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क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक नया मानक स्थापित किया है? : जनरल उपेंद्र द्विवेदी

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क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक नया मानक स्थापित किया है? : जनरल उपेंद्र द्विवेदी

सारांश

क्या भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए एक नया मानक स्थापित किया है? जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, यह ऑपरेशन हमारी सेना की क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले गया है। जानिए इस ऑपरेशन के पीछे की कहानी और सेना की नई रणनीतियों के बारे में।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया क्षमता को दिखाया है।
नई इकाइयों का गठन भविष्य की चुनौतियों के अनुसार किया गया है।
आत्मनिर्भरता अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है।
सेना और नागरिक उद्देश्यों के लिए द्वि-उपयोगी संसाधनों पर ध्यान दिया जा रहा है।
अगले दो वर्षों को डेटा-केंद्रितता का वर्ष घोषित किया गया है।

नई दिल्ली, १५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक नया मानक स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को उजागर किया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की छवि प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं।

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर और मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।"

सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और विकसित किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, जो सेना और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनवोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।"

सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया।

सेना प्रमुख के अनुसार, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है।

जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ऑपरेशन न केवल एक नई दिशा की ओर संकेत करता है, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर भी हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह समय की मांग है कि हम अपने संसाधनों को विकसित करें और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करें।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की प्रतिक्रिया समय और समन्वय को बेहतर बनाना है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस ऑपरेशन के बारे में क्या कहा?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह ऑपरेशन एक नया मानक स्थापित करता है और भारतीय सेना की जिम्मेदारी को दर्शाता है।
भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए नई इकाइयों का गठन किया गया है और सेना को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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