दिल्ली हाई कोर्ट ने भुवन बाम के ट्रेडमार्क और व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा बढ़ाई, Google-Meta-Flipkart को हटाने के आदेश

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दिल्ली हाई कोर्ट ने भुवन बाम के ट्रेडमार्क और व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा बढ़ाई, Google-Meta-Flipkart को हटाने के आदेश

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने भुवन बाम के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए Google, Meta, Flipkart और Spotify को अनधिकृत सामग्री हटाने का आदेश दिया। डीपफेक वीडियो और ई-कॉमर्स लिस्टिंग के नए मामलों के बाद यह फैसला भारत में डिजिटल क्रिएटर्स के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम है।

Key Takeaways

दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को भुवन बाम के व्यक्तित्व अधिकारों की अंतरिम सुरक्षा का विस्तार किया। Google LLC को 6 YouTube URLs, Flipkart को 2 प्रोडक्ट लिस्टिंग, Spotify India को 3 लिंक, Meta Platforms को 3 Instagram लिंक हटाने का निर्देश दिया गया। उल्लंघनों में डीपफेक वीडियो , कॉपीराइट उल्लंघन और ई-कॉमर्स पर अनधिकृत व्यावसायिक लिस्टिंग शामिल हैं। पहला अंतरिम आदेश 13 जनवरी 2026 को पारित हुआ था, जिसके बावजूद उल्लंघन जारी रहे। ' जॉन डो ' संस्थाओं को भी अगली सुनवाई तक किसी भी उल्लंघनकारी सामग्री बनाने, प्रकाशित करने या बेचने से रोका गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को यूट्यूबर और अभिनेता भुवन बाम के व्यक्तित्व अधिकारों की अंतरिम सुरक्षा का दायरा विस्तारित करते हुए कई प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स कंपनियों को उनके नाम, तस्वीर, किरदार, आवाज और रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के कथित अनधिकृत उपयोग से संबंधित नई सामग्री तत्काल हटाने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल-न्यायाधीश पीठ ने बाम और उनकी कंपनी 'बीबी की वाइन्स' द्वारा दायर वाणिज्यिक मुकदमे में पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

13 जनवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पहले के अंतरिम आदेश में कई प्रतिवादियों को भुवन बाम के नाम, तस्वीरों और ऑन-स्क्रीन किरदारों का व्यावसायिक या निजी लाभ के लिए उपयोग करने से तथा 'बीबी की वाइन्स (भुवन बाम)' और 'बीबी की वाइन्स' जैसे रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क का उपयोग करके सामान बेचने से रोक दिया था। इसके बावजूद विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उल्लंघन के नए मामले सामने आने पर यह ताज़ा अर्जी दायर की गई।

नए उल्लंघनों का विवरण

न्यायमूर्ति सिंह ने अपने ताज़ा आदेश में दर्ज किया कि नई अर्जी में डीपफेक वीडियो, कॉपीराइट उल्लंघन करने वाली सामग्री और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर अनधिकृत व्यावसायिक लिस्टिंग के मामले शामिल हैं। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों और स्क्रीनशॉट्स की जांच के बाद माना कि वादियों ने प्रथम दृष्टया एक मज़बूत मामला प्रस्तुत किया है।

आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया,

Point of View

NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली हाई कोर्ट ने भुवन बाम के मामले में क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को भुवन बाम के व्यक्तित्व अधिकारों की अंतरिम सुरक्षा का विस्तार करते हुए Google, Meta, Flipkart और Spotify सहित कई प्लेटफॉर्म को अनधिकृत सामग्री हटाने का निर्देश दिया। साथ ही 'जॉन डो' संस्थाओं को भी उल्लंघनकारी सामग्री बनाने या बेचने से रोका गया।
'बीबी की वाइन्स' ट्रेडमार्क विवाद क्या है?
'बीबी की वाइन्स (भुवन बाम)' और 'बीबी की वाइन्स' भुवन बाम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। कई प्रतिवादियों पर इन ट्रेडमार्क का उपयोग करके अनधिकृत रूप से सामान बेचने और भुवन बाम के नाम, तस्वीर व किरदारों का व्यावसायिक दोहन करने का आरोप है।
इस मामले में डीपफेक का क्या संबंध है?
नई अर्जी में दर्ज उल्लंघनों में डीपफेक वीडियो भी शामिल हैं जो भुवन बाम की छवि और आवाज का अनधिकृत उपयोग करते हैं। कोर्ट ने इन्हें व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल हटाने का आदेश दिया।
पैरोडी और कैरिकेचर के दावों पर कोर्ट ने क्या कहा?
कुछ प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि उनकी सामग्री पैरोडी और कैरिकेचर के अपवाद के दायरे में आती है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई में विस्तार से विचार किया जाएगा।
इस फैसले का भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स पर क्या असर होगा?
यह आदेश भारत में डिजिटल क्रिएटर्स के व्यक्तित्व अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है। यह दर्शाता है कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी अदालती आदेशों का पालन करना होगा और उल्लंघन जारी रहने पर नए आदेश प्राप्त किए जा सकते हैं।
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