क्या बजट 2026-27 में रोजगार पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए? : मोहनदास पई
सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।
- बजट 2026-27 में रोजगार पर ध्यान देना आवश्यक है।
- हर साल 2.5 करोड़ युवा रोजगार की तलाश में आते हैं।
- सरकार को कौशल योजना को मजबूत करना चाहिए।
- स्टार्टअप्स के लिए अधिक फंडिंग की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध उद्योगपति एवं इंफोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य टीवी मोहनदास पई ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में रोजगार तेजी से निर्मित हो रहे हैं, इसलिए बजट 2026-27 में सबसे ज्यादा ध्यान रोजगार पर होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मोहनदास पई ने बताया कि हर साल 1.2 से 1.4 करोड़ लोग ईपीएफओ से जुड़ते हैं और आधार कार्ड के माध्यम से भुगतान करते हैं।
उन्होंने कहा, "उन सभी वामपंथी जेएनयू समर्थकों की बातें न मानें जो कहते हैं कि नौकरियां नहीं हैं। नौकरियां मिल रही हैं।"
इसके आगे उन्होंने कहा, "हालांकि भारत की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देश में युवाओं की संख्या बहुत अधिक है। 1990 से 2010 के बीच लगभग 50 करोड़ बच्चे पैदा हुए, जो अब काम करने की उम्र में आ चुके हैं। हर साल करीब 2.5 करोड़ युवा काम की तलाश में आते हैं, जिनमें से लगभग 1.82 करोड़ लोग नौकरी की चाह रखते हैं।"
उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत नौकरियों में 20,000 रुपए से कम वेतन मिलता है, इसलिए देश को विशेष रूप से शहरों में अच्छी और उच्च वेतन वाली नौकरियों का निर्माण करना आवश्यक है।
पई ने केंद्र सरकार की कौशल योजना को और मजबूत करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के 350 सबसे गरीब जिलों को रोजगार, विशेष रोजगार जोन (एसईजेड) घोषित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर कोई व्यक्ति या कंपनी वहां नौकरी देती है और कर्मचारी के लिए ईएसआई और पीएफ जमा करती है, तो सरकार उस कर्मचारी के लिए दो साल तक हर महीने 2,000 रुपए की सहायता देगी।
पई ने बताया कि गांवों और छोटे शहरों में लोगों को नौकरी देने पर कंपनियों को उन्हें प्रशिक्षण देना होगा। इसलिए सरकार को भी दो साल तक ईएसआई और पीएफ का खर्च उठाना चाहिए। इससे गरीब जिलों में बड़ी संख्या में नौकरियों का सृजन होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि देश के 5,000 छोटे शहरों में सड़क, पानी, सफाई और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए। इससे वहां छोटे उद्योग स्थापित होंगे और लोगों को अपने ही शहरों में काम मिलेगा। पई का मानना है कि इससे बड़े शहरों में श्रमिकों की कमी होगी और वेतन में वृद्धि होगी।
मोहनदास पई ने आगे कहा कि सरकार को देश के 10 बड़े शहरों का चयन कर उन्हें अगले 5 साल तक हर साल 5,000 से 10,000 करोड़ रुपए देने चाहिए, ताकि वहां सड़क, पानी, सीवर और हवा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि देश का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है। इस साल निवेश लगभग 95 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। अगले साल देश की आर्थिक वृद्धि 6.5 से 7 प्रतिशत रह सकती है, भले ही दुनिया में अनिश्चितता हो।
आईटी क्षेत्र के बारे में पई ने कहा कि आईटी और स्टार्टअप सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए अधिक फंडिंग की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों में भारत के स्टार्टअप्स को 160 अरब डॉलर की फंडिंग मिली, जबकि चीन को 845 अरब डॉलर और अमेरिका को 2.35 ट्रिलियन डॉलर की फंडिंग मिली। इसलिए हमें और अधिक फंडिंग की आवश्यकता है।
पई ने कहा कि स्टार्टअप फंड 2015 में शुरू हुआ था और 10,000 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ यह सफल रहा है। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार के लिए इसे सही तरीके से करना बहुत जरूरी है। आईटी स्टार्टअप और उन्नत प्रौद्योगिकी के लिए फंडिंग महत्वपूर्ण है, और मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा करेंगे।
पई ने सवाल उठाया कि हम इनवेशन पर हर साल 50,000 करोड़ रुपए क्यों नहीं खर्च कर सकते। चीन ने पिछले सात वर्षों में एआई पर 150 अरब डॉलर और पिछले 10 वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर 300 अरब डॉलर खर्च किए हैं और वैश्विक स्तर पर सबसे आगे हैं।
उन्होंने कहा, "हमें 11,000 करोड़ रुपए से लेकर 12,000 करोड़ रुपए तक का एआई फंड मिला है। फिर भी, वे इसे छोटी-छोटी कंपनियों में बांट रहे हैं।"
पई ने आगे कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे में सरकार को नवाचार और नई तकनीक के लिए हर साल 40,000 से 50,000 करोड़ रुपए खर्च करने चाहिए, ताकि भारत दुनिया के साथ तेजी से आगे बढ़ सके।