येत्तिनाहोल परियोजना एक सप्ताह में फिर शुरू होगी, मेकेदातु के लिए 5,300 एकड़ भूमि आवंटित: डीके शिवकुमार
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सारांश
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक सप्ताह के भीतर येत्तिनाहोल परियोजना का काम फिर शुरू करने का निर्देश दिया है और मेकेदातु के लिए 5,300 एकड़ भूमि आवंटित करने की घोषणा की है। ₹257 करोड़ का केंद्रीय जुर्माना चुकाने के बाद यह बड़ी पेयजल पहल आगे बढ़ेगी।
Key Takeaways
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि येत्तिनाहोल परियोजना का काम एक सप्ताह के भीतर फिर शुरू होगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर ₹257 करोड़ का जुर्माना व क्षतिपूर्ति भुगतान तत्काल करने का आदेश दिया गया। मेकेदातु परियोजना के लिए वन विभाग को 5,300 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी; DPR सक्षम समिति के समक्ष प्रस्तुत होगी। भूमि हस्तांतरण की लगभग 10 प्रतिशत प्रक्रिया अभी लंबित है, जो एक सप्ताह में पूरी होगी। कोलार , चिक्कबल्लापुर और तुमकुरु के सूखाग्रस्त जिलों को जल्द पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में घोषणा की कि येत्तिनाहोल परियोजना के लंबित कार्य एक सप्ताह के भीतर फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि मेकेदातु परियोजना के लिए वन विभाग को 5,300 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी।
बैठक के बाद हुई घोषणाएँ
विधान सौधा में येत्तिनाहोल, मेकेदातु और भद्रा अपर कैनाल परियोजनाओं पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य सरकार को जुर्माने और क्षतिपूर्ति उपायों के लिए ₹257 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा,
Point of View
लेकिन ₹257 करोड़ का जुर्माना यह बताता है कि पर्यावरण अनुपालन में राज्य सरकार पहले से चूकती रही है। मेकेदातु का डीपीआर तैयार होना एक सकारात्मक कदम है, परंतु तमिलनाडु की आपत्तियों और केंद्रीय स्वीकृतियों की जटिल प्रक्रिया इस परियोजना को अभी भी दूर की कौड़ी बनाती है। कोलार और चिक्कबल्लापुर जैसे सूखाग्रस्त जिले दशकों से इस पानी का इंतजार कर रहे हैं — असली जवाबदेही यह होगी कि जमीनी काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
NationPress
30/04/2026
Frequently Asked Questions
येत्तिनाहोल परियोजना क्या है और इसका काम क्यों रुका था?
येत्तिनाहोल परियोजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख पेयजल पहल है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी घाट की नेत्रावती नदी की सहायक धारा से कोलार, चिक्कबल्लापुर, तुमकुरु और बेंगलुरु ग्रामीण जिलों को पानी पहुँचाना है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ फाइल वापस की थी, जिन्हें अब राज्य ने स्वीकार कर लिया है।
मेकेदातु परियोजना के लिए 5,300 एकड़ भूमि क्यों आवंटित की जा रही है?
मेकेदातु परियोजना की वैधानिक और परियोजना आवश्यकताओं के तहत वन विभाग को 5,300 एकड़ भूमि हस्तांतरित करना अनिवार्य है। यह भूमि राजस्व विभाग से वन विभाग को दी जाएगी और इस संबंध में बातचीत जारी है।
₹257 करोड़ का भुगतान किसलिए किया जा रहा है?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने येत्तिनाहोल परियोजना से जुड़े जुर्माने और क्षतिपूर्ति उपायों के लिए कर्नाटक सरकार को ₹257 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया है। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने अधिकारियों को तत्काल यह भुगतान करने का आदेश दिया है।
मेकेदातु परियोजना की डीपीआर की स्थिति क्या है?
मेकेदातु परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और इसे आगे विचार-विमर्श व अनुमोदन के लिए सक्षम समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। परियोजना की लागत में भी एक बार फिर संशोधन किया गया है।
कोलार और चिक्कबल्लापुर को पानी कब मिलेगा?
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि चिक्कबल्लापुर और कोलार को जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। येत्तिनाहोल का काम एक सप्ताह में शुरू होने के बाद तुमकुरु क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण सर्वेक्षण भी शुरू होगा।