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अहमदाबाद: वटवा में घर के नीचे 18 फीट गहरे मिला कंकाल, 1992 के हत्या मामले में क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता

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अहमदाबाद: वटवा में घर के नीचे 18 फीट गहरे मिला कंकाल, 1992 के हत्या मामले में क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता

सारांश

अहमदाबाद के वटवा में एक घर के फर्श से 18 फीट नीचे दफन मानव कंकाल ने 35 साल पुरानी एक हत्या की कहानी उजागर कर दी। क्राइम ब्रांच का मानना है कि ये अवशेष 1992 में लापता हुई 17-18 वर्षीय फरजाना उर्फ शबनम के हैं। डीएनए रिपोर्ट ही अब इस ठंडे पड़े मामले की कुंजी है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को वटवा के कुतुब नगर में एक घर के फर्श से 18 फीट नीचे मानव कंकाल के अवशेष मिले।
अवशेष 1992 में लापता हुई फरजाना उर्फ शबनम (उम्र कथित तौर पर 17-18 साल , मूल निवासी धोलका ) के होने का संदेह है।
मामले में चार आरोपियों की पहचान हुई — शमशुद्दीन , उसका भाई इकबाल खेड़ावाला , अब्दुल करीम (मृत) और प्रॉपर्टी मालकिन सलियाबीबी (मृत)।
पुलिस के अनुसार शव को घर के अंदर पहले से खोदे गए गड्ढे में दफनाकर सीमेंट या प्लास्टर से ढक दिया गया था।
कंकाल के अवशेष पोस्टमार्टम और डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सिविल अस्पताल भेजे गए; मुंबई में रहने वाले एक रिश्तेदार का डीएनए सैंपल भी लिया गया।
एसीपी भरत पटेल के अनुसार, डीएनए रिपोर्ट बचे हुए आरोपियों के खिलाफ कानूनी मामले को मज़बूत करने में निर्णायक होगी।

अहमदाबाद के वटवा स्थित कुतुब नगर इलाके में एक रिहायशी प्रॉपर्टी के फर्श से करीब 18 फीट नीचे दफन मानव कंकाल के अवशेष मिलने के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को 1992 के एक 35 साल पुराने हत्या मामले में बड़ी सफलता मिली है। 30 अप्रैल 2026 को की गई इस खुदाई के बाद जांचकर्ता अब डीएनए पुष्टि के ज़रिए कंकाल की पहचान सुनिश्चित करने में जुटे हैं।

कैसे हुई खुदाई और क्या मिला

बुधवार को एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के अधिकारियों और मजदूरों की टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से उस रिहायशी प्रॉपर्टी के फर्श को खोदा। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस को पक्की खुफिया जानकारी मिली थी कि दशकों पहले इसी स्थान पर एक महिला की हत्या कर उसे दफना दिया गया था।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, खुदाई में मिले कंकाल के अवशेष फरजाना उर्फ शबनम के होने का संदेह है। वह मूल रूप से धोलका की रहने वाली थी और लापता होने के समय उसकी उम्र कथित तौर पर 17 से 18 साल के बीच थी।

पीड़िता की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

अधिकारियों ने बताया कि फरजाना की शादी कम उम्र में सूरत में हुई थी, जिसके कुछ समय बाद वह मायके लौट आई और फिर अहमदाबाद चली गई। परिवार से अलगाव के बाद वह शहर में अकेले रह रही थी।

पुलिस के अनुसार, बाद में वह शमशुद्दीन नामक व्यक्ति के संपर्क में आई। दोनों के बीच संबंध बने और उन्होंने विवाह भी किया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि जब महिला ने वेश्यावृत्ति जारी रखी, तो दोनों के बीच झगड़े होने लगे, जिससे कथित तौर पर उनके संबंधों में गंभीर तनाव आ गया।

आरोपियों की पहचान और साजिश का आरोप

एसीपी भरत पटेल ने बताया कि इस कथित अपराध में अब तक चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

तो क्या बचे हुए संदिग्धों के खिलाफ फोरेंसिक साक्ष्य अकेले न्याय दिला पाएंगे? डीएनए तकनीक ने इस मामले को फिर से खोला है, लेकिन दशकों की देरी के बाद न्याय की राह अभी भी लंबी है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद के वटवा में मिला कंकाल किसका है?
क्राइम ब्रांच के अनुसार, वटवा के कुतुब नगर में मिले कंकाल के अवशेष फरजाना उर्फ शबनम के होने का संदेह है, जो 1992 में लापता हुई थी और उस समय उसकी उम्र कथित तौर पर 17 से 18 साल थी। पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण किया जा रहा है।
1992 के इस हत्या मामले में कितने आरोपी हैं?
एसीपी भरत पटेल के अनुसार, मामले में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है — शमशुद्दीन, उसका भाई इकबाल खेड़ावाला, दोस्त अब्दुल करीम (अब मृत) और प्रॉपर्टी मालकिन सलियाबीबी (अब मृत)। शमशुद्दीन और इकबाल खेड़ावाला के अभी भी जीवित होने का अनुमान है।
कंकाल की पहचान कैसे की जाएगी?
अवशेषों को पोस्टमार्टम और डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया है। मुंबई में रहने वाले कथित पीड़िता के एक रिश्तेदार का डीएनए सैंपल भी लिया गया है, जिससे मिलान कर पहचान की पुष्टि की जाएगी।
शव को इतने सालों तक कैसे छिपाया गया?
पुलिस के अनुसार, शव को घर के अंदर पहले से खोदे गए एक गड्ढे में दफनाकर सीमेंट या प्लास्टर से ढक दिया गया था। इसके बाद वह प्रॉपर्टी कई सालों तक वीरान पड़ी रही और स्थानीय लोग उसे किसी रहस्यमयी घटना से जोड़कर देखते थे।
इस मामले में आगे क्या होगा?
जांच जारी है और फोरेंसिक नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। एसीपी भरत पटेल ने कहा है कि डीएनए रिपोर्ट बचे हुए आरोपियों — शमशुद्दीन और इकबाल खेड़ावाला — के खिलाफ कानूनी मामले को मज़बूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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