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गाजियाबाद: ₹100 करोड़ की जमीन घोटाले में रिटायर्ड लेखपाल समेत 10 गिरफ्तार, अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

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गाजियाबाद: ₹100 करोड़ की जमीन घोटाले में रिटायर्ड लेखपाल समेत 10 गिरफ्तार, अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

सारांश

गाजियाबाद पुलिस ने ₹100 करोड़ की जमीन को ₹50 करोड़ में बेचने की साजिश रचने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह को रंगे हाथ पकड़ा। रिटायर्ड लेखपाल की संलिप्तता और तीन राज्यों के आरोपी — यह महज एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि राजस्व तंत्र की कमजोरियों का संगठित दोहन है।

मुख्य बातें

गाजियाबाद पुलिस ने 8 जून 2026 को साहिबाबाद में ₹100 करोड़ की जमीन घोटाले में 10 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
आरोपी जमीन को बाजार मूल्य से आधे दाम — ₹50 करोड़ — में बेचने की साजिश कर रहे थे।
गिरोह में एक रिटायर्ड लेखपाल शामिल था, जो राजस्व विभाग के अनुभव से फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।
आरोपी महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं; एक महिला आरोपी अभी भी फरार है।
बरामदगी में फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड, कूटरचित दस्तावेज और नकली रजिस्ट्री कॉपियाँ शामिल हैं।
पुलिस टीम को ₹25,000 के पुरस्कार की घोषणा; जांच जारी है।

गाजियाबाद पुलिस ने सोमवार, 8 जून 2026 को साहिबाबाद क्षेत्र में ₹100 करोड़ की जमीन हड़पने की साजिश रचने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया और 10 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस गिरोह में एक रिटायर्ड लेखपाल भी शामिल था, जो राजस्व विभाग के अपने अनुभव का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में सहायक था। गाजियाबाद के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) धवल जायसवाल ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी दी।

गिरोह का तरीकाकार और मॉडस ऑपरेंडी

डीसीपी जायसवाल के अनुसार, आरोपी किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज जमीन के कागजात पहले हासिल करते थे। इसके बाद एक डमी व्यक्ति को उस जमीन के मालिक के रूप में खड़ा किया जाता था और उससे बार्गेनिंग का नाटक किया जाता था। फिर इसी आधार पर किसी तीसरे पक्ष को यह विश्वास दिलाया जाता था कि जमीन उनकी है और वे उसे बाजार मूल्य से कम दाम पर बेचने को तैयार हैं।

इस मामले में आरोपियों ने साहिबाबाद क्षेत्र में राम कुमार अग्रवाल के नाम का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी जमीन की डील पक्की करने का प्रयास किया, जिसकी बाजार में कीमत ₹100 करोड़ है। इसे वे दूसरे पक्ष को ₹50 करोड़ में बेचने का प्रयास कर रहे थे। एडवांस रकम लेकर फरार हो जाना इनकी आदत रही है।

शिकायत और पुलिस का जाल

जब दूसरे पक्ष को संदेह हुआ, तो उन्होंने आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर थाना साहिबाबाद की पुलिस टीम ने एक जाल बिछाया और मौके पर पहुँचकर 10 आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपियों के पास से फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड, कूटरचित दस्तावेज और जमीन की रजिस्ट्री की नकली कॉपियाँ बरामद की गई हैं।

गौरतलब है कि यह गिरोह इससे पहले भी साहिबाबाद में एक बार ऐसी कोशिश कर चुका था, लेकिन तब उसे सफलता नहीं मिली थी। दूसरे प्रयास में पुलिस ने इन्हें दबोच लिया।

रिटायर्ड लेखपाल की भूमिका

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू एक रिटायर्ड लेखपाल की संलिप्तता है। डीसीपी जायसवाल के अनुसार, यह व्यक्ति राजस्व विभाग में अपने लंबे अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने में मदद करता था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले उसके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के बाद भी फर्जी रजिस्ट्री और जमीन घोटाले की घटनाएँ सामने आती रही हैं। किसी सरकारी अनुभव वाले व्यक्ति का इस तरह के गिरोह में शामिल होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठाता है।

आरोपियों का भौगोलिक विस्तार

गिरफ्तार किए गए 10 आरोपी महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जो इस गिरोह की अंतर-राज्यीय प्रकृति को दर्शाता है। पुलिस के अनुसार इन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में इसी तरह की धोखाधड़ी के प्रयास किए हैं। एक महिला आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी जल्द किए जाने की बात पुलिस ने कही है।

पुरस्कार और आगे की जांच

डीसीपी जायसवाल ने इस सफल कार्रवाई के लिए थाना साहिबाबाद की पुलिस टीम को ₹25,000 के पुरस्कार की घोषणा की है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य राज्यों में भी इस गिरोह के नेटवर्क की जाँच कर रही है। फरार महिला आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि तकनीकी सुधार बिना प्रशासनिक जवाबदेही के अधूरे हैं। तीन राज्यों में फैला यह नेटवर्क यह भी सवाल उठाता है कि क्या यह गिरोह पहले के अन्य मामलों से भी जुड़ा है, जिनकी जांच अभी बाकी है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजियाबाद जमीन घोटाले में क्या हुआ?
गाजियाबाद पुलिस ने 8 जून 2026 को साहिबाबाद में ₹100 करोड़ की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ₹50 करोड़ में बेचने की कोशिश करते हुए एक अंतर-राज्यीय गिरोह के 10 सदस्यों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। गिरोह में एक रिटायर्ड लेखपाल भी शामिल था।
रिटायर्ड लेखपाल की इस घोटाले में क्या भूमिका थी?
डीसीपी धवल जायसवाल के अनुसार, रिटायर्ड लेखपाल राजस्व विभाग में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए फर्जी और कूटरचित भूमि दस्तावेज तैयार करने में गिरोह की मदद कर रहा था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले उसके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था।
इस गिरोह का तरीकाकार क्या था?
गिरोह पहले किसी और की जमीन के कागजात हासिल करता था, फिर एक डमी व्यक्ति को मालिक बनाकर खड़ा करता था और बाजार मूल्य से कम दाम पर डील का लालच देकर एडवांस लेकर फरार हो जाता था। फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और नकली रजिस्ट्री कॉपियाँ इनके हथियार थे।
गिरफ्तार आरोपी किन राज्यों से हैं और क्या कोई फरार है?
गिरफ्तार 10 आरोपी महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। एक महिला आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी जल्द किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस ने मामले में जांच जारी रखी है और अन्य राज्यों में भी इस गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। थाना साहिबाबाद टीम को ₹25,000 के पुरस्कार की घोषणा की गई है; फरार महिला आरोपी की गिरफ्तारी के बाद और खुलासे होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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