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मुंबई में 6 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू, सीजेपी आंदोलन के बाद 900 लोगों पर 8 FIR

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मुंबई में 6 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू, सीजेपी आंदोलन के बाद 900 लोगों पर 8 FIR

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी चिंगारी मुंबई तक पहुँची। प्रदर्शनों के बाद मुंबई पुलिस ने 6 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू कर दी और करीब 900 लोगों पर 8 FIR दर्ज कीं — यह संकेत है कि सीजेपी आंदोलन की गूँज अब महाराष्ट्र में भी महसूस की जा रही है।

मुख्य बातें

मुंबई पुलिस ने 24 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक पूरे शहर में निषेधाज्ञा लागू की।
5 या अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, नारेबाजी और सार्वजनिक भाषण पर पूर्ण प्रतिबंध।
सीजेपी समर्थित प्रदर्शनों के बाद करीब 900 लोगों के खिलाफ 8 FIR दर्ज।
आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत जारी किया गया।
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च में नीट-यूजी पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की गई थी।

मुंबई पुलिस ने 22 जुलाई को जारी आदेश के तहत गुरुवार, 24 जुलाई से 6 अगस्त तक पूरे शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह कदम दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) समर्थित आंदोलन के समर्थन में मुंबई के विभिन्न इलाकों में हुए प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। पुलिस ने इस सिलसिले में अब तक करीब 900 लोगों के खिलाफ 8 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं।

निषेधाज्ञा में क्या-क्या प्रतिबंधित है

आदेश के अनुसार इस अवधि में पाँच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सभा पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सार्वजनिक स्थानों पर नारेबाजी, भाषण देना, संगीत बजाना और लोगों को संबोधित करना भी वर्जित होगा।

इसके अतिरिक्त हथियार या विस्फोटक सामग्री लेकर चलने पर पूरी तरह रोक रहेगी। किसी व्यक्ति, शव या पुतले का सार्वजनिक प्रदर्शन भी निषिद्ध होगा। ऐसे पोस्टर, तख्तियाँ या प्रतीक — जिन्हें सक्षम प्राधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक या राज्य की सुरक्षा के लिए खतरनाक माने — तैयार करना, प्रदर्शित करना या वितरित करना भी प्रतिबंधित रहेगा।

कानूनी आधार

यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत जारी किया गया है, जो पुलिस को सार्वजनिक शांति बनाए रखने और अव्यवस्था रोकने के लिए विशेष प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के कोई भी सभा या प्रदर्शन आयोजित करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 20 जुलाई को सीजेपी के हजारों समर्थकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी पेपर लीक सहित बार-बार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की थी। इसी आंदोलन की लहर में मुंबई के कई इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने यह सख्त एहतियाती कदम उठाया।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की अपील

मुंबई पुलिस ने शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। प्रशासन के अनुसार विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सार्वजनिक शांति भंग होने, लोगों की जान को खतरा होने और संपत्ति को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई गई थी, जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया। पुलिस ने नागरिकों से आदेशों का पालन करने और शांति बनाए रखने की अपील की है। यह देखना होगा कि 6 अगस्त के बाद स्थिति सामान्य होती है या प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाई जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल माँगों — जैसे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता — का समाधान नहीं करतीं। केंद्र सरकार की ओर से नीट सुधारों पर ठोस कदम न उठाए जाने की स्थिति में यह आंदोलन और राज्यों में फैल सकता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में निषेधाज्ञा कब से कब तक लागू है?
मुंबई पुलिस का निषेधाज्ञा आदेश 24 जुलाई (गुरुवार) से 6 अगस्त 2026 तक प्रभावी है। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत जारी किया गया है।
मुंबई में निषेधाज्ञा क्यों लगाई गई?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी समर्थित आंदोलन के समर्थन में मुंबई के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया। पुलिस ने कहा कि शांति भंग होने और संपत्ति को नुकसान पहुँचने की आशंका थी।
सीजेपी आंदोलन की मुख्य माँगें क्या थीं?
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने वाले प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी पेपर लीक सहित बार-बार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की थी।
निषेधाज्ञा के दौरान मुंबई में क्या-क्या प्रतिबंधित है?
इस अवधि में पाँच या अधिक लोगों का एकत्र होना, जुलूस, नारेबाजी, भाषण, संगीत बजाना, हथियार या विस्फोटक सामग्री ले जाना और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक पोस्टर या तख्तियाँ प्रदर्शित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रदर्शनों के बाद मुंबई पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
मुंबई पुलिस ने सीजेपी समर्थित प्रदर्शनों के संबंध में करीब 900 लोगों के खिलाफ 8 FIR दर्ज की हैं। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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