हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत, नागौर एफआईआर में सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने 6 अक्टूबर 2026 को नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल को अंतरिम राहत प्रदान की है। नागौर जिले के कुचेरा थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में कोर्ट ने बेनीवाल के खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही राजस्थान सरकार और पुलिस से जवाब तलब किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कुचेरा में आयोजित एक राजनीतिक रैली से जुड़ा है। आरोप है कि उस समय प्रशासन द्वारा लागू निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन किया गया था। इस संबंध में 4 मई 2024 को सब-इंस्पेक्टर मुकेश कुमार की शिकायत पर कुचेरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
एफआईआर में लगाई गई धाराएँ गैरकानूनी सभा, लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ते में बाधा या खतरा उत्पन्न करने से संबंधित आरोपों पर आधारित हैं।
कोर्ट में क्या हुआ
यह आदेश जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने बेनीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। बेनीवाल ने अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 'शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है' — यह टिप्पणी इस मामले में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
बचाव पक्ष की दलीलें
बेनीवाल के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह मामला एक राजनीतिक विरोध से जुड़ा है, जिसमें हिंसा अथवा किसी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रैली चुनावी समय में एक वैध राजनीतिक गतिविधि थी और ऐसे में एफआईआर के आधार पर सख्त कार्रवाई अनुचित होगी।
सरकार की भूमिका और आगे की स्थिति
दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने बेनीवाल को अंतरिम सुरक्षा दी और राज्य सरकार व संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब माँगा। यह आदेश अंतरिम राहत है — अंतिम फैसला नहीं — और कार्यवाही अभी लंबित है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में इसी तरह के मामलों में मिसाल के रूप में उद्धृत की जा सकती है।