सेंसेक्स 455 अंक टूटा, 78,499 पर बंद; पश्चिम एशिया तनाव से बैंक-फाइनेंस शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 7 अगस्त को 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,499.17 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत फिसलकर 24,570.65 पर आ गया। पश्चिम एशिया में नए सिरे से उभरे भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने मध्य पूर्व में शांति समझौते की संभावनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया, जिससे वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग शेयरों पर भारी दबाव पड़ा।
मुख्य बाजार संकेत
सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में व्यापक बाजार की स्थिति मिली-जुली रही। निफ्टी मिडकैप में 0.22 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत की सामान्य गिरावट के साथ बंद हुआ। यह संकेत देता है कि बिकवाली का दबाव मुख्यतः बड़े-कैप वित्तीय शेयरों तक सीमित रहा।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टर के लिहाज से निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे अधिक दबाव में रहे। दूसरी ओर, निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी ने हरे निशान में बंद होकर बाजार को आंशिक सहारा दिया। निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक में भी तेजी देखी गई।
निफ्टी 50 में सबसे अधिक बढ़त पाने वाले शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), एचसीएल टेक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शामिल रहे। इसके विपरीत, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस सर्वाधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मार्केट विशेषज्ञ सुनील शाह ने कहा कि शुक्रवार के सत्र में प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट मुख्यतः पश्चिम एशिया में नए सिरे से बढ़े तनावों से प्रेरित रही। उन्होंने कहा, 'अभी कंपनियों के नतीजे आने का दौर चल रहा है और बाजार हर कंपनी के नतीजों पर प्रतिक्रिया दे रहा है। साथ ही, रात भर के संकेत भी नकारात्मक थे। आज वैश्विक संकेत भी नकारात्मक हैं। लेकिन मुझे लगता है कि धीरे-धीरे बाजार का रुख तेजी की ओर बढ़ रहा है।'
शाह ने आगे कहा, 'कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के आसपास हैं, और अगर पश्चिम एशिया में शांति समझौता होता है तो ये कीमतें कम हो सकती हैं। इसलिए मुझे लगता है कि बाजार अब गिरावट के बजाय थोड़ी ज्यादा सहज और तेजी की स्थिति में है।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब तिमाही नतीजों का मौसम चल रहा है और निवेशक कंपनी-दर-कंपनी प्रदर्शन को परख रहे हैं। वित्तीय क्षेत्र में बिकवाली से म्यूचुअल फंड निवेशकों के पोर्टफोलियो पर अल्पकालिक दबाव पड़ा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वहाँ की अनिश्चितता सीधे भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर असर डालती है।
क्या होगा आगे
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगले सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। पश्चिम एशिया में यदि तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो बाजार में रिकवरी की संभावना बन सकती है।