दक्षिण अफ्रीका में बेरोजगारी दर 32.7% पर, युवाओं में 45.8% — रवि नायडू ने गिनाए कारण
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका में बेरोजगारी संकट 2026 की पहली तिमाही में और गहरा गया है। स्टैटिस्टिक्स साउथ अफ्रीका के आँकड़ों के अनुसार, देश की आधिकारिक बेरोजगारी दर बढ़कर 32.7 प्रतिशत हो गई है — जो 2025 की अंतिम तिमाही में 31.4 प्रतिशत थी। इस अवधि में 3,45,000 नौकरियाँ समाप्त हुईं और बेरोजगार लोगों की कुल संख्या 81 लाख से अधिक हो गई। यूथ एम्प्लॉयमेंट सर्विस (YES) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि नायडू के अनुसार, इस संकट की जड़ें कमज़ोर आर्थिक वृद्धि और शिक्षा-कौशल प्रणाली की गहरी खामियों में हैं।
आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार
स्टैटिस्टिक्स साउथ अफ्रीका के आँकड़ों के अनुसार, देश की GDP वृद्धि दर 2025 में मात्र 1.1 प्रतिशत रही — जो रोजगार सृजन के लिए पर्याप्त नहीं है। नायडू ने कहा कि माँग पक्ष पर दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक वृद्धि काफी कमज़ोर रही है, जिसके चलते औपचारिक क्षेत्र में नई नियुक्तियाँ सीमित हो गई हैं। अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि इस स्तर की वृद्धि दर बेरोजगारी की मौजूदा चुनौती को पलट नहीं सकती।
युवाओं में बेरोजगारी की भयावह स्थिति
समग्र बेरोजगारी दर से भी अधिक चिंताजनक युवाओं की स्थिति है। स्टैटिस्टिक्स साउथ अफ्रीका के अनुसार, युवा बेरोजगारी दर 45.8 प्रतिशत तक पहुँच गई है — यानी नौकरी तलाश रहे लगभग आधे युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। नायडू ने बताया कि जो युवा विश्वविद्यालय की डिग्री रखते हैं, उनके लिए संभावनाएँ थोड़ी बेहतर हैं, लेकिन अधिकांश युवा उच्च शिक्षा तक पहुँच ही नहीं पाते, जिससे उनके अवसर और सीमित हो जाते हैं।
शिक्षा और कौशल प्रणाली की विफलता
नायडू के अनुसार, भारी सरकारी खर्च के बावजूद शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली युवाओं को कार्यस्थल के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं कर पा रही। उन्होंने कहा, "शिक्षा और कौशल विकास युवाओं को पर्याप्त रूप से नौकरी के लिए तैयार नहीं कर पाए हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "युवाओं को एंट्री-लेवल नौकरियों के लिए भी बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, और न शिक्षा प्रणाली, न परिवार — कोई उन्हें औपचारिक रोजगार के लिए ठीक से तैयार कर पाता है।" यह ऐसे समय में आया है जब YES कार्यक्रम — जिसे 2018 में राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने युवा बेरोजगारी घटाने के लिए शुरू किया था — लगातार काम कर रहा है, फिर भी संख्याएँ बिगड़ती जा रही हैं।
तकनीक और भविष्य का खतरा
नायडू ने आगाह किया कि आने वाले वर्षों में नई तकनीकें — विशेषकर स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता — रोजगार के अवसरों को और सीमित कर सकती हैं। अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों ने भी चेताया है कि लगातार ऊँची युवा बेरोजगारी से असमानता, गरीबी और सामाजिक अस्थिरता जैसे दीर्घकालिक जोखिम बढ़ सकते हैं।
सरकार से अपील: बुनियादी ढाँचे और निजी निवेश पर ज़ोर
नायडू ने सरकार से आग्रह किया कि वह निजी क्षेत्र के साथ मिलकर निवेश बढ़ाए और अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल करे। उनके अनुसार बंदरगाह, रेलवे, सड़क, ऊर्जा, जल आपूर्ति और डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में सुधार और बुनियादी ढाँचे पर निवेश से ही दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन संभव है। गौरतलब है कि यह तीसरी बार नहीं है जब दक्षिण अफ्रीका की बेरोजगारी दर वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक में गिनी जा रही हो — देश पिछले एक दशक से इस चुनौती से जूझ रहा है।