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सेंसेक्स 74,243 पर बंद, लगातार दूसरे सप्ताह 0.71% गिरा; वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता का असर

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सेंसेक्स 74,243 पर बंद, लगातार दूसरे सप्ताह 0.71% गिरा; वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चितता का असर

सारांश

लगातार दूसरे सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए — पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और विकास दर अनुमान में कटौती ने RBI की तरलता नीति और रुपये की मज़बूती के सकारात्मक असर को ढक दिया। अब निवेशकों की नज़र मानसून, व्यापार वार्ता और कच्चे तेल पर है।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स शुक्रवार को 116.67 अंक (0.16%) गिरकर 74,243.34 पर बंद; सप्ताह में कुल 0.71% की गिरावट।
NSE निफ्टी 50 सप्ताह में 0.77% टूटा; शुक्रवार को 23,366 पर बंद हुआ।
निफ्टी मिडकैप 100 में सप्ताह के दौरान 1.57% की तेज़ गिरावट; स्मॉलकैप 100 में केवल 0.16% की कमज़ोरी।
RBI MPC के तरलता उपायों और रुपये की मज़बूती ने बाज़ार को आंशिक सहारा दिया।
निफ्टी के लिए 23,250 अहम समर्थन; 23,450–23,550 प्रतिरोध क्षेत्र।
आगे मानसून प्रगति , भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और कच्चे तेल की कीमतें बाज़ार की दिशा तय करेंगी।

BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी 50 लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए — 6 जून 2025 को सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16% टूटकर 74,243.34 पर और निफ्टी 0.21% की कमज़ोरी के साथ 23,366 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.71% और निफ्टी में 0.77% की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने घरेलू नीतिगत सकारात्मकता के असर को सीमित कर दिया।

साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े

सप्ताह के दौरान व्यापक बाज़ार सूचकांकों में प्रमुख इंडेक्स से अधिक दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.57% की तेज़ गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में केवल 0.16% की कमज़ोरी दर्ज हुई। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, पूरे सप्ताह कारोबार सीमित दायरे में रहा और हल्का नकारात्मक रुख बना रहा, हालाँकि सप्ताह के अंत में कुछ सुधार भी देखने को मिला।

गिरावट के प्रमुख कारण

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसके साथ ही, आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती ने बाज़ार की भावना को ठंडा किया और कई निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता अपनाया। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनियों के तिमाही नतीजों का मौसम भी समाप्त हो चुका है, जिससे बाज़ार को नई दिशा देने वाले घरेलू संकेत सीमित हो गए हैं।

सकारात्मक कारक: RBI और रुपये की भूमिका

विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा तरलता बढ़ाने वाले कदमों और भारतीय रुपये की स्थिरता ने निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बनाए रखा। उल्लेखनीय है कि इस दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मज़बूत हुआ और ₹85 के स्तर से नीचे पहुँच गया। विदेशी निवेशकों के लिए निवेश को सुगम बनाने, बॉन्ड बाज़ार में कर संबंधी बाधाएँ कम करने और पूँजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने के कदमों को बाज़ार के लिए सकारात्मक माना गया।

तकनीकी स्तर: कहाँ है समर्थन और प्रतिरोध

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,450–23,550 का दायरा मज़बूत प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) क्षेत्र है, जबकि 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) बना हुआ है। बैंक निफ्टी के लिए 54,800–55,000 का दायरा तत्काल प्रतिरोध और 53,800–54,000 का दायरा अहम समर्थन क्षेत्र माना जा रहा है।

आगे क्या देखेंगे निवेशक

विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशकों की नज़र RBI की सहयोगी नीतियों की निरंतरता, महँगाई की दिशा और बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) के रुख पर रहेगी। इसके अलावा, मानसून की प्रगति और ग्रामीण माँग पर उसके प्रभाव, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं की प्रगति और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव बाज़ार को नई दिशा दे सकते हैं। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब वैश्विक अनिश्चितता ने घरेलू सकारात्मकता पर भारी पड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बाज़ार का सीमित दायरे में सतर्क कारोबार जारी रहने की आशंका है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
इस सप्ताह सेंसेक्स में 0.71% और निफ्टी 50 में 0.77% की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार 6 जून को सेंसेक्स 74,243.34 और निफ्टी 23,366 पर बंद हुआ।
बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक विकास दर अनुमान में कटौती प्रमुख कारण रहे। इन वैश्विक अनिश्चितताओं ने घरेलू नीतिगत सकारात्मकता के असर को सीमित कर दिया।
RBI के कदमों का बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा तरलता बढ़ाने वाले उपायों और रुपये की स्थिरता ने निवेशकों का भरोसा आंशिक रूप से बनाए रखा। हालाँकि, वैश्विक दबाव के कारण यह सकारात्मकता पूरी तरह बाज़ार में नहीं दिख सकी।
निफ्टी के लिए अहम तकनीकी स्तर कौन से हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन है, जबकि 23,450–23,550 का दायरा प्रतिरोध क्षेत्र है। बैंक निफ्टी के लिए 53,800–54,000 समर्थन और 54,800–55,000 प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की प्रगति, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता, RBI की नीतिगत निरंतरता और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें बाज़ार को आगे दिशा देंगी। तिमाही नतीजों का मौसम समाप्त होने से घरेलू संकेत भी सीमित रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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