साइबराबाद पुलिस ने ₹1,500 करोड़ के जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार; पूर्व विधायक फरार
सारांश
मुख्य बातें
साइबराबाद पुलिस ने गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी भूमि की फर्जी बिक्री से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल और निम्माला साई किरण को शुक्रवार, 23 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू कथित तौर पर फरार हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
पुलिस को 23 मई को रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल के तहसीलदार श्रीनिवास रेड्डी से शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में बताया गया कि सर्वे नंबर 18 में स्थित सरकारी पोराम्बोक भूमि को नियमित कर निजी व्यक्तियों के नाम आवंटित करने के झूठे दावों वाले फर्जी सरकारी आदेश (जीओ) व्हाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन जाली दस्तावेजों में पाँच फर्जी सरकारी आदेशों की प्रतियाँ शामिल थीं।
शिकायत के आधार पर साइबराबाद के नरसिंगी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोपियों की साजिश
जाँच में सामने आया कि गंडीपेट गाँव निवासी स्वर्गीय दशरथ के पुत्र-पुत्री — निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल, निम्माला रामास्वामी और मंगा — ने सर्वे संख्या 18 की लगभग 10 एकड़ सरकारी पोराम्बोक भूमि पर कथित तौर पर स्वामित्व का दावा किया था। परिवार ने राजस्व विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर कीं, जिन्हें अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया।
न्यायालय द्वारा दावे खारिज होने के बावजूद, आरोपियों ने कथित तौर पर बोला रमेश और बोला ब्रह्मा नायडू के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। खुद को भूमि का वैध मालिक बताते हुए उन्होंने ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़ की दर से जमीन बेच दी। निम्माला परिवार और बोला रमेश-ब्रह्मा नायडू के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सरकार को अनुचित वित्तीय नुकसान पहुँचा।
जाँच और बरामदगी
पुलिस उपायुक्त च. श्रीनिवास के अनुसार, आरोपियों के घरों पर तलाशी के दौरान बैंक पासबुक, एमओयू दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए। जाँच में यह भी पता चला कि निम्माला परिवार के सदस्यों ने प्रस्तावित भूमि सौदे के संदर्भ में दूसरे पक्ष से लगभग ₹4 करोड़ प्राप्त किए थे।
इस साजिश में सुनील, राधाकृष्ण और अन्य लोगों ने कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जो वर्तमान में फरार बताए जा रहे हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश जारी रखे हुए है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तेलंगाना में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिये धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय द्वारा दावे खारिज होने के बाद भी आरोपियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी जीओ प्रसारित कर खरीदारों को गुमराह किया — जो इस घोटाले की सुनियोजित प्रकृति को उजागर करता है। आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और संपत्ति से जुड़े और खुलासे संभव हैं।