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साइबराबाद पुलिस ने ₹1,500 करोड़ के जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार; पूर्व विधायक फरार

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साइबराबाद पुलिस ने ₹1,500 करोड़ के जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार; पूर्व विधायक फरार

सारांश

साइबराबाद पुलिस ने गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ की सरकारी जमीन फर्जी जीओ के जरिये बेचने की साजिश का पर्दाफाश किया। तीन गिरफ्तार, YSRCP पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू फरार। उच्च न्यायालय द्वारा दावे खारिज होने के बाद भी आरोपियों ने सोशल मीडिया से फर्जी दस्तावेज फैलाए।

मुख्य बातें

साइबराबाद पुलिस ने गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी भूमि के जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया।
निम्माला राजेश गौड़ , निम्माला वेणुगोपाल और निम्माला साई किरण को गिरफ्तार किया गया; YSRCP के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू कथित तौर पर फरार।
आरोपियों ने पाँच फर्जी सरकारी आदेश (जीओ) तैयार कर व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए।
जमीन ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़ की दर से बेची गई; निम्माला परिवार को कथित तौर पर लगभग ₹4 करोड़ प्राप्त हुए।
अक्टूबर 2025 में उच्च न्यायालय ने परिवार की याचिकाएँ खारिज कर दी थीं, इसके बावजूद साजिश रची गई।
तलाशी में बैंक पासबुक , एमओयू दस्तावेज , मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त; मध्यस्थ सुनील व राधाकृष्ण फरार।

साइबराबाद पुलिस ने गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी भूमि की फर्जी बिक्री से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल और निम्माला साई किरण को शुक्रवार, 23 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू कथित तौर पर फरार हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

पुलिस को 23 मई को रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल के तहसीलदार श्रीनिवास रेड्डी से शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में बताया गया कि सर्वे नंबर 18 में स्थित सरकारी पोराम्बोक भूमि को नियमित कर निजी व्यक्तियों के नाम आवंटित करने के झूठे दावों वाले फर्जी सरकारी आदेश (जीओ) व्हाट्सएप ग्रुपों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन जाली दस्तावेजों में पाँच फर्जी सरकारी आदेशों की प्रतियाँ शामिल थीं।

शिकायत के आधार पर साइबराबाद के नरसिंगी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई।

आरोपियों की साजिश

जाँच में सामने आया कि गंडीपेट गाँव निवासी स्वर्गीय दशरथ के पुत्र-पुत्री — निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल, निम्माला रामास्वामी और मंगा — ने सर्वे संख्या 18 की लगभग 10 एकड़ सरकारी पोराम्बोक भूमि पर कथित तौर पर स्वामित्व का दावा किया था। परिवार ने राजस्व विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर कीं, जिन्हें अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया।

न्यायालय द्वारा दावे खारिज होने के बावजूद, आरोपियों ने कथित तौर पर बोला रमेश और बोला ब्रह्मा नायडू के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। खुद को भूमि का वैध मालिक बताते हुए उन्होंने ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़ की दर से जमीन बेच दी। निम्माला परिवार और बोला रमेश-ब्रह्मा नायडू के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सरकार को अनुचित वित्तीय नुकसान पहुँचा।

जाँच और बरामदगी

पुलिस उपायुक्त च. श्रीनिवास के अनुसार, आरोपियों के घरों पर तलाशी के दौरान बैंक पासबुक, एमओयू दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए। जाँच में यह भी पता चला कि निम्माला परिवार के सदस्यों ने प्रस्तावित भूमि सौदे के संदर्भ में दूसरे पक्ष से लगभग ₹4 करोड़ प्राप्त किए थे।

इस साजिश में सुनील, राधाकृष्ण और अन्य लोगों ने कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जो वर्तमान में फरार बताए जा रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

पुलिस फरार आरोपियों की तलाश जारी रखे हुए है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तेलंगाना में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिये धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय द्वारा दावे खारिज होने के बाद भी आरोपियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी जीओ प्रसारित कर खरीदारों को गुमराह किया — जो इस घोटाले की सुनियोजित प्रकृति को उजागर करता है। आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और संपत्ति से जुड़े और खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी फर्जी जीओ महीनों तक प्रसारित होते रहे — जो राजस्व विभाग और पुलिस की निगरानी पर सवाल उठाता है। एक पूर्व विधायक का नाम इस साजिश में आना यह भी दर्शाता है कि भूमि धोखाधड़ी में राजनीतिक संरक्षण की भूमिका की गहरी जाँच जरूरी है। जब तक डिजिटल भूमि अभिलेखों का वास्तविक समय सत्यापन तंत्र नहीं बनता, ऐसे घोटाले दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबराबाद जमीन घोटाला क्या है?
साइबराबाद पुलिस ने गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी पोराम्बोक भूमि को फर्जी सरकारी आदेशों (जीओ) के जरिये अवैध रूप से बेचने की साजिश का भंडाफोड़ किया है। आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पाँच नकली जीओ प्रसारित कर खरीदारों को यह विश्वास दिलाया कि जमीन वैध रूप से उनके नाम आवंटित है।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
निम्माला राजेश गौड़, निम्माला वेणुगोपाल और निम्माला साई किरण को गिरफ्तार किया गया है। YSRCP के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू और मध्यस्थ सुनील व राधाकृष्ण कथित तौर पर फरार हैं।
आरोपियों ने जमीन कितने में बेची और कितनी रकम ली?
आरोपियों ने ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़ की दर से जमीन बेची। जाँच के अनुसार निम्माला परिवार के सदस्यों ने दूसरे पक्ष से लगभग ₹4 करोड़ प्राप्त किए।
उच्च न्यायालय ने इस भूमि पर पहले क्या फैसला दिया था?
निम्माला परिवार ने राजस्व विभाग के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की थीं, जिन्हें अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन बेचने की साजिश जारी रखी।
पुलिस ने इस मामले में क्या सबूत जब्त किए?
तलाशी के दौरान बैंक पासबुक, समझौता ज्ञापन (एमओयू) दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किए गए। मामला नरसिंगी पुलिस स्टेशन में दर्ज है और पुलिस उपायुक्त च. श्रीनिवास जाँच की निगरानी कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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