यास्तिका भाटिया का लॉर्ड्स शतक: 'शतक के लिए अपना खेल नहीं बदलूंगी', 158 गेंदों में 113 रन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने स्पष्ट किया है कि लॉर्ड्स में अपनी ऐतिहासिक शतकीय पारी के दौरान उन्होंने अपने बल्लेबाजी के स्वाभाविक अंदाज में कोई बदलाव नहीं किया। 18 जुलाई को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाटिया ने कहा कि भारत के आक्रामक क्रिकेट ब्रांड पर टिके रहना उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
भाटिया की बल्लेबाजी दर्शन
भाटिया ने कहा, 'मैंने शतक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा था। मेरा मकसद था कि मैं अपने हिसाब से खेलूंगी और आक्रामक क्रिकेट खेलूंगी। बेशक मैं 80 या 90 रन के आस-पास रहूं, लेकिन गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेलूंगी। मैं सिर्फ शतक बनाने के लिए अपने खेलने का अंदाज नहीं बदलूंगी।' यह बयान उस मानसिक अनुशासन को दर्शाता है जो भारतीय महिला क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुआ है।
कोच अमोल मुजुमदार का मार्गदर्शन
भाटिया ने कोच अमोल मुजुमदार के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मुजुमदार ने टी20 श्रृंखला के दौरान भी उन्हें यही संदेश दिया था। भाटिया ने उनके शब्द उद्धृत करते हुए कहा, 'अमोल सर मुझे टी20 के दौरान भी यही बता रहे थे कि हम सब एक तरह का क्रिकेट खेल रहे हैं जहाँ हम आक्रामक रहना चाहते हैं और हमेशा सकारात्मक रहना चाहते हैं। आप लंबे समय के बाद सेट-अप में आ रही हैं। हम आपसे भी ऐसी ही क्रिकेट की उम्मीद कर रहे हैं।' इस स्पष्ट दिशानिर्देश ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भाटिया की वापसी को सहज बनाया।
लॉर्ड्स में ऐतिहासिक पारी
यास्तिका भाटिया ने दूसरी पारी में 158 गेंदों पर 14 चौकों की मदद से 113 रन बनाए और लॉर्ड्स ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला बल्लेबाज बन गईं। गौरतलब है कि भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच यह मैच लॉर्ड्स में खेला गया पहला महिला टेस्ट था, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक अवसर था।
टीम की जीत में निर्णायक भूमिका
भाटिया की इस पारी की बदौलत भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड को 270 रनों के बड़े अंतर से पराजित किया। भाटिया ने अपने शतक को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक टीम की सामूहिक सफलता का प्रतीक बताया और कहा कि पिछले तीन वर्षों से टीम लगातार सकारात्मक क्रिकेट खेल रही है। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के उस आक्रामक ब्रांड की पुष्टि करती है जो सभी प्रारूपों में टीम की पहचान बनता जा रहा है।
आगे की राह
लॉर्ड्स की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक नई पहचान स्थापित करती है। भाटिया जैसी खिलाड़ियों की निडर सोच और आक्रामक दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ी की महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।