BJP का 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान शुरू, PM मोदी की ईंधन बचाओ अपील के बाद देशव्यापी मुहिम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रविवार, 17 मई को 'मेरा भारत, मेरा योगदान' नाम से एक देशव्यापी जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की — यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया जिसमें उन्होंने नागरिकों से ईंधन की खपत घटाने का आग्रह किया था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में यह अभियान राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिश है।
अभियान के मुख्य उद्देश्य
इस पहल का केंद्रीय लक्ष्य नागरिकों को राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने, ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन में शामिल करने और सरल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। BJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे प्रधानमंत्री की अपील को पार्टी के हर कार्यक्रम में प्रमुखता से शामिल करें।
इसके अतिरिक्त, नागरिकों से सोना खरीदने से परहेज़ करने, गैर-ज़रूरी विदेश यात्राएँ टालने और 'स्वदेशी' उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया है।
नेताओं की व्यावहारिक पहल
कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और सरकारी विभागों ने पहले ही ईंधन बचत के उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं। अनेक मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने मेट्रो यात्रा और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग शुरू किया है, साथ ही अपने काफिलों का आकार उल्लेखनीय रूप से घटाया है। NDA-शासित राज्यों में भी नेताओं ने काफिलों में कटौती करते हुए इस संदेश को ज़मीन पर उतारने की कोशिश की है।
आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपेक्षाएँ
अभियान के तहत आम नागरिकों और पार्टी सदस्यों को कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहनों का उपयोग न करें।
ऊर्जा खपत में कमी के लिए ऑनलाइन और वर्चुअल बैठकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और सप्ताह में 1-2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम' की नीति लागू करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
संगठनात्मक लक्ष्य और कृषि क्षेत्र
देशभर में BJP कार्यालयों में बिजली और ईंधन की खपत को 50 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य तय किया गया है। नागरिकों से खाद्य तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कमी करने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को आधा करने और प्राकृतिक व जैविक खेती को अपनाने का अनुरोध भी किया गया है।
स्वागत समारोहों में भीड़ सीमित करने और नेताओं के काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि यह राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ और गहरी कर दी हैं।