलों में इस खरीफ सीजन में औसत से कम वर्षा के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे धान, सोयाबीन और मक्का की फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 7 अगस्त को मुख्यमंत्री मोहन यादव से अग्रिम राहत पैकेज जारी करने और किसानों के लिए तत्काल सहायता उपाय लागू करने की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

पटवारी ने शुक्रवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मध्य प्रदेश के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। धान, सोयाबीन और मक्का की फसलें बारिश की कमी और कीट प्रकोप से बर्बादी की ओर बढ़ रही हैं।' उन्होंने विशेष रूप से जबलपुर का उल्लेख किया, जहाँ धान के खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं, और उज्जैन संभाग का, जहाँ सोयाबीन की फसल पर इल्ली का प्रकोप किसानों की मेहनत को नष्ट कर रहा है।

कांग्रेस की माँगें

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने राज्य सरकार से चार सूत्रीय माँगें रखी हैं। पहली — प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी और फसल सर्वे तत्काल करवाया जाए। दूसरी — किसानों को कीट नियंत्रण की दवाएँ निशुल्क उपलब्ध कराई जाएँ। तीसरी — फसल बीमा के दावों का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करते हुए स्पष्ट समय-सीमा घोषित की जाए। चौथी — संभावित नुकसान की भरपाई के लिए अग्रिम राहत पैकेज जारी किया जाए।

किसानों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन अपने निर्णायक चरण में है और फसल की बर्बादी किसानों की आर्थिक स्थिति को गहरी चोट पहुँचा सकती है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में से एक है, और उज्जैन संभाग में कीट प्रकोप इस फसल के लिए विशेष रूप से गंभीर संकेत है। बारिश की कमी के साथ कीट हमले का दोहरा दबाव किसानों पर भारी पड़ रहा है।

सरकार से अपील

पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि 'किसान आसमान के साथ सरकार को भी देख रहा है। संकट आने के बाद नहीं, संकट बढ़ने से पहले सरकार किसानों के साथ खड़ी हो।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को मौसम के सुधरने का इंतजार करने के बजाय अभी से सक्रिय कदम उठाने चाहिए।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि वर्षा की स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फसल नुकसान के आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया को और अधिक विलंब नहीं किया जा सकेगा। किसान संगठनों की नज़र अब राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राहत तंत्र की सुस्ती हर बार उतनी ही पुरानी साबित होती है। जीतू पटवारी की माँगें राजनीतिक रूप से स्वाभाविक हैं, पर असली सवाल यह है कि राज्य सरकार के पास फसल सर्वे और गिरदावरी की प्रक्रिया को तेज़ करने की इच्छाशक्ति और तंत्र दोनों हैं या नहीं। फसल बीमा योजनाओं के दावों का विलंबित भुगतान एक पुरानी समस्या है जो हर संकट में उजागर होती है — इस बार भी उसी की पुनरावृत्ति दिखती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश के किन जिलों में सूखे जैसे हालात हैं?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के अनुसार मध्य प्रदेश के 48 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। विशेष रूप से जबलपुर में धान के खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं और उज्जैन संभाग में सोयाबीन पर कीट प्रकोप की गंभीर स्थिति है।
जीतू पटवारी ने सरकार से क्या माँगें की हैं?
पटवारी ने चार प्रमुख माँगें रखी हैं — प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी व फसल सर्वे, किसानों को निशुल्क कीट नियंत्रण दवाएँ, फसल बीमा दावों का त्वरित भुगतान और स्पष्ट समय-सीमा, तथा संभावित नुकसान की भरपाई के लिए अग्रिम राहत पैकेज।
मध्य प्रदेश में किन फसलों को नुकसान हो रहा है?
धान, सोयाबीन और मक्का इस सूखे और कीट प्रकोप से सबसे अधिक प्रभावित फसलें हैं। जबलपुर में धान और उज्जैन संभाग में सोयाबीन पर स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है।
राज्य सरकार ने किसानों के संकट पर क्या कदम उठाए हैं?
7 अगस्त तक राज्य सरकार की ओर से कांग्रेस की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव से पटवारी ने संकट बढ़ने से पहले सक्रिय कदम उठाने की अपील की है।
फसल बीमा दावों के भुगतान में देरी क्यों हो रही है?
पटवारी ने सरकार से फसल बीमा दावों के भुगतान के लिए स्पष्ट समय-सीमा घोषित करने की माँग की है, जिससे स्पष्ट होता है कि दावों का निपटारा अपेक्षित गति से नहीं हो रहा। फसल बीमा भुगतान में विलंब मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में एक पुरानी समस्या रही है।
राष्ट्र प्रेस
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