पश्चिम बंगाल: CM सुवेंदु अधिकारी ने वन कर्मचारियों की सैलरी में ₹5,000 की बढ़ोतरी का ऐलान, अक्टूबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 18 अगस्त को राज्य के वन विभाग के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की — रेंजर्स, बीट अधिकारियों और फॉरेस्ट गार्ड्स के वेतन में ₹5,000 प्रतिमाह की वृद्धि की जाएगी, जो अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यह घोषणा मध्य कोलकाता के मोहरकुंज में आयोजित केंद्र सरकार के 'एक पेड़ मां के नाम' कार्यक्रम के दौरान की गई।
किसे कितना फायदा
मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 500 रेंजर्स की सैलरी में ₹5,000 की बढ़ोतरी होगी। इसी तरह बीट अधिकारियों और फॉरेस्ट गार्ड्स को भी ₹5,000 प्रतिमाह अतिरिक्त मिलेंगे। फॉरेस्ट असिस्टेंट्स, जिन्हें अब तक ₹12,000 मासिक वेतन मिलता था, उनके वेतन में ₹2,000 की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री ने वन कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, 'आप लोग कई जगहों पर बहुत जोखिम उठाकर काम करते हैं। मैं आपको एक अच्छी खबर देता हूं। अक्टूबर में पूजा है, और उस महीने से 500 रेंजर्स की सैलरी बढ़ाई जा रही है।'
पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता
वेतन वृद्धि के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने इस वर्ष पश्चिम बंगाल में 10 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भवानीपुर में 1 लाख पेड़ लगाए जाएंगे और लगाए गए पेड़ों की दो साल तक देखभाल सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय का हवाला देते हुए कहा, 'अगर उत्तर प्रदेश 26 करोड़ पेड़ लगा सकता है, तो हम भी इस साल 10 करोड़ पेड़ लगाएंगे।' पौधरोपण अभियान तेज़ गति से जारी है।
बक्सा जंगल में बाघ छोड़ने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने एक और अहम घोषणा करते हुए बताया कि 2 अक्टूबर को उत्तर बंगाल के बक्सा जंगल में बाघ छोड़े जाएंगे। इसके अलावा कोलकाता के अलीपुर में एक नया एक्वेरियम भी बनाया जाएगा। ये घोषणाएं राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति को नई दिशा देती हैं।
'एक पेड़ मां के नाम' कार्यक्रम का संदर्भ
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और माताओं के सम्मान के लिए शुरू किया गया था। इस पहल के तहत देशभर में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें। पश्चिम बंगाल ने इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया है।
वन कर्मियों के वेतन में यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब देशभर में वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के जोखिम भरे कार्य को उचित मुआवज़े की माँग लंबे समय से उठती रही है। राज्य सरकार का यह कदम उस दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।