6 अक्टूबर 2026
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हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत, नागौर एफआईआर में सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक

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हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत, नागौर एफआईआर में सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव रैली से जुड़े कुचेरा थाना एफआईआर मामले में अंतरिम राहत दी। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब माँगा।

मुख्य बातें

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को 6 अक्टूबर 2026 को अंतरिम राहत प्रदान की।
कुचेरा थाने में 4 मई 2024 को दर्ज एफआईआर में सख्त कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई।
यह एफआईआर 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कुचेरा में हुई राजनीतिक रैली में निषेधाज्ञा उल्लंघन के आरोप पर आधारित है।
जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने कहा — 'शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।' राजस्थान सरकार और पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब; अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद।
यह आदेश अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं — कार्यवाही अभी भी लंबित है।

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने 6 अक्टूबर 2026 को नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल को अंतरिम राहत प्रदान की है। नागौर जिले के कुचेरा थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में कोर्ट ने बेनीवाल के खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही राजस्थान सरकार और पुलिस से जवाब तलब किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कुचेरा में आयोजित एक राजनीतिक रैली से जुड़ा है। आरोप है कि उस समय प्रशासन द्वारा लागू निषेधाज्ञा आदेशों का उल्लंघन किया गया था। इस संबंध में 4 मई 2024 को सब-इंस्पेक्टर मुकेश कुमार की शिकायत पर कुचेरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एफआईआर में लगाई गई धाराएँ गैरकानूनी सभा, लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ते में बाधा या खतरा उत्पन्न करने से संबंधित आरोपों पर आधारित हैं।

कोर्ट में क्या हुआ

यह आदेश जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने बेनीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। बेनीवाल ने अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 'शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है' — यह टिप्पणी इस मामले में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

बचाव पक्ष की दलीलें

बेनीवाल के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह मामला एक राजनीतिक विरोध से जुड़ा है, जिसमें हिंसा अथवा किसी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रैली चुनावी समय में एक वैध राजनीतिक गतिविधि थी और ऐसे में एफआईआर के आधार पर सख्त कार्रवाई अनुचित होगी।

सरकार की भूमिका और आगे की स्थिति

दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने बेनीवाल को अंतरिम सुरक्षा दी और राज्य सरकार व संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब माँगा। यह आदेश अंतरिम राहत है — अंतिम फैसला नहीं — और कार्यवाही अभी लंबित है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में इसी तरह के मामलों में मिसाल के रूप में उद्धृत की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या कोर्ट के संकेत अंतिम सुनवाई में भी बरकरार रहते हैं। यह मामला चुनावी राजनीति और प्रशासनिक शक्ति के टकराव का प्रतीक बन सकता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट ने किस मामले में राहत दी?
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को कुचेरा थाने में दर्ज एफआईआर मामले में अंतरिम राहत दी है। यह एफआईआर 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कुचेरा में हुई राजनीतिक रैली में प्रशासनिक निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन पर आधारित है।
कुचेरा थाने में बेनीवाल के खिलाफ एफआईआर कब और किसकी शिकायत पर दर्ज हुई?
यह एफआईआर 4 मई 2024 को सब-इंस्पेक्टर मुकेश कुमार की शिकायत पर कुचेरा थाने में दर्ज की गई थी। इसमें गैरकानूनी सभा, लोक सेवक के आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ते में बाधा उत्पन्न करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में आगे क्या निर्देश दिए हैं?
जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने राजस्थान सरकार और संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है और फिलहाल बेनीवाल के खिलाफ किसी भी सख्त कार्रवाई पर रोक है।
क्या हाईकोर्ट का यह आदेश अंतिम फैसला है?
नहीं, यह अंतरिम राहत है, अंतिम निर्णय नहीं। कार्यवाही अभी लंबित है और कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।
बेनीवाल के वकीलों ने कोर्ट में क्या दलील दी?
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रैली एक वैध राजनीतिक गतिविधि थी और इसमें हिंसा या संपत्ति को नुकसान का कोई आरोप नहीं है। वकीलों ने कहा कि चुनावी समय में किए गए शांतिपूर्ण विरोध पर इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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