निफ्टी-सेंसेक्स में साप्ताहिक 1.7% की बढ़त, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता और कच्चे तेल की गिरावट से बाज़ार को मिला सहारा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाज़ार ने 20 जून 2025 को समाप्त सप्ताह में लगातार दूसरी बार मज़बूत साप्ताहिक बढ़त दर्ज की, जिसके पीछे अमेरिका-ईरान शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदें और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई गिरावट प्रमुख कारण रहे। निफ्टी 50 में सप्ताह भर में 1.65 प्रतिशत और BSE सेंसेक्स में 1.69 प्रतिशत की बढ़त रही, हालाँकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मुनाफावसूली और आईटी शेयरों में बिकवाली से दोनों सूचकांकों पर दबाव देखा गया।
साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े
निफ्टी 50 सप्ताह के अंतिम सत्र में 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,013.10 के स्तर पर बंद हुआ। BSE सेंसेक्स अंतिम दिन 607 अंक यानी 0.78 प्रतिशत टूटकर 76,802 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह की गणना में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने करीब 1.7 प्रतिशत की बढ़त बनाए रखी।
व्यापक बाज़ार ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में सप्ताह भर में 2.62 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 3.23 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान एमओयू: बाज़ार की धारणा पर असर
सप्ताह के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और व्यावसायिक जहाज़ों की आवाजाही बहाल करने पर सहमति बनी। इसी उम्मीद में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
हालाँकि सप्ताह के अंत में शांति वार्ता अचानक रद्द होने की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थम गया और बाज़ार में मुनाफावसूली देखी गई। विश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार से अगले सप्ताह भी बाज़ार की धारणा को समर्थन मिल सकता है।
सेक्टर प्रदर्शन: डिफेंस चमका, आईटी पिछड़ा
डिफेंस सेक्टर सप्ताह का सबसे मज़बूत प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा और इसमें 6.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्र की मज़बूत बुनियादी स्थिति इस तेज़ी का प्रमुख कारण रही। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट और फार्मा सेक्टर में भी अच्छी तेज़ी देखने को मिली।
दूसरी ओर, आईटी सेक्टर सप्ताह का सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपनी स्थिर मुद्रा राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाते हुए उम्मीद से कमज़ोर आउटलुक जारी किया।
मुद्रा और मौद्रिक नीति
मुद्रा बाज़ार में रुपया सप्ताह भर में डॉलर के मुकाबले करीब 79 पैसे मज़बूत होकर ₹84.35 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास पहुँच गया।
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने सतर्क और आँकड़ों पर आधारित रुख बनाए रखा तथा भविष्य के लिए सीमित संकेत दिए। इससे यह धारणा मज़बूत हुई कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का रुख भी फिलहाल सतर्क बना हुआ है, हालाँकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और व्यापार समझौतों में प्रगति से आर्थिक परिदृश्य में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है।
आगे क्या देखें निवेशक
निवेशकों की नज़र भारत के पीएमआई और क्रेडिट ग्रोथ के आँकड़ों के साथ-साथ अमेरिका के पीसीई मुद्रास्फीति और जीडीपी के आँकड़ों पर भी रहेगी, जो बाज़ार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा, मानसून की प्रगति भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जून 2025 में अब तक कुल वर्षा सामान्य से 38 प्रतिशत कम दर्ज की गई है और अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून में और देरी होती है तो खरीफ फसलों की बुआई, खाद्य महंगाई और ग्रामीण माँग को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं।