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निफ्टी 24,056 और सेंसेक्स 77,100 पर बंद; कच्चे तेल की गिरावट से लगातार तीसरे सप्ताह बाजार में तेजी

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निफ्टी 24,056 और सेंसेक्स 77,100 पर बंद; कच्चे तेल की गिरावट से लगातार तीसरे सप्ताह बाजार में तेजी

सारांश

कच्चे तेल की कीमतें ईरान-युद्ध पूर्व स्तर पर लौटीं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात सामान्य हुआ — इन दो कारकों ने भारतीय बाजार को लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त दिलाई। लेकिन मिडकैप में 1.15% की गिरावट बता रही है कि यह तेजी अभी व्यापक नहीं हुई है।

मुख्य बातें

सेंसेक्स सप्ताह के अंत में 109 अंक उछलकर 77,100 पर बंद; साप्ताहिक बढ़त 0.39% ।
निफ्टी-50 24,056 पर बंद; साप्ताहिक बढ़त 0.18% — लगातार तीसरा सकारात्मक सप्ताह।
निफ्टी मिडकैप-100 सप्ताह में 1.15% गिरा; व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता; मेटल सेक्टर सर्वाधिक दबाव में।
निफ्टी के लिए 24,400–24,500 रेजिस्टेंस और 23,900–23,800 सपोर्ट का स्तर अहम।
आगामी Q1 तिमाही नतीजे और अमेरिकी PCE आँकड़े बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।

भारतीय शेयर बाजार ने 27 जून 2025 को समाप्त सप्ताह में लगातार तीसरी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की, जिसे कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक आई तेज गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात के सामान्य होने से बल मिला। निफ्टी-50 सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ, जबकि बीएसई सेंसेक्स 109 अंक यानी 0.14 प्रतिशत उछलकर 77,100 पर बंद हुआ।

साप्ताहिक प्रदर्शन: मुख्य आँकड़े

पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी-50 में 0.18 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। हालाँकि, व्यापक बाजार की तस्वीर मिली-जुली रही — निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक सप्ताह में 1.15 प्रतिशत लुढ़का, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 में मात्र 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई। यह विभाजन दर्शाता है कि तेजी मुख्यतः लार्जकैप शेयरों तक सीमित रही।

बाजार को मिले सकारात्मक संकेत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता में प्रगति से भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को मौद्रिक नीति में अधिक लचीलापन देगी। इससे महंगाई, राजकोषीय घाटे और चालू खाते की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन

साप्ताहिक कारोबार में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निजी बैंकिंग शेयरों में भी तेजी देखी गई, जिसे FCNR (B) जमा स्वैप योजना पर RBI की स्पष्टता से बल मिला। दूसरी ओर, कमोडिटी कीमतों में गिरावट के कारण मेटल सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा। उपभोक्ता माँग को लेकर चिंताओं के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी कमजोरी बनी रही।

चिंताएँ और जोखिम

यह ऐसे समय में आया है जब असमान मानसून वितरण को लेकर चिंताएँ उभरने लगी हैं, जिससे ग्रामीण माँग और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि मानसून की अनिश्चितता कृषि उत्पादन और ग्रामीण खपत दोनों को प्रभावित करती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण चालक हैं।

तकनीकी स्तर और आगे की राह

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,400–24,500 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा, जबकि 23,900–23,800 मजबूत समर्थन (सपोर्ट) है। बैंक निफ्टी के लिए 57,400–57,500 सपोर्ट और 58,900–59,000 रेजिस्टेंस का स्तर माना जा रहा है।

आने वाले हफ्तों में कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। इसके अलावा, अमेरिकी PCE महंगाई आँकड़े, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोज़गारी दर के आँकड़े अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं। घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन (IIP) और जून के PMI आँकड़े भी निवेशकों की नज़र में रहेंगे।

एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, निवेशकों को फिलहाल संतुलित लेकिन सकारात्मक रणनीति अपनानी चाहिए और उन बुनियादी रूप से मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए, जिनके शेयर हाल की गिरावट के बावजूद ठोस बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मिडकैप में 1.15% की गिरावट यह स्पष्ट कर देती है कि यह रैली अभी भी लार्जकैप तक सिमटी हुई है — जो व्यापक बाजार में विश्वास की कमी का संकेत है। कच्चे तेल की गिरावट एक बाहरी कारक है, घरेलू बुनियाद नहीं; यदि ईरान वार्ता फिर से पटरी से उतरती है तो यह सपोर्ट तेजी से गायब हो सकता है। असमान मानसून और आगामी तिमाही नतीजों की दोहरी चुनौती के बीच, बाजार की यह शांति उतनी टिकाऊ नहीं दिखती जितनी सुर्खियाँ बता रही हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 जून 2025 को निफ्टी और सेंसेक्स किस स्तर पर बंद हुए?
27 जून 2025 को निफ्टी-50 0.14% की बढ़त के साथ 24,056 पर और सेंसेक्स 109 अंक यानी 0.14% उछलकर 77,100 पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरे सप्ताह की बढ़त थी।
इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में तेजी के क्या कारण रहे?
कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक आई गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात सामान्य होना मुख्य कारण रहे। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति और भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
इस सप्ताह कौन से सेक्टर सबसे अच्छे और सबसे खराब रहे?
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निजी बैंकिंग शेयरों में भी तेजी रही। मेटल सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी कमजोरी देखी गई।
निफ्टी के लिए अगले हफ्ते के प्रमुख तकनीकी स्तर क्या हैं?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,400–24,500 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस और 23,900–23,800 का स्तर मजबूत सपोर्ट रहेगा। बैंक निफ्टी के लिए 57,400–57,500 सपोर्ट और 58,900–59,000 रेजिस्टेंस का स्तर महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में बाजार को कौन से कारक प्रभावित करेंगे?
कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिकी PCE महंगाई आँकड़े, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोज़गारी दर के आँकड़े प्रमुख कारक होंगे। घरेलू स्तर पर IIP आँकड़े और जून के PMI डेटा भी निवेशकों की नज़र में रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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