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असम गण परिषद के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से महत्वपूर्ण चर्चा की

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असम गण परिषद के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से महत्वपूर्ण चर्चा की

सारांश

नई दिल्ली में असम गण परिषद के नेताओं की भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात। इस चर्चा में चुनाव के बाद की रणनीति पर जोर दिया गया। जानिए इस बैठक के पीछे के कारण।

मुख्य बातें

असम गण परिषद के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात की।
चर्चा का मुख्य विषय चुनाव के बाद की रणनीति था।
एजीपी ने 2021 में 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन का महत्व बढ़ा।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा चुनावों के कुछ दिनों बाद, असम गण परिषद (एजीपी) के प्रमुख नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। यह बैठक भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन में निरंतर समन्वय का संकेत देती है।

एजीपी के अध्यक्ष अतुल बोरा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंता ने भाजपा प्रमुख से चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य चुनाव के बाद की रणनीति और भविष्य के संगठनात्मक तालमेल पर केंद्रित रहा। यह मुलाकात महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत, एजीपी भाजपा की एक प्रमुख सहयोगी है।

हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनावों में, एजीपी ने एनडीए के सीट-बंटवारे के समझौते के तहत 26 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने 89 निर्वाचन क्षेत्रों में और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे।

गठबंधन की यह संरचना पिछले चुनावों में अपनाए गए गठबंधन फॉर्मूले की निरंतरता को दर्शाती है, जहां एजीपी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जहाँ उसकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत है।

इस क्षेत्रीय पार्टी के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, विशेषकर 2021 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में। 2021 में, एजीपी ने भी 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और 9 सीटों पर जीत हासिल की, जिससे 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में एनडीए की कुल सीटों की संख्या 75 तक पहुंचने में योगदान मिला।

इन नतीजों ने एजीपी की भूमिका को एक छोटे, लेकिन महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में फिर से पुष्टि किया है।

पिछले कुछ वर्षों में, असम की एक प्रमुख क्षेत्रीय ताकत एजीपी का चुनावी दायरा भले ही सिकुड़ा हो, लेकिन ऊपरी असम के कुछ क्षेत्रों और वहां के मूल निवासियों के बीच इसका प्रभाव अब भी कायम है।

हाल के चुनावों में भाजपा के साथ उसका गठबंधन उसकी राजनीतिक रणनीति का मुख्य केंद्र रहा है।

यह बैठक एनडीए के सहयोगी दलों द्वारा एकजुटता बनाए रखने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी रणनीतियों को पुनः निर्धारित करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब असम विधानसभा चुनावों के अंतिम परिणामों का अभी भी इंतजार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि असम के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम गण परिषद (एजीपी) किस प्रकार भाजपा के साथ जुड़ी है?
एजीपी भाजपा की एक प्रमुख सहयोगी पार्टी है और एनडीए के तहत चुनावों में सहयोग करती है।
हाल के असम विधानसभा चुनावों में एजीपी का प्रदर्शन कैसा रहा?
एजीपी ने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और 9 सीटें जीतीं, जिससे एनडीए की कुल सीटों की संख्या 75 तक पहुंची।
क्या इस बैठक का कोई विशेष महत्व है?
हां, यह बैठक चुनाव के बाद की रणनीति और संगठनात्मक तालमेल के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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