निफ्टी 24,056 और सेंसेक्स 77,100 पर बंद; कच्चे तेल की गिरावट से लगातार तीसरे सप्ताह बाजार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार ने 27 जून 2025 को समाप्त सप्ताह में लगातार तीसरी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की, जिसे कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक आई तेज गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात के सामान्य होने से बल मिला। निफ्टी-50 सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ, जबकि बीएसई सेंसेक्स 109 अंक यानी 0.14 प्रतिशत उछलकर 77,100 पर बंद हुआ।
साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े
पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी-50 में 0.18 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। हालाँकि, व्यापक बाजार की तस्वीर मिली-जुली रही — निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक सप्ताह में 1.15 प्रतिशत लुढ़का, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 में मात्र 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई। यह विभाजन दर्शाता है कि तेजी मुख्यतः लार्जकैप शेयरों तक सीमित रही।
बाजार को मिले सकारात्मक संकेत
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता में प्रगति से भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को मौद्रिक नीति में अधिक लचीलापन देगी। इससे महंगाई, राजकोषीय घाटे और चालू खाते की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
साप्ताहिक कारोबार में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निजी बैंकिंग शेयरों में भी तेजी देखी गई, जिसे FCNR (B) जमा स्वैप योजना पर RBI की स्पष्टता से बल मिला। दूसरी ओर, कमोडिटी कीमतों में गिरावट के कारण मेटल सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा। उपभोक्ता माँग को लेकर चिंताओं के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी कमजोरी बनी रही।
चिंताएँ और जोखिम
यह ऐसे समय में आया है जब असमान मानसून वितरण को लेकर चिंताएँ उभरने लगी हैं, जिससे ग्रामीण माँग और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि मानसून की अनिश्चितता कृषि उत्पादन और ग्रामीण खपत दोनों को प्रभावित करती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण चालक हैं।
तकनीकी स्तर और आगे की राह
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,400–24,500 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा, जबकि 23,900–23,800 मजबूत समर्थन (सपोर्ट) है। बैंक निफ्टी के लिए 57,400–57,500 सपोर्ट और 58,900–59,000 रेजिस्टेंस का स्तर माना जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। इसके अलावा, अमेरिकी PCE महंगाई आँकड़े, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोज़गारी दर के आँकड़े अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं। घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन (IIP) और जून के PMI आँकड़े भी निवेशकों की नज़र में रहेंगे।
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, निवेशकों को फिलहाल संतुलित लेकिन सकारात्मक रणनीति अपनानी चाहिए और उन बुनियादी रूप से मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए, जिनके शेयर हाल की गिरावट के बावजूद ठोस बने हुए हैं।